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PUBG गेम बना छात्रों का दुश्मन, 90 फीसदी ने छोड़ा स्कूल

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 February 2019, 11:24 IST

PUBG मोबाइल गेम आज कल खूब चर्चाओं में चल रहा है. पबजी गेम की लत सिर्फ बच्चों में ही नहीं, बल्कि युवाओं में काफी देखने को मिल रही है. अभी हाल ही में मुंबई के एक युवा ने पबजी गेम के कारण आत्महत्या कर ली थी. इस गेम का क्रेज इतना ज्यादा बढ़ रहा है कि इसका असर बच्चों की पढ़ाई लिखाई पर भी पड़ हा है. इस गेम की लत की वजह से कई बच्चे अपनी पढ़ाई छोड़ रहे हैं, तो कई ऐसे बच्चे हैं जो स्कूलों का बंक करके गेम में लगे रहते हैं.

अभी हाल ही में कानपुर के मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र में रिर्सच हुआ है. इस रिसर्च के मुताबिक पबजी खेलने वाले 90 प्रतिशत बच्चों ने स्कूल जाना ही बंद कर दिया. बाकि बचे हुए 10 प्रतिशत बच्चे शेड्यूल टाइमिंग में तो पढ़ते हैं लेकिन बाकी समय मोबाइल पर लगे रहते हैं.

 

बता दें कि पिछले कई महीनों से पैरेंट्स मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र पर फोन करके मदद मांग रहे थे. इधर आने वाले फोन में ज्यादातर की शिकायत है कि उनके बच्चे का मन पढ़ाई में नहीं लग रहा है. बच्चा स्कूल नहीं जाने के बहाने खोजता है, किसी तरह चला भी गया तो लौटने के बाद मोबाइल में लग जाता है. इन मामलों की शिकायतें बढ़ीं तो मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र ने सैंपल सर्वे शुरू किया. इसके तहत 200 पैरेंट्स से बात की गई, जिसमें इस बात का खुलासा हुआ है.

इस कक्षा के बच्चे हैं ज्यादा?

इस सर्वें में खुलासा हुआ है कि इस गेम की लत सबसे ज्यादा आठवीं से बारहवीं के बच्चों को ज्यादा लगती है. ये बच्चे इस गेम की लत की वजह से पढ़ाई में मन नहीं लगा पाते. गेम में आगे का टारगेट उन्हें खेलने के लिए मजबूर करता है.

क्या है पबजी गेम

PUBG गेम एक शूटर बैटल रॉयल गेम है, जिसमें 100 खिलाड़ी एक बैटलग्राउंड में छोड़े जाते हैं और वे मरने तक लड़ते हैं. 100 लोगों में आखिर तक जिंदा रहने वाला खिलाड़ी गेम का विजेता होता है.

कब हुआ था लॉन्च

PUBG 2017 में लॉन्च हुआ था. इसके कुछ दिन बाद ही ये गेम एंड्रॉयड मोबाइल पर आ गया. ये गेम सट्टे की तरह होता है, इसमें सट्टे के लिए सबसे पहले रूम आईडी होती है.

First published: 5 February 2019, 11:26 IST
 
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