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मद्रास हाईकोर्ट पहुंचा जयललिता का गुप्त बेटा, संपत्ति पर अधिकार देने को डाली याचिका

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 March 2017, 19:08 IST

तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री और दिवंगत नेता जे. जयललिता को एक व्यक्ति ने अपनी मां बताते हुए कहा कि वो उनका गुप्त बेटा है. मद्रास हाईकोर्ट के सामने किए गए इस दावे के बाद वहां मौजूद जज ने उस व्यक्ति को कड़ी फटकार लगाई.

इतना ही नहीं न्यायमूर्ति आर महादेवन ने फटकार लगाते हुए कहा कि तुम्हें सीधे जेल भेज सकता हूं. पुलिस अधिकारी से कह सकता हूं कि तुम्हें जेल लेकर जाएं.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक जे कृष्णमूर्ति नामक एक व्यक्ति ने अदालत में जाकर दावा किया कि वह दिवंगत जयललिता और दिवंगत तेलुगू अभिनेता शोबन बाबू का पुत्र है.

कृष्णमूर्ति ने अदालत को सबूत के तौर पर गोद लिए जाने के दस्तावेज के साथ अन्य कई कागजात भी सौंपे. उसने अदालत से मांग की कि उसे आधिकारिक रूप से जयललिता का पुत्र घोषित किया जाए.

कृष्णमूर्ति ने जयललिता के घर पोएज गार्डन समेत अन्य संपत्तियों पर भी अपना हक जताते हुए उसका अधिकार दिए जाने की मांग की. इतना ही नहीं उसने अदालत से मांग की कि जयललिता की सहयोगी वीके शशिकला से उसे जान का खतरा है इसलिए राज्य के पुलिस महानिदेशक से कहकर उसे तुरंत सुरक्षा दी जाए.

इसके बाद जस्टिस महादेवन ने कागजों को पूरी तरह से फर्जी बताते हुए उसे फटकारा और कहा, "अगर ये दस्तावेज किसी एलकेजी में पढ़ने वाले बच्चे के सामने भी दिए जाएंगे तो वह भी यह बता देगा कि यह पूरी तरह से फर्जी हैं. तुमने सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तस्वीर ही लगाई है. तुम्हें अच्छी तरह पता है कि कोई भी आकर जनहित याचिका दाखिल कर सकता है."

उन्होंने आगे कहा, "इस व्यक्ति के पास मौजूद दस्तावेज पूर्णतया फर्जी हैं. इसके वास्तविक दस्तावेज कहां हैं." इसके बाद उन्होंने कहा कि कृष्णमूर्ति को शनिवार को चेन्नई सिटी पुलिस आयुक्त के समक्ष पेश होकर अपने सभी असल दस्तावेज सत्यापन के लिए सौंपने चाहिए.

जस्टिस महादेवन ने अपर लोक अभियोजक एमिलियास को निर्देश दिया कि वे पेश किए गए दस्तावेज की प्रमाणिकता जांचे और उनको पुलिस आयुक्त के समक्ष रखा जाए. पुलिस इन कागजात का सत्यापन कराए.

इससे पहले जस्टिस महादेवन ने याची के संग मौजूद केआर रामास्वामी से पूछा, क्या आपने कागजात देखे थे? आपकी इसमें क्या भूमिका है. आपने तो कई अच्छी पीआईएल लगाई हैं. याची का दावा है कि उसका जन्म 1985 में हुआ. एक साल बाद उसे ईरोड की वसंतमणि को गोद दे दिया गया जो 80 के दशक में स्व. एमजीआर के घर काम करती थी.

कृष्णमूर्ति के अनुसार गोद देने की संविदा पर जयललिता और सोहन बाबू का फोटो व दस्तखत हैं जबकि इस संविदा में साक्ष्य के रूप में एमजीआर ने दस्तखत किए. जज का इस पर कटाक्ष था कि उस वक्त एमजीआर हाथ हिलाने की स्थिति में भी नहीं थे, लेकिन दस्तावेज के अनुसार उन्होंने दस्तखत किए हैं जिस पर यकीन नहीं किया जा सकता.

गौरतलब है कि जे जयललिता का बीते 5 दिसंबर 2016 को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था.

First published: 17 March 2017, 19:08 IST
 
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