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संघ प्रचारक (हरियाणा के मुख्यमंत्री) के लिए 1.35 करोड़ की लैंड क्रूजर

राजीव खन्ना | Updated on: 21 July 2016, 7:52 IST

क्या हमेशा सादगी से रहने वाले हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की छवि अब फिजूलखर्च जीवनशैली वाले नेता की हो जाएगी? खबर है कि राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री के लिए 1.35 करोड़ रुपए की लागत वाली टोयटा लैंड क्रूजर कार खरीदने का निश्चय किया है. यह कार आज की तारीख तक हरियाणा में मुख्यमंत्रियों के लिए खरीदी गई कारों में से सबसे महंगी हैं.

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खबर यह भी है कि इस कार को बुलेट प्रूफ बनाने में 30-40 लाख रुपए का अलग से खर्चा आएगा. यहां भी उल्लेखनीय है कि अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों के पास उनके इस्तेमाल के लिए इससे ज्यादा महंगी कारें हैं. खट्टर के आलोचक अब यह सवाल कर रहे हैं कि आरएसएस के प्रचारक जो अपनी साधारण जीवनशैली के लिए जाने जाते हैं, क्यों तड़क-भड़क वाले रास्ते पर चल पड़े. इससे हरियाणा की सियासत गर्म हो गई है.

मोदी के समान

लोग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और खट्टर के बीच तुलना कर रहे हैं कि दोनों आरएसएस की पृष्ठभूमि से आए हैं और उन्होंने खर्चीली जीवनशैली अपना ली. एक ओर मोदी हैं जिन्होंने अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात करते समय कथित तौर पर 11 लाख रुपए का सूट पहन रखा था. बाद में यह सूट एक हीरा व्यापारी ने 4.31 करोड़ रुपए में खरीदा.

अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों के पास उनके इस्तेमाल के लिए इससे ज्यादा महंगी कारें हैं

ये दोनों नेता अपने जीवन के शुरुआती दिनों में बहुत ही सादगी पूर्ण जीवन जीने वाले व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं. कोई भी पुराने दिनों का उनका साथी यह अच्छी तरह जानता है कि खट्टर कैसे टूव्हीलर से चला करते थे और बहुत ही साधारण जीवन जिया करते थे.

मनोहर लाल खट्टर से जुड़े लोगों का कहना है कि पहले वह बस और ट्रेन से ही चला करते थे. वो कभी मोटरसाइकिल से हरियाणा के गांव-गांव जाकर शाखा का आयोजन करते थे. हालांकि मोदी से अलग हटकर खट्टर ने मुख्यमंत्री बनने के बाद भी खुद को आम नागरिक के रूप में प्रस्तुत किया.

नवम्बर 2014 में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद भी वह शताब्दी एक्सप्रेस से दिल्ली से चंडीगढ़ और चंडीगढ़ से दिल्ली आया जाया करते थे. 2015 में जब उन्होंने राज्य परिवहन की बस से चंडीगढ़ से करनाल तक का सफर किया तो उनकी यात्रा अखबारों की सुर्खियां बनी थी.

लोगों को अभी भी याद है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद जब वह अपने नए घर में गए थे तो मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित लंच में खाने के लिए वे प्लेट लेकर लाइन में लगे थे यानी अपनी बारी आने पर ही उन्होंने अपनी प्लेट में खाना डाला.

खट्टर के बचाव में

हरियाणा भाजपा इकाई के अध्यक्ष सुभाष बराला ने कार खरीदे जाने पर खट्टर का यह कहते हुए बचाव किया है कि खट्टर को लग्जरी कारों का कोई शौक नहीं है. यह तो सुरक्षा एजेंसियों को तय करना होता है कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा और हिफाजत के लिए कौन सी कार सबसे अच्छी रहेगी.

हाल में एक कार्यक्रम में शिरकत करने आए मुख्यमंत्री ने आयोजन से इतर बराला के कथन का समर्थन किया है. खट्टर इस सवाल को व्यवस्था का हिस्सा बताकर टाल गए.

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नई कार खरीदे जाने के मुद्दे पर खट्टर का कहना है कि मैंने डिमांड नहीं की कि मुझे यह कार चाहिए या वह कार. जो गाड़ी उपलब्ध कराई जाएगी, उसमें ही जाऊंगा. यह तो अधिकारियों को ही तय करना होता है कि मुख्यमंत्री के लिए कौन सी गाड़ी उपयुक्त रहेगी. इस पर तो वही विचार करते हैं (गाड़ी खरीदने के बारे में).

सीएम ने कहा कि मैंने तो डेढ़ साल के दौरान इस बारे में सोचा तक नहीं. उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी फ्लीट की कुछ कारें काफी पुरानी चुकी थी. उनकी पुरानी गाड़ी तीन लाख किलोमीटर से ज्यादा चल चुकी थी. खट्टर के मुताबिक अधिकारियों ने कहा कि इन कारों को बदले जाने की जरूरत है. मैं तो उसी कार में बैठ जाऊंगा जो मुझे मिल जाएगी.

खट्टर अब तक 2007 में खरीदी गई मर्सिडीज बेंज कार से यात्रा करते रहे हैं. इसी कार से उनके पूर्ववर्ती भूपेन्द्र सिंह हुड्डा भी सफर करते रहे हैं. कांग्रेस के शासन में मुख्यमंत्री रहते भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने यह कार खरीदी थी. हरियाणा के अन्य मंत्री लोग जिन कारों में यात्रा करते हैं, उनकी कीमत 25-30 लाख रुपए के आसपास है.

एक विश्लेषक खट्टर के लिए लैंड क्रूजर खरीदने के पीछे एक अन्य संभावित कारण बतलाते हैं. हरियाणा की राजनीति पर निकटता से नजर रखने वाले विश्लेषक कहते हैं कि उनके एक कैबिनेट मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के पास एसयूवी है जो काफी महंगी होती है. वह इसी से यात्रा करते हैं. ऐसे में थोड़ी सी संभावना इस बात की है कि यह सब देखते हुए तय किया गया हो कि मुख्यमंत्री के पास कौन सी कार हो. लेकिन इतने अधिक खर्च का अभी तक कोई उचित जवाब नहीं दिया जा सका है.

राजनीतिक प्रतिक्रिया

लैंड क्रूजर खरीदे जाने से अनेक राजनीतिज्ञों को खट्टर और उनकी सरकार को घेरने का मौका मिल गया है. विपक्षी इंडियन नेशनल लोकदल (आईएनएलडी) के वरिष्ठ नेता अशोक अरोरा ने कैच से कहा कि मैं इसमें कुछ भी गलत नहीं देखता कि जरूरत के हिसाब से मुख्यमंत्री के लिए 1.35 करोड़ रुपए की सरकारी गाड़ी खरीदी जा रही है. लेकिन मेरी तो चिन्ता यह है कि अन्य अनावश्यक खर्च क्यों किया जा रहा है. मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के विवेकाधीन कोष पर ध्यान दीजिए.

मुख्यमंत्री की विवेकाधीन ग्रांट प्रतिवर्ष 40 करोड़ रुपए और हर मंत्री का पांच करोड़ से ज्यादा की हो गई है. अभी तक इस पर किसी का ध्यान नहीं गया है. उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में सत्ता में आने के तुरन्त बाद ही विपक्ष की कटु आलोचनाओं के बाद भी खट्टर सरकार ने मुख्यमंत्री और मंत्रियों के विवेकाधीन ग्रांट में अच्छी-खासी बढ़ोतरी कर दी.

अरोरा आगे कहते हैं कि बड़ी संख्या में तैनात सुरक्षा कर्मियों की संख्या और वाहनों के काफिले में कमी किए जाने की जरूरत है. कुछ मंत्रियों की कारें हर माह 24,000 किमी की यात्रा करती हैं. इन कारों पर हो रहे ईंधन खर्च को कैसे न्यायोचित ठहराया जा सकता है.

हालांकि रोहतक में कांग्रेस प्रवक्ता कृष्णमूर्ति हुड्डा कहते हैं कि खट्टर अपनी सादगी की मिसाल पेश कर सकते थे. इससे उन्हें हमेशा मदद मिलती. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर देखें, वह सेकण्ड हैंड मारुति 800 में यात्रा करती हैं. उन्होंने खुद को एक सधारण नेता के रूप में पेश किया है और इसी का प्रतिफल है कि जनता ने उन्हें दूसरे कार्यकाल के लिए चुना. दूसरी ओर, यहां हरियाणा में देखिए हालात बिल्कुल भिन्न हैं. सरकार इसी तरह के अनावश्यक खर्च कर रही है तो दूसरी ओर लोगों के पेंशन लाभों में कटौती कर रही है. किसानों की कोई मदद करने वाला नहीं है और कोई विकास कार्य भी नहीं है.

सामाजिक कार्यकर्ता फूल सिंह गौतम जो जन संघर्ष मंच (हरियाणा) से जुड़े हुए हैं, कहते हैं कि यही आरएसएस और भाजपा का असली चेहरा है. वे कहते कुछ हैं और करते कुछ और हैं. धन जिसे सार्वजनिक कल्याण के कामों में खर्च किया जाना चाहिए उसे अपने ही कुछ लोगों में फिजूलखर्च के रूप में उड़ाया जा रहा है.

First published: 21 July 2016, 7:52 IST
 
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