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क्या लीची ले रही है बिहार में बच्चों की जान ? अब तक 54 बच्चों की मौत

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 June 2019, 11:10 IST

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के दो अस्पतालों में इस महीने 54 बच्चों की मौत हो गई. ये सभी बच्चे एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (चमकी बुखार) से पीड़ित है. सभी मृतक बच्चों की आयु 10 साल से भी कम है. एक ओर जहां मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्णा मेडिकल कॉलेज ऐंड हॉस्पिटल में 46 बच्चों की मौत हो गई है. वहीं, केजरीवाल मातृ सदन (केएमएस) में अबतक 8 बच्चों की जान चली गई है.

मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार के कारण लगातार बच्चों की मौते हो रही हैं. इस साल जनवरी से अबतक कुल 179 मामले संदिग्ध एईएस के सामने आए हैं. बिहार की ऐसी स्थिति में अब सवाल ये उठ रहा है कि क्या इन बच्चों की मौत लीची के कारण हुई है?

बिहार के मुजफ्फपुर में बच्चों की मौत का कारण जानने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सात सदस्यीय केंद्र सरकार की टीम जांच कर रही है. इन जांच टीम ने दावा किया है कि बच्चों की मौत हाइपोग्लाइसीमिया (शरीर में अचानक शुगर की कमी) की वजह से हो रही है.

हाइपोग्लाइसीमिया का कारण चिलचिलाती गर्मी, नमी और बारिश का न होना है. इससे पहले रिपोर्ट्स में कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चमकी बुखार से हो रही मौत का कारण लीची खाना बताया था. इन विशेषज्ञों के मुताबिक, मुजफ्फरपुर में उगाई जाने वाली लीची में कुछ जहरीले तत्व हैं, जो चमकी बुखार और बच्चों की मौत की बड़ी वजह हैं.

नाश्ते में खा रहे हैं बच्चे लीची

गर्मियों में बिहार के अधिकांश इलाके में लीची ज्यादा होती है. खासतौर पर मुजफ्फपुर में लीची काफी मात्रा में होती है. ऐसे में यहां के ग्रामीण बच्चे सुबह नाश्ते में खाली पेट लीची खाते हैं. डॉक्टर्स के मुताबिक, खाली पेट लीची खाने से बच्चों में घातक मेटाबॉलिक बीमारी पैदा करता है, जिसे हाइपोग्लाइसीमिया इंसेफेलोपैथी कहते हैं. इस लीची में मिथाइल साइक्लोप्रोपाइल-ग्लाइसिन (MCPG) नाम का तत्व पाया जाता है.

जब बच्चों का शरीर काफी समय तक भूखा रहता है, तो पोषण की कमी के कारण शरीर में शुगर लेवल कम हो जाता है, जो दिमाग को काफी प्रभावित करता है. इसलिए डॉक्टर्स ने यहां परिजनों को सलाह दी है कि बच्चों को खाली पेट लीची न खिलाएं. या फिर आधा कच्चा लीची भी भोजन में ना दें.

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First published: 14 June 2019, 11:10 IST
 
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