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सुब्रमण्यम बनाम सुब्रमण्यम: अगले शिकार की तलाश में स्वामी

चारू कार्तिकेय | Updated on: 24 June 2016, 7:08 IST
QUICK PILL
  • स्वामी के लगातार दुष्प्रचार की वजह से रघुराम राजन को दूसरा कार्यकाल नहीं मिला. अब स्वामी का निशाना आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम हैं. अमेरिकी अर्थशास्त्री सुब्रमण्यम को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वित्तीय सलाहकार बनाया था.
  • कुछ लोगों का कहना है कि स्वामी अरविंद सुब्रमण्यम की आड़ में वित्तमंत्री अरुण जेटली को निशाना बना रहे हैं. स्वामी की जेटली से पुरानी अदावत रही है.

सरकार के पास किसी सलाहकार को नियुक्त करने या फिर उसे बर्खास्त करने का अधिकार होता है. लेकिन इसे पूरा करते हुए यह नहीं लगना चाहिए कि यह किसी के निजी हितों को पूरा करने के लिए किया जा रहा है. विशेषकर जब मामला विवादित शख्सियत सुब्रमण्यम स्वामी से जुड़ा हो.

स्वामी के लगातार दुष्प्रचार की वजह से रघुराम राजन को दूसरा कार्यकाल नहीं मिला. अब स्वामी का निशाना आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम हैं. अमेरिकी अर्थशास्त्री सुब्रमण्यम को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वित्तीय सलाहकार बनाया था. 

स्वामी को लगता है कि सुब्रमण्यम अतीत में अमेरिकी हितों के लिए काम करते रहे हैं और उन्हें इस वजह से बर्खास्त कर देना चाहिए. उन्होंने 22 जून को इस बारे में लगातार ट्वीट करते हुए उन्हें पद से हटाए जाने की मांग कर डाली. 

स्वामी के इस मुहिम में उनके कुछ समर्थक भी जुड़ गए और पूरा अभियान वैसे ही आगे बढ़ चला जैसे स्वामी ने राजन के खिलाफ चलाया था.

कई लोगों को लगता है कि सुब्रमण्यम को आरबीआई का अगला गवर्नर बनाए जाने पर विचार किया जा रहा था और स्वामी ऐसा होने देना नहीं चाहते हैं. कुछ लोगों को यह भी लगता है कि स्वामी जेटली से पुरानी अदावत की वजह से ऐसा कर रहे हैं. स्वामी परोक्ष रूप से लगातार जेटली को निशाना बनाते रहे हैं. कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने ट्वीटर पर कहा कि स्वामी का निशाना दरअसल सुब्रमण्यम नहीं बल्कि जेटली हैं.

रघुराम राजन पर स्वामी के हमले को भी इसी से जोड़कर देखा जा रहा था.

सिंह ने यह भी कहा कि स्वामी जेटली की जगह मंत्रालय में शामिल होने वाले हैं. 

राजन को बाहर से बुलाया गया था, उसी तरह से सुब्रमण्यम को भी. सरकार के सलाहकार आते और जाते रहते हैं. सामान्य स्थितियों में किसी की नियुक्ति या उसे उसके पद से हटाए जाने को लेकर हंगामा नहीं मचता. समस्या यह नहीं है कि कोई सलाहकार सरकार से बाहर हो रहा है और कोई उसकी जगह लेगा. समस्या उसको हटाए जाने के पहले की साजिशों का है और सरकार ऐेसे व्यक्ति को चुप कराने के लिए कुछ नहीं कर रही है.

स्वामी काफी समय तक भारतीय राजनीति में हाशिए पर रहे हैं. लेकिन बीजेपी ने उन्हें राज्यसभा में लाकर फिर से सक्रिय जीवन दे दिया है. उन्हें कैबिनेट में शामिल किए जाने की भी अटकलें हैं. क्या स्वामी सार्वजनिक जीवन में किसी संवैधानिक पद पर बैठने के योग्य भी हैं? शायद नहीं. मुस्लिमों से मताधिकार छीने जाने का उनका बयान भुलाया नहीं जा सकता.

स्वामी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का मामला भी चल रहा है. उनका ट्वीट अक्सर दुष्प्रचार और दुर्भावना से भरा होता है. इन ट्वीट को देखकर इसका अंदाजा लगाया जा सकता है.

मोदी सरकार के लिए सबसे बेहतर सलाह यह है कि वह स्वामी की बातों पर ध्यान नहीं दें. साथ ही उसे स्वामी को भविष्य में ऐसी किसी तरह की बयानबाजी से बाज आने के लिए कड़ी हिदायत देनी चाहिए.

First published: 24 June 2016, 7:08 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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