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सांसद आदर्श ग्राम योजना: धराशायी हुई पीएम मोदी की महत्वाकांक्षी योजना

निखिल कुमार वर्मा | Updated on: 4 August 2016, 9:43 IST

11 अक्टूबर, 2014 को 'सांसद आदर्श ग्राम योजना' की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि 2016 तक विकास का मॉडल खड़ा होगा. इसके अलावा अगर करीब 800 सांसद साल 2019 तक तीन-तीन गांवों का विकास करें, तो करीब 2500 गांवों का विकास हो जाएगा. लेकिन दो साल बाद पीएम मोदी की यह महत्वाकांक्षी योजना पूरी तरह धाराशायी होती दिख रही है.

योजना के पहले चरण में जहां 94 सांसदों ने गांवों को गोद नहीं लिया, वहीं दूसरे चरण में 684 सांसदों ने अब तक किसी गांव को गोद नहीं लिया है. लोकसभा और राज्यसभा को मिलाकर सांसदों की संख्या 795 है. योजना के पहले चरण में लोकसभा के सांसदों को अपने निर्वाचन क्षेत्र में एक गांव को 2016 तक आदर्श ग्राम के तौर पर विकसित करना था और राज्यसभा के सांसदों को, जिस राज्य से वे आते हैं, वहां का कोई गांव गोद लेकर उसे आदर्श ग्राम बनाना था.

ग्रामीण विकास मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार दूसरे चरण में अब तक 111 सांसदों ने एक-एक गांव का चयन किया है जिसमें लोकसभा के 86 सांसद जबकि राज्यसभा के 25 सांसद शामिल हैं.

मोदी के मंत्रियों ने खुद नहीं चुना दूसरा गांव

सांसद आदर्श ग्राम योजना (एसएजीवाई) के दूसरे चरण में 26 में से 18 कैबिनेट मंत्रियों ने अब तक अपने संसदीय क्षेत्र में किसी गांव को गोद नहीं लिया है. गांव के चयन के लिए अंतिम तारीख इस साल 31 जनवरी थी.

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दूसरे चरण में मोदी के अलावा सिर्फ आठ मंत्रियों ने अब तक गांव गोद लिए हैं. सुषमा स्वराज, रामविलास पासवान, जेपी नड्डा, अशोक गजपति राजू, वीरेंद्र सिंह, थावर चंद गहलोत, स्मति ईरानी और प्रकाश जावड़ेकर गांव गोद लेने वाले कैबिनेट मंत्रियों में शामिल हैं.

इसके अलावा पहले चरण में केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन ने किसी गांव को नहीं चुना था. हर्षवर्धन दिल्ली के चांदनी चौक से सांसद हैं.

पहले चरण का बंगाल के सांसदों ने किया बहिष्कार

पहले चरण में 94 सांसदों ने किसी गांव का चयन नहीं किया था. इसमें लोकसभा के 44 सांसद और राज्यसभा के 50 सांसद शामिल हैं. लोकसभा सांसदों की बात करें तो पश्चिम बंगाल से 38 सांसद, ओडिशा से दो, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, दिल्ली और आंध्र प्रदेश से एक-एक सांसदों ने किसी गांव को गोद नहीं लिया.

पश्चिम बंगाल से आने वाले सभी 16 राज्यसभा सांसदों ने दोनों चरणों में इस योजना के तहत किसी गांव को गोद नहीं लिया है.  

योजना के लिए अलग से आवंटन नहीं

कई सांसदों ने योजना के लिए अलग से बजट न होने की शिकायत की है. एसएजीवाई के तहत अलग से किसी बजटीय आवंटन का प्रावधान नहीं है, लेकिन सांसदों से कहा गया कि वे अपने चुने गए गांवों के लिए धन की व्यवस्था इंदिरा आवास योजना, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसी जारी 21 योजनाओं को किए जाने वाले आवंटन के माध्यम से करें.

कई सांसदों का कहना है कि यह योजना कई मुश्किलें पैदा कर रही है. अलग से फंड न होने से आदर्श ग्राम के लोगों की अपेक्षाएं पूरी कर पाना संभव नहीं हो रहा है. सांसदों के अनुसार आदर्श ग्राम योजना में पैसा ज्यादा लग रहा है जिसके कारण क्षेत्र में दूसरी अन्य जगहों पर कटौती करनी पड़ रही है और जनता की नाराजगी झेलनी पड़ रही है. इसकी वजह से दूसरे चरण से बीजेपी के ही ज्यादातर सांसद मुंह फेरे हुए हैं.

समाजवादी पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव ने का कहना है कि उन्होंने न अब तक कोई गांव चुना है, न आगे चुनेंगे. उनकी दलील है कि अगर वह किसी भी एक गांव को चुनते हैं तो उसके आसपास के दूसरे गांव के लोग उनसे नाराज़ हो जाएंगे.

First published: 4 August 2016, 9:43 IST
 
निखिल कुमार वर्मा @nikhilbhusan

निखिल बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले हैं. राजनीति और खेल पत्रकारिता की गहरी समझ रखते हैं. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से हिंदी में ग्रेजुएट और आईआईएमसी दिल्ली से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा हैं. हिंदी पट्टी के जनआंदोलनों से भी जुड़े रहे हैं. मनमौजी और घुमक्कड़ स्वभाव के निखिल बेहतरीन खाना बनाने के भी शौकीन हैं.

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