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सच सामने लाने पर अब तक 74 RTI एक्टिविस्ट को मिल चुकी है मौत

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 March 2018, 14:50 IST

20 मार्च को मेघालय के 38 वर्षीय आरटीआई कार्यकर्ता पोपीनहुन मजाव की पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले में हत्या कर दी गई थी. पुलिस ने बताया कि वह मेघालय के जयंतिया हिल्स ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल  (जेएचएडीसी) में सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का पर्दाफाश कर रहे थे. जयंती युवा संघ (जेईएफ) के अध्यक्ष मजाव का शव मंगलवार की सुबह जयंतिया हिल्स के जिला मुख्यालय खलिहाट में एक पुल के पास पाया गया. प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि उनके  सिर पर हमला किया गया था.

मजाव ने हाल ही में एक आरटीआई जांच के जरिए जेएचएडीसी में सार्वजनिक निधियों में का भारी घपले को उजागर किया. इसमें यह भी पता चला कि जयंतिया हिल्स में सीमेंट कंपनियां परिषद की अनुमति के बिना खनन कर रही थीं. 

सिविल सोसाइटी महिला संगठन (सीएसडब्ल्यूओ) के अध्यक्ष एग्नेस खारशिंग ने हत्या की निंदा की. उन्होंने कहा, "हम उनकी हत्या की निंदा करते हैं और जिम्मेदार लोगों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हैं."

यह कोयले और लाइम स्टोन का एक महत्वपूर्ण खनन क्षेत्र है.  इस आरटीआई) कार्यकर्ता ने पिछले साल यह खुलासा किया था कि जिला परिषद ने पर्याप्त लाइसेंस के बिना इस क्षेत्र में सीमेंट कंपनियों को खदान करने की अनुमति दी.

उन्होंने चुनावी धोखाधड़ी और व्यावसायिक गतिविधियों से पर्यावरण के नुकसान जैसे कई मुद्दों को लेकर युवाओं को लामबंद क्या. इसी तरह देश में कई कार्यकर्ताओं और पत्रकारों, जिन्होंने भ्रष्टाचार को बेनकाब करने के लिए आरटीआई कानून का इस्तेमाल किया है, उनकी हत्या की गई.

अक्टूबर 2005 जब से आरटीआई कानून लागू किया गया ऐसे हमलों में दौरान 74 कार्यकर्ताओं की मौत हुई है. सीआरआरआई अनुसार के 164 कार्यकर्ताओं ने हमलों की सूचना दी है जबकि 180 को धमकी दी गई.

First published: 25 March 2018, 13:54 IST
 
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