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ईद सेलिब्रेशन की कीमत मुस्लिम स्टाफ की बर्खास्तगी और गौशाला का निर्माण

एसएन मलिक | Updated on: 11 February 2017, 5:47 IST
(कैच न्यूज)

हरियाणा का मेवात वो जिला है जहां 1947 में पाकिस्तान पलायन का मन बना चुके मुसलमानों को रोकने के लिए महात्मा गांधी पहुंचे थे. उनके आह्वान पर मेवात के मुसलमान रुक गए. वे मुसलमान भी सरहद तक जाकर वापस लौट आए जिन्होंने गांधी के मेवात पहुंचने से पहले पाकिस्तान जाने के लिए घर छोड़ दिया था.

हरियाणा का मुस्लिम बाहुल्य मेवात जिला 6 दिसंबर 1992 में बाबरी मस्जिद ध्वंस के बाद देश में भड़के दंगों के दौरान भी शांत था लेकिन हिंदू-मुस्लिम बैर अब यहां भी पांव पसारने लगा है. 26 मई 2014 को जब नरेंद्र मोदी ने बतौर प्रधानमंत्री शपथ ली, तो ठीक 12 दिन बाद 8 जून 2014 को यहां एक सड़क हादसे ने दंगे का रूप ले लिया. यहां के बाशिंदों के मुताबिक तावडू के इतिहास में यह पहला सांप्रदायिक दंगा था.

बच्चों में दूसरे धर्म के संस्कार क्यों भरे गए

कमोबेश दो साल बाद एक बार फिर यह इलाक़ा सांप्रदायिक तनाव की जद में है. विवाद एक निजी स्कूल ग्रीन डेल्स में बच्चों के संग ईद मनाने पर हुआ है. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के स्थानीय पदाधिकारियों का कहना है कि बिना अनुमति के बच्चों के कोमल मस्तिष्क में दूसरे धर्म के संस्कार क्यों भरे गए? हमारी भावनाएं आहत की गई हैं. स्कूल प्रबंधन को इसके लिए दंड मिलना चाहिए.

6 जुलाई की शाम घर पहुंचे बच्चों ने अपने अभिभावकों को स्कूल में हुए ईद सेलिब्रेशन के बारे में बताया. फिर कुछ ही घंटे में अभिभावकों का एक समूह बाज़ार में इकट्ठा हो गया और इसके विरोध में कुछ दुकानें भी बंद कर दीं.

ग्रीन डेल्स पब्लिक स्कूल प्रबंधन ने बच्चों को सभी धर्मों और उनकी संस्कृतियों के प्रति जागरुक करने के इरादे से ईद मनाया था लेकिन विरोध होने पर उनकी हालत ख़राब हो गई. किसी अनहोनी से बचने के लिए 8 जुलाई को स्कूल बंद रखा गया लेकिन उग्र हो चुकी भीड़ स्कूल के गेट पर पहुंच गई. मेवात जिले के संघ चालक डॉक्टर आरपी शर्मा भी यहां मौजूद थे. बकौल शर्मा, मैंने स्कूल के मालिक भुवनेश्वर शर्मा से फोन पर पूछा कि यदि आप दोषी नहीं हैं तो स्कूल बंद क्यों कर रखा है? आप यहां ख़ुद मौजूद क्यों नहीं हैं?

स्कूल प्रबंधन ने बच्चों को सभी धर्मों और उनकी संस्कृतियों के प्रति जागरुक करने के इरादे से ईद मनाया था

हंगामा बढ़ने पर तावडू पुलिस स्टेशन के एसएचओ जयप्रकाश यादव और तहसीलदार पूनम बब्बर भी मौके पर पहुंचे. फिर दोनों पार्टियों में सुलह-समझौता करवाने के लिए तावडू थाने में बैठक बुलाई गई जहां स्कूल मालिक भुवनेश्वर भी पहुंचे. संघ चालक डॉक्टर शर्मा के मुताबिक भुवनेश्वर शर्मा ने यहां सभी के सामने कुबूल किया कि बच्चों से नमाज़ पढ़वाई गई. गलती मानते हुए उन्होंने माफी भी मांगी लेकिन उनसे लिखित और अभिभावकों के बीच जाकर माफी मांगने के लिए कहा गया, जो कि उन्होंने किया.

इसी बैठक में अभिभावकों की तरफ से गठित पंचों ने ग्रीन डेल्स पब्लिक स्कूल पर कुछ नई शर्तों के साथ-साथ 5 लाख 51 हज़ार रुपए का जुर्माना लगाया जिसे भुवनेश्वर शर्मा ने अभी तक नहीं चुकाया है. उनसे कहा गया था कि भावनाएं आहत होने के नाते उन्हें तावडू में एक गौशाला और दो निर्माणाधीन मंदिरों के लिए यह रकम देनी ही चाहिए. पंच की बाकी शर्तों में छात्राओं के लिए स्कर्ट की जगह सलवार कमीज, स्कूल से मुस्लिम स्टाफ के निष्कासन और दो साल तक स्कूल फीस में बढ़ोतरी नहीं करना शामिल है.

भीड़ के आगे कोई तंत्र काम नहीं करता

इस विवाद में पुलिस ने कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं की है लेकिन स्कूल प्रबंधन से हर्जाने की रकम दिलवाने के लिए बैठकें थाने में हुईं. हेड कांस्टेबल योगेश ने बतया कि भीड़ के आगे कोई तंत्र काम नहीं करता. पुलिस क्या कर सकती है जब स्थानीय लोग स्कूल प्रबंधन पर कार्रवाई का मन बना चुके हैं.

मगर सवाल ये है कि क्या सचमुच स्कूल प्रबंधन ने कोई जुर्म किया है? क्या वाकई स्कूल में नमाज़ या क़ुरआन पढ़ाई गई या महज़ ईद मनाने की वजह से स्कूल प्रबंधन को सज़ा देने की कोशिश हो रही है. एक सवाल यह भी है कि अगर स्कूल में सारे त्योहार मनाए जा सकते हैं तो ईद से क्या समस्या है?

कैच न्यूज़ ने इसकी पड़ताल के लिए स्कूल की प्रिंसिपल प्रोमिला शर्मा, स्कूल मालिक भुवनेश्वर शर्मा, मुस्लिम टीचर बिस्मिल्लाह ख़ान, उस दिन असेंबली में मौजूद एक छात्र, स्थानीय पुलिस और तमाम स्थानीय लोगों से बात की. सभी से लिए गए बयानों का निचोड़ ये है कि ईद के मौके पर स्कूल में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए, दुआ मांगी गई, त्योहार के बारे में बताया गया और आख़िर में सेंवई और रसगुल्ले बच्चों में बांटे गए.

स्कूल मालिक भुवनेश्वर शर्मा ने कहा कि हम मामले को ख़त्म करने की तरफ़ बढ़ रहे हैं. मीडिया में बयान देकर कोई नया विवाद नहीं पैदा करना चाहते. बच्चों से नमाज़ पढ़वाने का आरोप बिल्कुल झूठा और मनगढ़ंत है.

प्रिंसिपल प्रोमिला शर्मा गुड़गांव के मशहूर सलवान इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल में लंबे समय तक प्रिंसिपल रही हैं. उन्होंने इसी साल अप्रैल में ग्रीन डेल्स ज्वाइन किया है. बकौल प्रोमिला शर्मा- बच्चों में सभी मज़हबों के प्रति जागरूकता फैलाने के इरादे से ईद मनाई गई. इसे सांप्रदायिक रंग देने के पीछे स्थानीय शरारती तत्व हैं.

टीचर बिस्मिल्लाह ख़ान को इस ‘साज़िश’ का सूत्रधार बना दिया गया

इस विवाद में टीचर बिस्मिल्लाह ख़ान को इस ‘साज़िश’ का सूत्रधार बनाकर पेश किया गया. मीडिया ने रिपोर्ट किया कि बिस्मिल्लाह केरल से इस स्कूल में पढ़ाने पहुंची थीं और इस विवाद के बाद तावडू छोड़कर दिल्ली चली गई हैं लेकिन यह कहानी फर्ज़ी निकली. बिस्मिल्लाह उसी तावडू के एक बैंककर्मी की बेटी हैं जिन्होंने एक मई को बतौर इंग्लिश टीचर स्कूल ज्वाइन किया था लेकिन विवाद होने पर इस्तीफ़ा दे दिया है.

टीचर बिस्मिल्लाह तावडू के एक बैंककर्मी की बेटी हैं लेकिन विवाद होने पर उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया है

बक़ौल बिस्मिल्लाह, एक क़ाबिल और सेक्युलर प्रिंसिपल को बलि का बकरा बनाने की कोशिश की जा रही है. वह तो बच्चों को मिल-जुलकर रहने और सभी धर्मों का सम्मान करने की शिक्षा देने की कोशिश कर रही थीं.

प्रिंसिपल प्रोमिला शर्मा ने यह स्कूल इसी साल अप्रैल में ज्वाइन किया था. बिस्मिल्लाह ने कहा कि प्रिंसिपल को अंदाज़ा नहीं था कि एक पिछड़े इलाक़े में बच्चों को मज़हबों के प्रति सम्मान की शिक्षा देना इतना महंगा पड़ सकता है.

वो याद करते हुए कहती हैं कि प्रिंसिपल ईद मनाने को लेकर कितनी उत्साहित थीं. उन्होंने स्कूल में ही सेंवई और रसगुल्ले बनवाए, बच्चों के साथ एक नाटक तैयार करवाया, बजरंगी भाईजान फिल्म की सूफ़ी कव्वाली ‘भर दे झोली मेरी या मुहम्मद’ की तैयारी करवाई और बच्चों से छह जुलाई को रूमाल लेकर आने के लिए कहा.

बिस्मिल्लाह के मुताबिक सुबह नौ बजे के करीब असेंबली हुई जहां इस त्यौहार के बारे में बताया गया. फिर बच्चों के लिए लिखा गया अल्लामा इक़बाल का लोकप्रिय तराना लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरी, ज़िन्दगी शमअ की सूरत हो ख़ुदाया मेरी, मोबाइल से प्ले करके सुनाया गया और कव्वाली हुई.

एक नाटक भी खेला गया जिसमें चार अलग-अलग मज़हब के बच्चे एक दूसरे की मदद करते हैं और ईद का मौका होने के नाते अपने मुस्लिम साथी से गले मिलकर मुबारकबाद देते हैं.

स्कूल में हुआ क्या?

ये सभी प्रोग्राम होने के बाद प्रिंसिपल, टीचर और बच्चों ने हाथ जोड़कर दुआ मांगी इसके बाद बच्चों में सेंवई और रसगुल्ले बांटे गए.

बिस्मिल्ला कहती हैं कि प्रिंसिपल को अंदाज़ा नहीं था कि जब देशभर में हालात इतने विस्फोटक हैं तो स्कूल में ईद का त्योहार मनाने पर उसे सांप्रदायिक रंग देना कोई बड़ी बात नहीं है.

तावाडू थाने के एसएचओ जयप्रकाश यादव कहते हैं कि हमारे पास किसी भी पक्ष से कोई शिकायत नहीं आई है. हेड कॉन्सटेबल योगेश ने कहा कि बच्चों को अगर अलग-अलग धर्मों और संस्कृतियों के बारे में बताया और जागरूक किया जा रहा है तो इसमें बुराई क्या है? आख़िर उसी स्कूल में मुस्लिम बच्चे भी तो दूसरे धर्मों के बारे में सीखते हैं.

पंचों ने ग्रीन डेल्स पब्लिक स्कूल पर कुछ नई शर्तों के साथ-साथ 5 लाख 51 हज़ार रुपए का जुर्माना लगया

तावडू में एक निजी स्कूल चला रहे वकील हाशिम खान कहते हैं कि मैं लंबे समय तक एक स्कूल में टीचर रहा हूं. वहां असेंबली में गायत्री मंत्र और ओम का उच्चारण करवाया जाता था. मैंने और उस स्कूल के बच्चे हमेशा मंत्र पढ़ते थे लेकिन कभी नहीं लगा कि इससे हमारी आस्था कमज़ोर हो रही है.

ख़ैर प्रिंसिपल प्रोमिला शर्मा ने जिन चंद शरारती तत्वों की तरफ़ इशारा किया था, शिक्षक हाशिम ने भी यही दुहराया. उन्होंने कहा कि इसे सांप्रदायिक विवाद की शक्ल देने में डॉक्टर शर्मा के अलावा राजकुमार मित्तल, पार्षद विनय कुमार मलिक और सुनील कुमार जिंदल शामिल हैं. ये स्थानीय स्तर पर बीजेपी और आरएसएस से जुड़े हुए हैं. हर्जाने की रक़म अपनी जगह, लेकिन लोगों में रोष अभी भी

मगर नमाज़ नहीं पढ़वाने के दावे को आरएसएस के ज़िला संघ चालक डॉक्टर शर्मा सीधे खारिज करते हैं. उन्होंने कहा- मैं यहां का चर्चित चेहरा हूं. नमाज़ पढ़ाए जाने की ख़बर मिलने पर मैं अपने करीबी दो अभिभावकों के घर गया. दोनों घरों के बच्चों से पूछा और उनसे वो सारी गतिविधियां करवाकर देखीं जो स्कूल में करवाई गईं. मैंने जो देखा, वो नमाज़ की कैटगरी में आता है.

डॉक्टर शर्मा कहते हैं कि हर्जाने की रक़म अपनी जगह है लेकिन लोगों में रोष अभी भी है. अधिकतर लोगों का कहना है कि हमें इस प्रकार के सेक्यूलर स्कूल की आवश्यकता नहीं है जहां हमारे बच्चों के कोमल मस्तिष्क में बिना हमारी अनुमति के इस तरह के संस्कार भरे जा रहे हैं.

डॉक्टर शर्मा ने कहा कि हम मुख्यमंत्री और शिक्षामंत्री के संज्ञान में यह मामला ला रहे हैं और इस विषय को ठंडा नहीं होने देंगे. स्कूल प्रबंधन ने मुस्लिम बच्चों को आकर्षित करने के इरादे से ऐसा किया है.

First published: 2 August 2016, 8:21 IST
 
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