Home » इंडिया » A Quarter Century of Feminist Legal Interventions
 

स्त्री सुधार की दिशा में मजलिस की बेमिसाल यात्रा

सौरव दत्ता | Updated on: 31 March 2016, 23:21 IST
QUICK PILL
  • यह कहानी फ्लेविया एग्नेस और उनके संगठन मजलिस की है जिसे उन्होंने अपने दोस्त और थियेटर डायरेक्टर मधुश्री दत्ता  के साथ मिलकर बनाया. कुछ सालों के दौरान ही मजलिस की ताकत में बढ़ोतरी हुई और वह स्त्री अधिकारों की वकालत करने वाले सबसे अधिक मजबूत संस्था बन गई.
  • मजलिस के लीगल सेंटर में ऐसे वकीलों की टीम है जो इन गलतियों को सुधारने की कोशिशों में जुटी हुई है. मजलिस अपने 25 सालों के करियर में कई शानदार जीत दर्ज करने में सफल रही है.

करीब 25 साल पहले बंबई की एक घरेलू महिला ने ठान लिया कि अब बहुत हो चुका. उन्होंने फिर एक नारीवादी लीगल फोरम शुरू किया. उनके संगठन ने स्त्रियों से जुड़े मुद्दों को लेकर एक के बाद एक कई सुधारों की मुहिम चलाई. इसमें बलात्कार से जुड़े कानून, घरेलू हिंसा, रख-रखाव, मुंबई के डांस बार में काम करने वाली महिलाओं के अधिकार से लेकर विवादित यूनिफॉर्म सिविल कोड तक के मामले हैं.

इस यात्रा में उन्हें कई नारीवादी संगठनों का सहयोग और समर्थन मिला. साथ ही उन्हें कुछ चुनिंदा नारीवादियों के विरोध का सामना भी करना पड़ा. यह कहानी फ्लेविया एग्नेस और उनके संगठन मजलिस की है जिसे उन्होंने अपने दोस्त और थियेटर डायरेक्टर मधुश्री दत्ता के साथ मिलकर बनाया. 

स्थापना के कुछ सालों के भीतर ही मजलिस की ताकत में बढ़ोतरी हुई और वह स्त्री अधिकारों की वकालत करने वाले सबसे अधिक मजबूत संस्था बन गई.

क्यों जरूरी है यह आंदोलन

अपनी पुस्तक 'सबवर्सिव साइट्स: फेमिनिस्ट एंगेजमेंट्स विद द लॉ' में नारीवादी विद्वान रत्ना कपूर और बृंदा कॉसमैन बताती है कि कैसे पितृसत्तात्मकता में पगे होने की वजह से कानून ने महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित कर दिया. इसकी वजह से महिलाओं को बराबरी का दर्जा नहीं मिल पाया है जबकि संविधान उन्हें लैंगिक समानता की गारंटी देता है.

मजलिस के लीगल सेंटर में ऐसे वकीलों की टीम है जो इन गलतियों को सुधारने की कोशिशों में जुटी हुई है. मजलिस अपने 25 सालों के करियर में कई शानदार जीत दर्ज करने में सफल रही है. 

एग्नेस को मशहूर कवील ऑड्री डीमेलो का सहयोग मिला है जो लैंगिक बराबरी और न्याय की जबरदस्त समर्थक हैं. महिला वकीलों की टीम चुपचाप कानूनी भेदभाव की भावना के खिलाफ लड़ रही हैं.

मसलन कई बार मजलिस की टीम मामूली शुल्क लेती हैं और कई बार वह पीड़ितों से कोई शुल्क नहीं लेती. बलात्कार पीड़ित और कम आय वाली महिलाओं से यह संस्था फीस के तौर पर कुछ भी नहीं लेती. 

एगनेस भले ही खुद को ईसाई नारीवादी बताती हो लेकिन उनकी टीम में सभी वर्ग और समुदाय के लोगों को जगह मिली हुई है.

सांप्रदायिकता के खिलाफ

एग्नेस और उनकी संस्था ने खुद को केवल लैंगिक और महिला मुद्दों तक सीमित नहीं रखा है. उनकी संस्था सांप्रदायिकता और ध्रुवीकरण के खिलाफ भी उतनी ही मुखर रही है.

मजलिस ने सांस्कृति बहुलतावाद की वकालत करते हुए अन्य महिला समूह भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन का भी समर्थन किया है

मसलन 1992 दंगों के बाद मजलिस ने 'आई लिव इन बहरामपेड़ा' नाम से डॉक्यूमेंट्री बनाई. बहरामपेड़ा मुस्लिम बहुल इलाका है जहां रहने वाले लोगों को दंगों के दौरान बेहद नुकसान उठाना पड़ा था. 

डॉक्यूमेंट्री में यह दिखाया गया है कि किस तरह से दंगों के दौरान मुंबई की मुस्लिम आबादी को निशाना बनाया गया.

पर्सनल लॉ में सुधार की कोशिश

सांप्रदायिकता के खिलाफ मजलिस की लड़ाई यूनिफॉर्म सिविल कोड के खिलाफ जाकर खड़ी होती है. जिसे लागू किए जाने के बारे में अक्सर हिंदू बहुसंख्यक सरकार बात करती रहती है. 

मजलिस ने सांस्कृति बहुलतावाद की वकालत करते हुए अन्य महिला समूह भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन का भी समर्थन किया है. इस बीच एग्नेस ने चर्च के खिलाफ भी महिला अधिकार के समर्थन में लड़ाई लड़ी है.

नारीवादी आंदोलन में एक  विचारधारा राज्य के खिलाफ है. वहीं दूसरी विचारधारा यह मानकर चलती है कि राज्य के साथ मिलकर स्थितियों को बदला जाए. मजलिस की संस्थापकों में से एक मधुश्री दत्ता ने मजलिस पर राज्य के साथ मिलकर काम करने का अरोप लगाया है जिसे एग्नेस असहमत हैं. 

एग्नेस बताती हैं कि वह किस तरह से महाराष्ट्र सरकार के उस फैसले के खिलाफ है जिसके तहत राज्य ने शहर और उसके आस-पास के इलाकों में डांस बार को प्रतिबंधित कर दिया था. लेकिन इसके साथ ही वह इस बात पर जोर देती हैं कि नारीवादी कानूनी सुधारों को राज्य की मदद के बिना नहीं पूरा किया जा सकता.

मसलन मजलिस पुलिस के लिए ट्रेेनिंग कैंप चलाती है ताकि बलात्कार पीड़ितों के मामले में पर्याप्त संवदेनशीलता बरती जा सके. नारीवादी कानूनी सुधारों को भारत जैसे देश में सरकारी एजेंसियों के साथ काम किए बिना नहीं पूरा किया जा सकता. आलोचनाओं के बावजूद मजलिस अपनी रणनीति पर सफलता के 25 साल पूरे कर चुकी है.

First published: 31 March 2016, 23:21 IST
 
सौरव दत्ता @SauravDatta29

Saurav Datta works in the fields of media law and criminal justice reform in Mumbai and Delhi.

पिछली कहानी
अगली कहानी