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भारत और विदेशों में शराबबंदी का इतिहास

नीरज ठाकुर | Updated on: 9 April 2018, 18:20 IST

इस्लामिक देशों में शराब पर प्रतिबंध लगा हुआ है क्योंकि इस्लाम में उसके अनुनानियों को शराब पीने की मनाही है. लेकिन समय-समय पर विभिन्न देशों और राज्यों में शराब को प्रतिबंधित किया गया है जिसकी प्रशंसा कवि, कलाकार, शिल्पीकार और राजनीतिज्ञ करते रहते हैं.

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के 2010 की एक रिपोर्ट के अनुसार 15 साल या उससे ज्यादा के उम्र वालों के बीच शराब की खपत 6.2 लीटर थी. यानि लोगों ने हर दिन 13.5 ग्राम शराब का सेवन किया.

नीति-निर्देशक सिद्धांतों के आर्टिकल 47 के तहत राज्य स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नशीले पदार्थों पर प्रतिबंध लगा सकता है

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 30 फीसदी भारतीय शराब का सेवन करते हैं. इनमें 4 से 13 फीसदी लोग हर दिन शराब पीते हैं. जबकि हर दिन पीने वालों में से 50 फीसदी लोग खतरनाक स्तर पर शराब सेवन करने वालों श्रेणी में हैं.

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इस तरह के आंकड़ों के आधार पर भारतीय राजनेता अपने राज्यों में शराब पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं.

 

एक नजर विभिन्न भारतीय राज्यों और विदेशों में शराब पर प्रतिबंध लगाने के इतिहास पर:

 

शुरुआत भारत से करते हैं. नीति-निर्देशक सिद्धांतों के आर्टिकल 47 के तहत राज्य स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नशीले पदार्थों पर प्रतिबंध लगा सकता है. हालांकि, नशीले पर्दाथों का इस्तेमाल दवाई बनाने या मेडिकल कार्यों में की जा सकती है. आर्टिकल 47 के तहत ही कई राज्य देश में शराब पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश करते रहे हैं. 31 मार्च, 1956 में लोकसभा ने पूरे देश में शराब पर प्रतिबंध लगाने के लिए बिल पास किया था.

 

गुजरात: इस राज्य में 1958 से पूर्ण शराबबंदी लागू है. लाइसेंसधारक पांचसितारा होटल में शराब की ब्रिकी की अनुमति है. सरकार पांचसितारा होटलों के अलावा कुछ अन्य जगहों पर विदेशियों और एनआरआई को कठोर परमिट व्यवस्था के तहत शराब खरीदने की अनुमति देती है.

 

तमिलनाडु: 1952 में सी राजगोपालाचारी के मुख्यमंत्री रहते मद्रास राज्य (इसमें तमिलनाडु भी शामिल है) में पूर्ण शराबबंदी लागू की गई.

बिहार में इसी महीने पूर्ण शराबबंदी लागू की गई है

 

1972 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एम करुणानिधि ने इस पर प्रतिबंध हटाया लेकिन 1973 में फिर से शराबबंदी लागू कर दी गई. तमिलनाडु में शराब पर 1980 तक प्रतिबंध लगा रहा.

 

हरियाणा: यहां पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल ने 1996 से 1998 के बीच 19 महीने के लिए शराब पर प्रतिबंध लगाया था.

 

आंध्र प्रदेश: राज्य के 11 जिलों में 1958 से 1969 के बीच शराबबंदी लागू हुई थी. दोबारा शराब पर एनटी रामाराव के मुख्यमंत्री रहते 1994 में प्रतिबंध लगाया गया. हालांकि तीन साल बाद राज्य में शराबबंदी को रद्द कर दिया गया.

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नागालैंड: पूर्वोत्तर के राज्यों में नागालैंड में सबसे पहले बैन लागू किया गया. 1989 में प्रभावशाली नागा मदर्स एसोसिएशन के दबाव में शराबबंदी लागू हुई थी.

 

मिजोरम: राज्य में 1995 में पूर्ण शराबबंदी एक्ट पास किया गया था. चर्च ने भी इसे लागू करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. हालांकि, 2007 में राज्य सरकार ने राज्य में शराब उद्योग को बढ़ावा देने के लिए शराब के उत्पादन को मंजूरी दी.

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मणिपुर: साल 1991 यहां प्रतिबंध लागू हुआ. हालांकि, वर्तमान मुख्यमंत्री शराब पर से बैन हटाने का विचार कर रहे हैं.

 

लक्षद्वीप: बंगरम को छोड़कर केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप के सभी द्वीपों में शराब पूरी तरह से बैन है. पर्यटकों को भी द्वीपों में जाने से पहले शराब ना ले जाने की हिदायत दी जाती है.

 

केरल: 2015 में शराब पर प्रतिबंध लगाया है.

 

बिहार: सभी प्रकार के शराब पर पूर्ण प्रतिबंध को अप्रैल, 2016 से लागू किया गया.

 

तमिलनाडु: सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों इस बात पर सहमत है कि राज्य में प्रतिबंध लागू होना चाहिए. अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद नई सरकार प्रतिबंध लगा सकती है.

 

दूसरे देशों में प्रतिबंध:

 

अमेरिका: यहां कुछ संगठनों के भारी दबाव में 1920 में शराब पर प्रतिबंध लगाया गया था जिसे 1933 में हटा दिया गया.

 

फिनलैंड: 1919 से 1932 के बीच यहां शराब पर प्रतिबंध था.

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आइसलैंड: सात सालों के लिए 1915 से 1922 के बीच यहां शराब पर प्रतिबंध था.

 

यूएसएसअार: पूर्व सोवियत संघ में पहली बार 1914 से 1925 के बीच शराबबंदी लागू की गई थी. दोबारा 1985 से 1987 के बीच प्रतिबंध रहा जिसे बाद में हटा दिया गया.

 

इस्मालिक देश: सउदी अरब, कुवैत, ईरान, सूडान और लीबिया जैसे अरब देशों में शराब के उत्पादन और सेवन पर पूर्ण पाबंदी है. हालांकि विदेशियों को अपने घर में शराब पीने की छूट दी गई है.

First published: 21 April 2016, 7:59 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

As a financial journalist, his interface with the two dominant 'isms'- Marxism and Capitalism- has made him realise that an ideal economic order of the world would lie somewhere between the two. Associate Editor at Catch, Neeraj writes on everything related to business and the economy. He has been associated with Businessworld, DNA and Business Standard in the past. When not thinking about stories, he is busy playing with his pet dog, watching old Hindi movies or searching through the Vividh Bharti station on his Philips radio transistor.

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