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किडनी डोनर के इंतजार में आखिरी सांस लेने से पहले दान कर गई अपनी आंखें

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 July 2016, 8:31 IST

कोलकाता की एक महिला को अंगदान की जरूरत और हकीकत जब पता चली तब तक बहुत देर हो चुकी थी. लेकिन अपनी आखिरी सांस लेने से पहले उसने दूसरों के लिए अपने अंगदान कर दिए.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक कोलकाता की रहने वाली 36 वर्षीया सुतापा बोस अपने पति अमिताभ और पांच साल की बेटी श्रेष्ठा के साथ रहती थी. करीब डेढ़ साल पहले सुतापा को पता चला कि उसकी किडनी फेल हो गई है. 

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यह जानकारी मिलने के बाद परिवार काफी परेशान हो गया और उन्होंने इलाज शुरू करवाया. एक विशेषज्ञ चिकित्सक ने सुतापा के परिजनों को बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट के जरिये ही उसकी जिंदगी को बचाया जा सकता है. 

मीडिया को दी गई जानकारी में सुतापा के पिता ने बताया कि उन्हें नहीं पता था कि किडनी कैसे खराब हो गई लेकिन कई महीनों से सुतापा डायलिसिस के सहारे ही चल रही थीं. डॉक्टर द्वारा किडनी ट्रांसप्लांट को ही आखिरी रास्ता बताए जाने के बाद डोनर की तलाश शुरू कर दी.

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काफी मुश्किल काम था. सुतापा के ब्लड ग्रुप से मैच करता डोनर ढूंढ़ने में कुछ वक्त लग गया और फिर जरूरी औपचारिकताओं को भी पूरा करना था, उसमें भी देरी हो गई. अब सबकुछ सही हो गया था और इस माह के अंत में ट्रांसप्लांट होना था. लेकिन ऊपर वाले को कुछ और ही मंजूर था.

बिराती में अपने पिता के घर रह रही सुतापा को इस बीच दिल का दौरा पड़ गया और परिजन तुरंत उसे तुरंत अस्पताल ले गए. जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया. बताया जा रहा है कि किडनी डोनर का इंतजार करने के दौरान सुतापा ने अंगदान की जरूरत के बारे में अपने  परिजनों से बात की थी और यह भी इच्छा जताई थी कि अगर उसे कुछ हो जाए तो उसके अंग भी दान कर दिए जाएं ताकि किसी और की जिंदगी चलती रहे.

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इधर, सुतापा की मौत के बाद उसके पिता, पति और भाई द्वारा चिकित्सकों से कहा गया कि अंगदान के इंतजार में सुतापा ने तो आखिरी सांस ले ली लेकिन इसके अंग जो दूसरों के काम आ सकते हैं, उन्हें निकाल कर दूसरों को दे दान कर दिया जाए.

इसके बाद एक आई बैंक से संपर्क किया गया और उन्होंने सुतापा की आंखों के कार्निया को जमा कर लिया. 

First published: 14 July 2016, 8:31 IST
 
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