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तेलंगाना विवाद: नौ आंदोलनकारी जज निलंबित, 200 जज हड़ताल पर

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 June 2016, 18:11 IST

हैदराबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए सात आंदोलनकारी जजों को निलंबित कर दिया है. सोमवार को भी हाईकोर्ट ने तेलंगाना जजेज़ एसोसिएशन के अध्यक्ष के रवींद्र रेड्डी और सचिव वी वारा प्रसाद को निलंबित किया था. इस निलंबन के विरोध में करीब 200 जज मंगलवार से 15 दिनों की हड़ताल पर चले गए हैं.

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच न्यायिक अधिकारियों के आवंटन के खिलाफ तेलंगाना जजेज़ एसोसिएशन रविवार से आंदोलन कर रहा है. तेलंगाना के वकील और न्यायिक कर्मचारी आंध्र प्रदेश (विभाजन बाद) के रहने वाले न्यायिक अधिकारियों को तेलंगाना कोर्ट में भेजे जाने का विरोध कर रहे हैं.

तेलंगाना सरकार ने भी आंध्र के जजों की नियुक्तियां जिला अदालतों में किए जाने पर आपत्ति जताई है. तेलंगाना के मुख्यमंत्री की बेटी और सांसद के कविता ने आरोप लगाया है, "आंध्र के जज वहीं की अदालतों में तैनाती लेने की जगह तेलंगाना में पदों को चुन रहे हैं, ताकि नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों को परेशान किया जा सके. आंध्र सरकार अपने प्रतिद्वंद्वी राज्य में राजनीति और प्रशासन पर नियंत्रण करना चाहती है.”

इस मामले में तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव जल्द ही दिल्ली में अलग हाईकोर्ट की मांग को लेकर धरना देने वाले हैं. उनका कहना है कि तेलंगाना के लिए अलग हाईकोर्ट राज्य की स्वायत्तता के लिए जरूरी है.

2014 में तेलंगाना के गठन के बाद से ही विभिन्न मुद्दों पर आंध्र प्रदेश सरकार और तेलंगाना सरकार के बीच टकराव होता रहा है. आंध्र प्रदेश में तेलगु देशम पार्टी (टीडीपी) की सरकार और चंद्रबाबू नायडू मुख्यमंत्री हैं. टीडीपी केंद्र में एनडीए सरकार का हिस्सा है.

सांसद के कविता ने कहा कि हैदराबाद हाईकोर्ट का जल्द बंटवारा होना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र भी आंध्र प्रदेश का पक्ष ले रहा है कि क्योंकि टीडीपी उसकी सहयोगी पार्टी है.

First published: 28 June 2016, 18:11 IST
 
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