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रातों-रात 'गोल्डन बाबा' बन गया एक कारोबारी, करोड़ों का सोना पहनकर लातें हैं कांवड़

राज कुमार पाल | Updated on: 28 July 2016, 15:31 IST
(पत्रिका)

गोल्डन बाबा का नाम सुनते ही हमारे मन में सोने से लदे एक शख्स की तस्वीर मन में उभरने लगती है. जी हां! गोल्डन बाबा एक तरह से चलते-फिरते सोने की खदान ही हैं. ये कई किलो सोना हमेशा अपने बदन पर पहने रहते हैं. 

गोल्डन बाबा हर वर्ष सावन के महीने में मीडिया की सुर्खियों में आ जाते हैं, क्योंकि वो करोड़ों का सोना पहन कांवड़ यात्रा पर अपने सैंकड़ों अनुयायियों के साथ दिल्ली से हरिद्वार के लिए निकलते हैं. कांवड़ यात्रा के दौरान कई पर्सनल गार्ड्स के अलावा कई पुलिसकर्मी भी उनकी सुरक्षा में लगे रहते हैं

कौन हैं गोल्डन बाबा

गोल्डन बाबा का असली नाम सुधीर कुमार मक्‍कड़ है, जो मूलरूप से गाजियाबाद के रहने वाले हैं. गोल्डन बाबा के मुताबिक, वे 1972 से सोना पहनते आ रहे हैं, क्योंकि वे सोने को अपना ईष्ट देवता मानते हैं. गोल्डन बाबा संन्यास ग्रहण करने से पहले एक कारोबारी हुआ करते थे. 

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सुधीर कुमार मक्‍कड़ संन्‍यास लेने से पहले दिल्‍ली में गारमेंट्स का कारोबार करते थे. फिलहाल दिल्ली के गांधी नगर की अशोक गली में बाबा का आश्रम भी है. उनके मुताबिक, जब उन्होंने अपना कारोबाद बंद किया था तब उनका टर्नओवर डेढ़ सौ करोड़ का था. वे कभी हरकी पैड़ी पर चार-चार आने की माला और पीठ पर लाद बाजार में कपड़े बेचते थे.

क्यों बने संन्यासी

गोल्डन बाबा उर्फ सुधीर कुमार मक्‍कड़ कहते हैं कि जब वे गारमेंट्स का कारोबार किया करते थे, तब उन्होंने एक व्यापारी के तौर पर कई गलतियां की हैं. 

अब उन्हीं पापों को प्रायश्चित करने के लिए उन्होंने संन्यास का रास्ता चुना, जिसके कारण वे आज संत समाज की सेवा कर रहे हैं. गोल्डन बाबा को 2013 में हरिद्वार में अपने गुरु चंदन गिरी जी महाराज ने सबसे पहले उन्हें ये नाम दिया और उन्हें गुरुदीक्षा दी.

बाबा के पास क्या-क्या है

एक निजी वेबसाइट की खबर के मुताबिक, गोल्डन बाबा बताते हैं कि उनके पास साढ़े तीन किलो वजन की सोने की एक जैकेट है. इसके अलावा 27 लाख रुपये की हीरे से जड़ी घड़ी, बाबा के दसों उंगलियों में सोने की अंगूठी, बाजूबंद, सोने का लॉकेट है.

जबर्दस्त सुरक्षा में रहते हैं बाबा

गोल्डन बाबा की सुरक्षा में 25 से 30 गार्ड्स का दस्ता हमेशा उनके साथ कांवड़ यात्रा के दौरान साथ रहते हैं. साथ ही बाबा के कुछ भक्त भी आसपास होने वाली गतिविधियों पर नजर रखते हैं. गोल्डन बाबा का दिल्ली के गांधी नगर में आश्रम है. जहां बाबा के साथ प्राइवेट सुरक्षा एजेंसी के छह गार्ड हर वक्त उनके साथ रहते हैं. 

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वहीं, इसके अलावा बाबा के 10 अनुयायी भी उनके साथ रहते हैं जो आने-जाने वालों पर हमेशा कड़ी नजर बनाए रखते हैं. बता दें कि बाबा इन्हीं छह प्राइवेट गार्ड्स के नजर में रहते हैं.

सुरक्षा में कितना खर्च करते हैं बाबा

एक बेवसाइट की खबर के मुताबिक सोने से लदे होने के कारण गोल्डन बाबा की सुरक्षा में लाखों खर्च होते हैं. बाबा की सुरक्षा पर हर साल तकरीबन 10 लाख रुपये का खर्च आता है. 

वहीं, गोल्डन बाबा अपने कांवड़ यात्रा के दौरान हुई खर्च की बात करते हुए बताते हैं कि पहले ढाई सौ रुपये में कांवड़ लेकर जाया करते थे, लेकिन उन्होंने दावा किया है कि पिछले साल वे जब कांवड़ लेकर गए थे तो उस समय सवा करोड़ रुपए खर्च किए थे. बाबा ने उससे पहले साल 72 लाख रुपए खर्च किए थे.

क्यों आकर्षण का केंद्र बने रहते हैं बाबा

गोल्डन बाबा देखने में साधारण आदमी ही हैं लेकिन वे हमेशा अपने सोने से लदे होने के कारण आकर्षण का केंद्र बनते हैं. उनके शरीर पर कई किलों का सोना होता है जिसकी कीमत करोड़ों की है. 

बाबा हमेशा कांवड़ यात्रा के दौरान मीडिया की सुर्खियों में बनते हैं या फिर देश में लगने वाले कुंभ मेले में भी बाबा हमेशा अपने आभूषणों के कारण चर्चा में बने रहते हैं. बता दें कि 2013 में इलाहाबाद में हुए महाकुंभ के वसंत पंचमी शाही स्नान के दौरान भी गोल्डन बाबा को अपने इटली से आए भक्तों के साथ दिखे थे. जिस दौरान उनको देखने के लिए लोगों की भीड़ लग गई थी

गोल्डन बाबा इस सावन में भी करीब चार करोड़ का साढ़े 12 किलो सोना पहनकर कांवड़ यात्रा पर अपने 30 निजी गार्ड्स और 350 कांवड़ियों के दल और अनुयायियों के साथ निकले हैं. बाबा रविवार को नई दिल्ली के गांधी नगर स्थित आश्रम के लिए तकरीबन आठ गाड़ियों की काफिले में रवाना हुए हैं.

काफी मजबूत राजनीतिक पकड़ है

ऐसा माना जाता है कि गोल्डन बाबा की राजनीतिक पकड़ भी काफी मजबूत है. वैसे राजनीति में आने के बारे वे कहते हैं कि भगवान ने अभी इतनी कृपा की है कि संत समाज की सेवा कर रहे हैं. 

राजनीति में आने के बारे में साफ लफ्जों में कुछ भी नहीं कहते हैं. बता दें कि बाबा के अनुयायियों में कई भाजपा नेता हैं. साथ ही कई अन्य पार्टियों के नेता भी बाबा के अनुयायी हैं.

First published: 28 July 2016, 15:31 IST
 
राज कुमार पाल

पत्रिका स्टाफ

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