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खुलासा- बीजेपी के सांसदों ने निकाली पीएम मोदी के 'आदर्श ग्राम योजना' की हवा

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 April 2018, 12:29 IST

देश में भाजपा की सरकार बनाने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी एक महात्वाकांक्षी योजना शूरू की थी. पीएम मोदी ने 11 अक्टूबर 2014 को महत्वाकांक्षी 'सांसद आदर्श ग्राम योजना' की शुरुआत की थी. योजना की शुरूआत करते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि इससे अच्छी राजनीति के द्वार खुलेंगे. उन्होंने सभी सांसदों से विकास के लिए एक-एक गांव का चयन करने का आग्रह किया था.

पीएम ने कहा था कि ये विकास आपूर्ति पर आधारित मॉडल के बजाय मांग और जरूरत तथा जनता की भागीदारी पर आधारित होना चाहिए. पीएम मोदी ने कहा था कि 2016 तक प्रत्येक सांसद एक-एक गांव को विकसित बनाएंगे और बाद में 2019 तक दो और गांवों का विकास होगा.

लेकिन आज जब इस योजना के लगभग साढ़े तीन साल हो चुके हैं तो गांवों को आत्मनिर्भर और आदर्श बनाने का जो लक्ष्य था वह दूर ही दिख रहा है. पीएम की आदर्श ग्राम योजना सांसदों की उदासीनता और उपेक्षा का शिकार हो गई. सांसदों की उदासीनता की वजह से पीएम मोदी की बहुप्रचारित सांसद आदर्श ग्राम योजना केवल हवा-हवाई साबित हुई. प्रधानमंत्री मोदी की इस योजना में न अन्य दलों के सांसदों ने दिलचस्पी दिखाई न ही भाजपा के सांसदों ने.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के लगभग 80 फीसदी सांसदों ने प्रधानमंत्री की अपील को ठेंगा दिखा दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक मात्र 19 फीसदी सांसदों ने ही इस योजना के तहत तीन गांवों को चुना है. 88 फीसदी सांसदों ने एक गांव को गोद लिया है, जबकि 59 फीसदी सांसद दो गांवों को गोद ले चुके हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 1314 गांवों को चिह्नित किया जा चुका है, जहां पर सिर्फ 42 फीसदी काम पूरा हुआ है. ऐसा नहीं है कि सिर्फ विपक्षी पार्टियों के सांसदों ने ही इस योजना का लागू करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई. बल्कि भाजपा के सांसदों ने भी पीएम के इस महत्वाकांक्षी योजना को अनदेखा कर दिया.

रिपोर्ट के मुताबिक, 191 बीजेपी सांसदों ने अब तक इस योजना के तहत तीसरे गांव का चयन ही नहीं किया है. वहीं 84 सांसदों ने दूसरे गांव का चयन नहीं किया है. भाजपा के राज्यसभा के मात्र 12 सांसदों ने ही इस योजना के तहत तीन गांवों का चयन किया है. इसके अलावा 20 सांसदों ने अब तक दूसरे गांव का चयन नहीं किया है.

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योजना के कार्यान्वयन में हो रही देरी को लेकर ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राज्य के मुख्यमंत्रियों और सांसदों को चिट्ठी लिखकर कहा है कि वह जल्द विकास के लिए गांवों को चिह्नित करें और पीएम के टारगेट को हासिल करें. ग्रामीण विकास मंत्रालय से जुड़े एक अधिकारी का कहना है कि सांसदों को पत्र लिखकर इस काम को जल्द पूरा करने को कहा जा रहा है.

दरअसल, योजना के तहत सरकार की तरफ से किसी भी प्रकार के फंड की व्यवस्था नहीं की गई है. पीएम मोदी ने कहा था कि सांसदों से अपेक्षा की गई है कि वह अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर केंद्र की योजनाओं को इन गांवों में ठीक तरीके से लागू करवाएं.

First published: 2 April 2018, 12:27 IST
 
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