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20 सालों से कारगिल युद्ध के शहीदों के परिवारों को चिट्ठी लिखता है ये गार्ड, PM मोदी से की ये अपील

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 November 2018, 13:33 IST

कारगिल युद्ध में शहीद हुए सैनिकों ने देश के लिए जिस वीरता के साथ जंग लड़ी उसे देश का सलाम है. मातृभूमि के लिए जान न्यौछावर कर देने वाले इन जवानों की वीरगाथा से एक व्यक्ति इतना प्रभावित है कि वो इन वीरों के घर की मिट्टी इकठ्ठा कर रहा है. राजस्थान के 37 वर्षीय जीतेंद्र सिंह गुर्जर कारगिल युद्धवीरों से इतने प्रभावित हैं कि वे पिछले 20 सालों से उनके परिवारों को चिट्ठी लिखते आ रहे हैं. जीतेन्द्र सिंह शहीदों के घर की मिट्टी भी इकट्ठा कर रहे हैं जिससे कि भविष्य में वो एक शहीद स्मारक बनवाना चाहते हैं.

जीतेन्द्र गुजरात के सूरत में एक प्राइवेट कंपनी में बतौर सुरक्षा गार्ड काम करते हैं. जीतेंद्र सिंह गुर्जर पिछले दो दशक यानी 20 सालों से कारगिल में शहीद हुए युद्धवीरों के परिवारों को पत्र लिख रहे हैं. अपने चिट्ठी वाले पोस्टकार्ड पर जीतेंद्र भारतीय तिरंगे को स्केच करते हैं और उसके बगल में सत्यमेव जयते लिखते हैं. एएनआई से बात करते हुए जीतेन्द्र ने कहा, ''1999 के कारगिल युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों की वीर गाथा ने उन्हें ये लेटर लिखने को प्रेरित किया है.''

 जीतेन्द्र सिंह ने इस बारे में बताया, '' कारगिल युद्ध को 20 साल हो चुके हैं. इस युद्ध में मेरे गांव के कई सैनिक और सैन्य अधिकारी शहीद हुए थे. मैंने उनकी वीरता की कई कहानियां सुनी है जो मुझे प्रेरित करती हैं कि मैं उनके परिवारों को चिट्ठियां लिखूं. राजस्थान के भरतपुर जिले के रहने वाले गुर्जर ने बताया कि उन्हें कभी-कभी उनके उन शहीदों के परिवारों से चिट्ठी के जवाब भी मिलते हैं जिसे पाकर वे काफी भावविभोर हो जाते हैं.''

न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने बताया, ''कोई परिवार तो उनकी याद में चिट्ठियां पाकर खुश होता है कोई रोता है तो कोई उनकी यादों में खो जाता है. मैंने 40-50 सैनिकों के घर पर जाकर उनके परिवार से मुलाकात की है. उनके परिवार मुझे बेटे की तरह व्यवहार करते हैं. मैं जिनके भी घर जाता हूं हर उस शहीद के घर से कुछ मिट्टी उठाकर लाता हूं ताकि उस मिट्टी से मैं शहीद स्मारक बना सकूं.''

 

जीतेन्द्र कारगिल के जवान की बात बताते हुए भावुक हो जाते हैं, '' ऐसी ही एक कहानी ने मुझे अंदर तक झकझोर कर रख दिया-एक 95 साल के बुजुर्ग चुन्नी सिंह जिसे 65 साल के बाद पेंशन मिला. ऐसे ही दूसरे लक्ष्मण सिंह जिसके तीन बेटे हैं उसने लड़ते-लड़ते अपनी जान दे दी.''

जीतेन्द्र ने बताया कि वो इसके लिए अपना एक रिकॉर्ड भी रखते हैं. इसके लिए वो एक रजिस्टर मेंटेन करते हैं जिसमें देश के लिए कुर्बान हो जाने वाले हर उस शहीद के बारे में रिकॉर्ड होता है.

पोस्ट कार्ड सस्ते करने के लिए पीएम मोदी को लिखा लेटर

जीतेन्द्र ने बताया कि 2004 में पोस्टकार्ड सस्ते होते थे लेकिन अब वे काफी महंगे हो गए हैं. तब से अब तक पोस्ट कार्ड में 66 फीसदी महंगाई हो गई है. इस बारे में उन्होंने बंटाया, ''मैं एक छोटे से प्राइवेट स्कूल में काम करता था. बढ़ती महंगाई ने मुझे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेटर लिखने को प्रेरित किया. मैं हर महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पोस्टकार्ड का प्राइस कम करने के लिए लेटर लिखता हूं. लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई.''

First published: 2 November 2018, 13:33 IST
 
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