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माओवाद के खिलाफ बने संगठन अग्नि के सदस्य को चोरी का समान खरीदने के जुर्म में सजा

राजकुमार सोनी | Updated on: 21 July 2016, 16:42 IST
(कैच न्यूज)

माओवादियों से मुकाबले के लिए पहले सामाजिक एकता मंच और फिर एक्शन ग्रुप फॉर नेशनल इंटीग्रिटी 'अग्नि' का गठन करने वाले कर्ताधर्ताओं में से एक सुब्बाराव को बस्तर की एक अदालत ने चोरी के जेवरात खरीदने के आरोप में एक साल की सजा सुनाई है. अदालत का फैसला इसी साल 24 जून को आया, लेकिन इसकी भनक किसी को नहीं लगने दी गई.

चोरी का सामान खरीदने के आरोप में दोषी करार दिए गए सुब्बाराव ने इसी महीने 16 जुलाई को जगदलपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अग्नि संस्था का गठन किया था. उनके इस कदम की जिले के आला पुलिस अधिकारियों ने भी तारीफ की थी. उन्हें अक्सर पुलिस के आलाधिकारियों के साथ ही घूमते-फिरते देखा जा रहा है.

सुब्बाराव के साथ अदालत ने चोरी का सामान खरीदने के मामले महेंद्र कुमार वैश्य, मनोज कुमार, राजेश यादव, पार्वती, यतीश्वर, प्रमिला यादव और शशिकांत प्रसाद को भी सजा सुनाई है.

यह है मामला

स्टोन और क्रेशर के व्यवसायी सत्यनारायण अग्रवाल 20 और 23 मार्च 2014 को एक शादी के सिलसिले में जगदलपुर से विशाखापट्टनम गए हुए थे. इस दौरान कुछ अज्ञात लोगों ने उनके खाली पड़े मकान पर धावा बोलकर हीरा जड़ित सोने का सेट, पांच नग सोने की चेन, सोने के मंगलसूत्र, सोने की 12 अंगूठी, सोने के दो बिस्कुट सहित कई कीमती जेवरातों और नगदी पर से हाथ साफ कर दिया था. शादी से लौटने के बाद सत्यनारायण ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई.

पुलिस तहकीकात के दौरान छिन्दवाड़ा, दरभा (बस्तर) के एक शख्स राजेश यादव को पकड़ा तो उसने कबूल किया कि महेंद्र, मनोज और कृष्णा के साथ मिलकर उसी ने चोरी की घटना को अंजाम दिया था.आरोपियों ने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने चोरी का सामान सुब्बा राव उर्फ बाबू, यतीश्वर, शशिकांत प्रसाद को बेचा है. मामले का खुलासा होने के बाद सुब्बाराव कई दिनों तक खुद को कांग्रेस का नेता बताकर पुलिस को चकमा देता रहा.

इस बीच कांग्रेस पार्टी ने साफ किया है कि सुब्बाराव कांग्रेस में थे, लेकिन चोरी की घटना में नाम आने के बाद ही उन्हें कांग्रेस से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था. कांग्रेस से बाहर होने के बाद सुब्बाराव ने संपत्त झा व कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर सामाजिक एकता मंच का गठन किया था.

यह मंच आदिवासियों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित करने को लेकर लगातार विवाद में रहा. प्रोफेसर नंदिनी सुंदर की ओर से लगाई गई एक याचिका के बाद मंच भंग कर दिया गया. अब सुब्बाराव अग्नि के प्रमुख कर्ताधर्ताओं में से एक हैं.

First published: 21 July 2016, 16:42 IST
 
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