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मिलिए भारत की ऐतिहासिक विरासत के संरक्षक से

अश्विन अघोर | Updated on: 10 February 2017, 1:52 IST
QUICK PILL
  • 75 साल के हो चुके प्रोफेसर किरीट मनकोडी रिटायर होने के बाद से लगातार भारत से चुराई गई मूर्तियों और कलाकृतियों का पता लगाने की मुहिम में लगे हुए हैं.
  • उनकी कोशिशों की वजह से करीब 20 ऐतिहासिक मूर्तियों और कलाकृतियों को भारत वापस लाने में सफलता मिली है.
  • मनकोडी भारत से चुराई गई मूर्तियों की पड़ताल करते हैं और ऐसी किसी मूर्ति की नीलामी की जानकारी सार्वजनिक होने पर वह भारतीय पुरातत्व विभाग को इसकी इतिला देते हैं.

ड्राइंग रुम में मौजूद कंप्यूटर पर वह देश और दुनिया की खबरों में मशरूफ रहते हैं. अधिकांश खबरों को वह खबर की तरह पढ़ते हुए निकल जाते हैं लेकिन पुरातत्व की दुनिया से जुड़ी खबर पर वह रुक जाते हैं. कला और मूर्तिकला से जुड़ी पत्रिकाओं को पढ़ना उनकी प्राथमिकता है. 

75 साल के हो चुके प्रोफेसर किरीट मनकोडी की नजर किसी ऐतिहासिक चित्रकारी या मूर्तिकला पर पड़ते ही चमक उठती हैं. इसके बाद वह उसके बारे में जानकारी जुटाने लगते हैं और उनकी यह खोज तब जाकर खत्म होती है जब उन्हें उस मूर्तिकला की पूरी जानकारी मिल जाती है. 

खासकर उस कलाकृति के मूल स्थान के बारे में जानकारी जुटाना उनकी प्राथमिकता होती है. मनकोडी भारत की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत के संरक्षक हैं. वह पिछले कुछ दशक से भारत से चुराई गई मूर्तियों का पता लगाने की दिशा में काम करते रहे हैं. पुणे के डेक्कन कॉलेज में ऑर्कियोलॉजी के प्रोफेसर से सेवानिवृत्त होने के बाद से मनकोडी भारत से चुराई गई मूर्तियों का पता लगाने की मुहिम पर हैं जिन्हें विदेश में बेचा जा चुका है.

मनकोडी बताते हैं, 'भारत की पुरातात्विक विरासत बेहद समृद्ध रही है. पुरी दुनिया में इतना समृद्ध विरासत किसी देश का नहीं रहा है. पिछले कई सालों में भारत की मूल्यवान मूर्तियों को चुराया गया. मुझे लगता है कि यह मेरी ड्यूटी है कि मैं उनका पता लगाऊं और उन्हें वापस लाने की दिशा में काम करुं.'

लगातार कर रहे हैं कोशिश

2009 में राजस्थान के एक प्राचीन मंदिर से दो मूर्तियों को चुराए जाने की घटना सामने आने के बाद उनका यह मिशन शुरू हुआ. इनमें से एक मूर्ति की बिक्री का विज्ञापन एक पत्रिका में दिया गया. 

मनकोडी बताते हैं, 'यह मेरे लिए बड़ा झटका था क्योंकि मैं राजस्थान के आटरू मंदिर की खुदाई में सक्रिय तौर पर शामिल था. इस मूर्ति को मेरे नाक के नीचे से चुराया गया. मैं इस मामले में चुप नहीं रह सकता था. इसलिए मैंने इसकी तहकीकात शुरू की.'

मनकोडी भारत से चुराई गई मूर्तियों का पता लगाने की मुहिम पर हैं जिन्हें विदेश में बेचा जा चुका है

बाद में पता चला कि लंदन के एक कारोबारी ने इस मूर्ति को बेचने का विज्ञापन एक पत्रिका में दिया था. विज्ञापन को देखने के बाद मनकोडी ने इस बारे में भारतीय पुरातत्व विभाग के अधिकारियों को सूचना दी और फिर उन्होंने यह सूचना इंटरपोल और अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी को दी. उन्होंने बताया, 'सूचना के आधार पर पुलिस ने लंदन के शोरूम पर छापा मारा लेकिन इससे पहले वह मूर्ति वहां से हटा दी गई थी. बाद में इस मूर्ति के न्यूयॉर्क में होने की खबर मिली. सरकार ने अब इस मूर्ति को भारत वापस लाने की मुहिम शुरू कर दी है.'

मनकोडी ने राजस्थान के आटरू मंदिर से चुराई गई दो और मूर्तियों का पता लगाया है. उन्होंने कहा, 'पहली मूर्ति की चोरी 23 अप्रैल 2009 को हुई जबकि दूसरी मूर्ति को करीब पांच महीने बाद चुराया गया. चौंकाने वाली बात यह रही कि मार्च 2010 में हॉन्ग-कॉन्ग के एक जर्नल में इन मूर्तियों का विज्ञापन प्रकाशित हुआ. लंदन के एक कारोबारी ने यह विज्ञापन दिया था. इन मूर्तियों की कीमत करीब 20 लाख डॉलर आंकी गई. मैंने तुरंत एएसआई को इतिला दी और फिर उन्होंने इस बारे में लंदन में मौजूद भारतीय दूतावास को सूचना दी.'

मनकोडी बताते हैं, 'दोनों मूर्तियों को अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी और इंटरपोल पुलिस की मदद से निकाला गया और फिर इसे जनवरी 2014 में भारत को सौंप दिया गया.' उन्होंने कहा, 'यह मेरे लिए बेहद संतोषजनक था क्योंकि मैं इन मूर्तियों की खुदाई प्रक्रिया में शामिल था.'

क्या करने की जरूरत?

मनकोडी को लगता है कि मूर्तियों, पेंटिंग्स और हस्तलिपियों को बचाए रखने के लिए सेंट्रलाइज्ड डॉक्यूमेंटेशन की जरूरत है. उन्होंने कहा, 'इसमें चुराई गई मूर्तियों की भी जानकारी रखी जानी चाहिए. मसलन कि इन्हें कहां से चुराया गया और इसका साइज क्या था. इसके साथ ही एफआईआर की भी सूचना इस सिस्टम में फीड की जानी चाहिए. इससे प्रस्तावित खरीदारों को सतर्क होने का मौका मिलेगा.'

चुराई गई मूर्तियों की जानकारी सार्वजनिक किए जाने के बाद से करीब 20 ऐसी कलाकृतियों को खोजने और उन्हें देश वापस लाने में सफलता मिली है.

मनकोडी को लगता है कि मूर्तियों, पेंटिंग्स और हस्तलिपियों को बचाए रखने के लिए सेंट्रलाइज्ड डॉक्यूमेंटेशन की जरूरत है

मनकोडी ने अपनी एक वेबसाइट भी शुरू की है जहां पर चुराई गई कलाकृतियों के बारे में लगातार सूचनाएं डालते रहते हैं. उन्होंने कहा, 'चुराई गई मूर्तियों और कलाकृतियों के बारे में सूचना सार्वजनिक किए जाने से चोरी और तस्क री को रोकने में मदद मिलती है. अगर चुराई गई कलाकृतियों के बारे में सूचना सार्वजनिक मंच पर मौजूद है तो इसे खरीदने वाले लोग सतर्क हो जाएंगे.'

एफआईआर की अहमियत के बारे में बताते हुए मनकोडी कहते हैं, 'अमेरिका में 1873 में एक कलाकृति को नीलामी के लिए रखा गया. इस कलाकृति को मध्य प्रदेश के सतना से चुराया गया था. कलाकृति के मालिक ने इस बारे में एफआईआर करा रखा था. चूंकि इस बारे में एफआईआर और उसकी फोटो मौजूद थी तो मैंने उसी आधार पर अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी को इतिला दी. 

कलाकृति की कीमत 1.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर थी और इसे न्यूयॉर्क से बरामद किया गया. कुख्यात तस्कर सुभाष कपूर ने इसकी तस्करी की थी. कपूर भारत की प्रसिद्ध कलाकृति नटराज को चुराए जाने के मामले में फिलहाल चेन्नई की एक जेल में बंद है. अब इस कलाकृति को वापस भारत लाए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.'

फिलहाल मनकोडी गुजरात के पाटन से चुराई गई दो कलाकृतियों को वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं. दोनों कलाकृतियों को 2001 में पाटन के संग्रहालय से चुराया गया. मैंने अपनी वेबसाइट पर इसकी पूरी जानकारी और संबंधित एफआईआर को डाल रखा है. 

इन दोनों कलाकृतियों की चोरी के बारे में जांच एजेंसियों और नीलामी करने वाली एजेंसियों को सूचित किया जा चुका है. उन्होंने कहा, 'मुझे पूरी उम्मीद है कि हम इन कलाकृतियों को भारत वापस लाने में सफल रहेंगे.'

जब उनसे यह पूछा गया कि कलाकृतियों को वापस लाए जाने के बाद उन्हें कैसा महसूस होता है तो वह बेहद सादगी के साथ जवाब देते हुए कहते हैं, 'मैं केवल उनका पता लगा सकता हूं. उसे वापस लाने की जिम्मेदारी सरकार की है.'

First published: 8 February 2016, 11:13 IST
 
अश्विन अघोर @catchnews

मुंबई स्थित स्वतंत्र पत्रकार

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