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हरियाणाः कांग्रेस दिशाहीन, भाजपा जाटों तक पहुंच बनाने में लगी

राजीव खन्ना | Updated on: 26 September 2016, 2:57 IST
QUICK PILL
  • सूबे में भाजपा उन वोटरों, खासतौर पर जाटों के बीच पहुंच बनाने में जुटी है, जिन्होंने अभी तक इस पार्टी से दूरी बनाए रखी है.
  • वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर साथ ही कांग्रेस विधान परिषद नेता किरण चौधरी के बीच चल रही खींचतान पार्टी की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है.
  • इसी तरह आईएनएलडी ने 25 सितम्बर को पार्टी के संस्थापक देवीलाल की 103 वीं जयंती के नाम पर जनता से सीधे सम्पर्क साधा हुआ है.

हरियाणा में कांग्रेस पूरी तरह दिग्भ्रमित दिखाई दे रही है जबकि बाकी की पार्टियां जन कार्यक्रमों के जरिए वोटरों के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही हैं. दूसरी ओर कांग्रेस ने जनता से जुड़ने के लिए अब तक अपनी प्रचार रणनीति तय नहीं की है. पार्टी के बड़े नेता छोटे स्तर पर मुद्दे उठाते रहते हैं लेकिन पिछले कुछ महीनों से पार्टी राज्य में दमदार उपस्थिति दर्ज करवाने में विफल रही है.

हालांकि पार्टी के बड़े नेता दावा करते हैं कि वे इस फेस्टिव सीजन के बाद राज्य स्तर पर प्रचार प्रसार करेंगे. लेकिन तब तक सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी इंडियन नेशनल लोकदल जनता के बीच पैठ बना चुके होंगे क्योंकि कांग्रेस में दरार पड़ी हुई है.

पिछले एक महीने से आईएनएलडी ने 25 सितम्बर को पार्टी के संस्थापक देवीलाल की 103 वीं जयंती के नाम पर जनता से सीधे सम्पर्क साधा हुआ है. विधानसभा में विपक्ष के नेता अभय चौटाला से लेकर हिसार सांसद दुष्यंत चौटाला तक सभी पार्टी नेता प्रदेश के दूर-दराज के इलाकों तक जनसम्पर्क कर जनता से जुड़े मुद्दे पर बात करने के अलावा लोगों को रैली में आकर इसे सफल बनाने का न्यौता भी दे रहे हैं.

पर्यवेक्षकों का मानना है यह कार्यक्रम राजनीतिक जनसम्पर्क अभियान कहा जा सकता है, इस सीधे जनसम्पर्क का फायदा आने वाले दिनों में पार्टी को जरूर मिलेगा.

दूसरी ओर, भाजपा भी अपने मौजूदा आधार को पक्का करने में जुटी है क्योंकि हिन्दुत्व संगठन कभी गौ रक्षकों तो कभी भगवाकरण अभियान के रूप में अपना एजेंडा लागू करने में लगे रहते हैं. इसके अलावा पार्टी वोटरों तक पहुंच बनाने में जुटी है, खासतौर पर जाटों के बीच जिन्होंने अब तक भाजपा से दूरी बनाए रखी है.

जानकारों का कहना है कि पिछले महीने ही पार्टी ने जाट बहुल इलाकों दो बड़ी-बड़ी रैलियां की थी. जिंद में हुई पहली रैली में पार्टी के कई बड़े नेता जैसे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी व बिरेन्दर सिंह भी मौजूद थे. साथ ही पार्टी प्रदेश इकाई के कद्दावर नेता भी.

दादरी को 22वां ज़िला बनाया गया

दूसरी रैली पिछ्ले हफ्ते दादरी में हुई जहाँ मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने दादरी को हरियाणा का 22वां जिला बनाने की घोषणा की. उन्होंने अपने 2 साल के कार्यकाल में दादरी में हुए 112 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को गिनाया और इसी दिन 45 करोड़ रुपये के 9 नये प्रॉजेक्ट्स का उद्घाटन किया. उन्होंने बताया 1992 में जब वे क्षेत्र में आरएसएस का काम काज देख रहे थे, तब दादरी को एक जिले की तरह ही माना जाता था. उन्होंने कहा आज सत्ता में आने के बाद जनता की माँग और उम्मीदों को पूरा करते हुए मुझे दादरी को हरियाणा का 22वां जिला घोषित कर बेहद खुशी हो रही है. साथ ही उन्होंने सवाल किया कि पिछली सरकारों ने जब पंचकुला, यमुनानगर और पलवल को जिला घोषित किया, तब दादरी को क्यों छोड़ दिया? भाजपा केंद्रीय और दक्षिणी हरियाणा में जाट वोट बैंकों तक पहुंच बना रही है. जो कि पारम्परिक रूप से कांग्रेस और आईएनएलडी के वोटर हैं. पिछ्ले विधानसभा चुनावों में भी जब भाजपा सत्ता में आई थी तो पार्टी को ज्यादातर सीटें जीटी रोड या ऐसे इलाकों से मिली थी जहाँ जाटों के अलावा दूसरे समुदायों के वोटर अधिक हैं.

आपसी खींचतान पार्टी की एकजुटता में रोड़ा

जानकारों का यह भी मानना है कि कांग्रेस के लिए अब कमर कस कर जनता के बीच उतरने का समय आ गया है. पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर साथ ही कांग्रेस विधान परिषद नेता किरण चौधरी के बीच चल रही खींचतान पार्टी की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है. हाल ही में पार्टी प्रभारी कमालनाथ को बताया गया कि इन दोनों समूहों को सार्वजानिक कार्यक्रमों में अलग अलग रंग की पगड़ी पहने देखा जा सकता है. यहां तक कि हाल ही में जाट आरक्षण को लेकर हुए आंदोलन में पार्टी के नेताओं ने अलग अलग जाकर जन संपर्क किया लेकिन कांग्रेस एकजुट नजर नहीं आई. आज भी यही हो रहा है, जब पार्टी नेता भगवाकारण व गौरक्षा जैसे मुद्दों को उठा रहे हैं यहां भी जिला स्तर और ब्लॉक स्तरों पर कॉंग्रेसी अपनी अपनी ढपली अपना राग की तर्ज पर काम कर रहे हैं ना कि किसी राज्य व्यापी अभियान की तरह। जून में पार्टी प्रभारी बनने के बाद कमलनाथ ने जिला और ब्लॉक कांग्रेस समितियों का 6 महीने के भीतर पुनर्गठन करने की बात कही थी.

खट्टर ने हुड्डा को कई मामलों में उलझाया

  

सेवा दल और अन्य इकाइयों को भी सक्रिय कर ज्यादा जिम्मेदारियाँ दी जाएंगी ताकि वे पार्टी के विकास में भूमिका निभा सकें,लेकिन पार्टी के अन्दरूनी सूत्रों का कहना है कि पार्टी में ऐसी कोई हलचल नहीं है. तंवर ने कैच न्यूज को कहा कि हम त्योहारों के बाद बड़े कार्यक्रम ले कर आएँगे. हम अभी इसलिए सुस्त हैं क्योंकि यह धान और बाजरे की फसल की खेती और खरीद का समय है. जिला व ब्लॉक समितियों का पुनर्गठन किया जाएगा. उन्होने दावा किया की पार्टी में एकता है और जरूरत पड़ने पर वे और हुड्डा साथ मिल कर कार्यक्रम करेंगे. यह मुश्किल ही है, हुड्डा फिलहाल सत्ताधारी दल से विवाद में उलझे हुए हैं जिसने उन्हें कई सारे मामलों में फंसा रखा है; उन पर भ्रष्टाचार के कई मामले चल रहे हैं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा की वापसी?

दोनों गुट इस बात पर भी एक दूसरे से उलझे हुए हैं कि पूर्व विधायकों और सांसदों ने पार्टी दोबारा जॉइन की है. इसी कड़ी में ताजा अनुमान कभी हुड्डा के करीबी रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा के दोबारा पार्टी में लौटने का लगाया जा रहा है. कॉंग्रेस से अलग होने के बाद उन्होंने पिछला विधानसभा चुनाव नई पार्टी हरियाणा जन चेतना पार्टी बना कर लड़ा था. हाल ही हुड्डा और शर्मा के बीच दिल्ली में हुई बैठक के बाद ही उनके पार्टी में लौटने के कयास लगाए जा रहे हैं. तंवर ने साफ कह दिया है कि शर्मा की वापसी कॉंग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी की मंजूरी से ही होगी. कुछ दिनो पहले तंवर ने कहा था कांग्रेस में परिपाटी रही है कि पुराने सांसद और विधायक अगर पार्टी में लौटना चाहते हैं तो वे अखिल भारतीय कांग्रेस प्रमुख की मंजूरी से ही आते हैं. साथ ही कहा कि जो भी नेता पार्टी नेतृत्व में आस्था रखते हैं और कांग्रेस को मजबूत बनाना चाहते हैं उनका पार्टी में स्वागत है.

पिछले कुछ महीनों में कई पूर्व विधायक उन कार्यक्रमों में कांग्रेस में दोबारा शामिल हुए जब तंवर मौजूद नहीं थे. जबकि हुड्डा ने आईएनएलडी के दो विधायकों अशोक कश्यप और बी एल सैनी को पार्टी में शामिल किया और राज्यसभा सांसद शैलजा भाजपा के पूर्व विधायक जसबीर मलोर को पार्टी में लाने में कामयाब हुईं.

जिस वक्त कुलदीप विश्नोई की अगुवाई में हरियाणा जनहित कॉंग्रेस (एचजेसी) का कांग्रेस में विलय हुआ तब हुड्डा उपस्थित नहीं थे. अब देखना यह है कि हरियाणा को कॉंग्रेस के रूप में कोई एकजुट दल मिलेगा या नहीं जो प्रदेश की जनता के मुद्दों को सुलझाए, फिलहाल तो यह दूर की कौड़ी लगती है।

First published: 26 September 2016, 2:57 IST
 
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