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संसद सत्र, चेन्नई बाढ़ और जलवायु परिवर्तन की बहस में बीता सप्ताह

जीतेन्द्र कुमार | Updated on: 10 December 2015, 8:46 IST
QUICK PILL
  • बीते पूरे सप्ताह के दरम्यान प्रमुख हिंदी अखबारों में छाई रही खबरों और गतिविधियों की साप्ताहिक समीक्षा का कॉलम.
  • संसद में दो दिनों तक संविधान पर चले विशेष चर्चा सत्र की खबरें और नेताओं के बयान इस दौरान सबसे ज्यादा चर्चा में रहे.

पिछले हफ्ते नेशनल मीडिया खासकर हिन्दी अखबारों में तीन बातें प्रमुखता से छाई हुई थीं- जलवायु परिवर्तन, संसद का शीतकालीन सत्र और चेन्नई की बाढ़. लेकिन 26 नवंबर से संसद के शीतकालीन अधिवेशन की शुरूआत कुछ मायने में बिल्कुल अलहदा और काफी महत्वपूर्ण था.

सरकार ने इस सत्र के बारे में प्रमुखता से सूचित किया कि इस सत्र के शुरुआती दो दिन बाबा साहब आंबेडकर की 125वीं जयन्ती और संविधान निर्माण में उनके योगदान को ध्यान में रखकर उन्हें समर्पित करना चाहती है.

‘संविधान दिवस’ पर चर्चा करते करते हुए पक्ष-प्रतिपक्ष ने अपने-अपने तर्क दिए और सबसे बेधक (मारू) बयान गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने दिया. उन्होंने आमिर खान के गोयनका पुरस्कार के दिन दिए गए उस बयान का जवाब दिया जिसमें आमिर ने अपनी पत्नी के हवाले से देश छोड़ने की बात पर महज उल्लेख भर किया था.

राजनाथ सिंह ने कहा कि बाबा साहब को इतना अपमानित किया गया, लेकिन उन्होंने देश नहीं छोड़ा. राजनाथ सिंह इशारे में नहीं बल्कि स्पष्ट रूप से कह रहे थे कि कांग्रेसियों ने डॉक्टर आंबेडकर को राजनीतिक रूप से अपमानित किया लेकिन उन्होंने कभी देश छोड़ने की बात नहीं कही.

राजनाथ सिंह इशारे में कह रहे थे कि कांग्रेसियों ने आंबेडकर को राजनीतिक रूप से अपमानित किया

गृह मंत्री के इस बात का जवाब राज्यसभा में माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने बहुत ही अच्छी तरह से दिया. उन्होंने कहा कि यह बिल्कुल सही है कि बाबा साहब ने कभी देश छोड़कर जाने की बात नहीं की लेकिन उन्होंने जिस हिन्दू धर्म में जन्म लिया अंत आते-आते उस धर्म को त्याग कर बौद्ध धर्म ग्रहण कर लिया.

सबसे मजेदार बात यह है कि राजनाथ सिंह के बयान को सभी प्रमुख अखबारों ने प्रमुखता से छापा लेकिन सीताराम येचुरी को सब भूल गए. हिन्दी के किसी भी महत्वपूर्ण अखबार में उनका बयान प्रमुखता से जगह नहीं बना पाया जबकि सभी अखबारों के प्रतिनिधि राज्यसभा में मौजूद होते हैं. इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि येचुरी के भाषण को लगभग सभी अंग्रेजी के अखबारों ने प्रमुखता से छापा.

जलवायु परिवर्तन का मसला भी लगभग सभी महत्वपूर्ण अखबारों में प्रमुखता से छपा. पहले पेज से लेकर संपादकीय तक पर इसे जगह मिली. हिन्दी के सबसे बड़े अखबार दैनिक जागरण ने सोमवार को "हर क्षण बढ़ता संकट” नाम से संपादकीय लिखा. इसी तरह अमर उजाला ने पहले पेज पर प्रधानमंत्री मोदी के पेरिस में दिए गए भाषण "जलवायु परिवर्तन से मिलकर लड़ें" शीर्षक से खबर छापी.

उजाला ने मुख्य पृष्ठ पर लीक से हटकर एक खबर छापी थी. एक महिला द्वारा महाराष्ट्र के शिंगनापुर में शनिदेव मंदिर में पूजा करने के बाद मचे बवाल को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया. खबर के मुताबिक पुजारियों का कहना था कि चार सौ साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है. मंदिर को पवित्र करने के लिए उसे धोया गया.

एक महिला द्वारा महाराष्ट्र के शिंगनापुर में शनिदेव मंदिर में पूजा करने के बाद मचे बबाल को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया

हिन्दुस्तान अखबार ने पहले पेज पर "नेपाल में सात घंटे बंधक रहे 13 भारतीय जवान” शीर्षक से एक खबर छापी जिसमें बताया गया कि कुछ तस्करों का पीछा करते हुए ये भारतीय जवान नेपाल सीमा के भीतर घुस गए. इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि उन तस्करों को पड़ोस के गांव में काफी समर्थन प्राप्त था. नेपाल की स्थानीय पुलिस भारतीय जवानों को पूछताछ के लिए थाने ले गई लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया.

इस बात पर किसी अखबार में अब तक कोई खबर नहीं आई है कि किसी दूसरे मुल्क में बिना उचित कानूनी प्रक्रिया को पूरा किए बगैर सैनिक घुसे कैसे? लेकिन अगले दिन हिन्दुस्तान ने पुलिस में प्रतिनिधित्व शीर्षक से एक संपादकीय लिखा. संपादकीय में सरकार के उस निर्णय की नुक्ताचीनी की गई है जिसमें पूछा गया था कि पुलिस विभाग में कितने मुसलमान हैं. सरकार ने यह आंकड़ा मुहैया नहीं कराने की घोषणा की है.

नवभारत टाइम्स ने पी चिदबंरम के उस वक्तव्य को प्रमुखता से छापा जिसमें उन्होंने स्वीकार किया है कि सलमान रश्दी की किताब सैटेनिक वर्सेज़ पर रोक लगाया जाना गलत था. इस खबर को लगभग सभी अखबारों ने किसी न किसी रूप में प्रमुखता से छापा है. ये वही चिदबंरम हैं जो राजीव गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में गृह राज्य मंत्री थे. महत्वपूर्ण बात यह है कि उसके बाद के कुछ वर्षों को छोड़ दिया जाय तो चिदबंरम लगातार केंद्र में मंत्री रहे हैं.

चिदबंरम को आखिर 29 साल यह बात स्वीकारने की जरूरत क्यों पड़ी कि उनकी पार्टी से गलती हुई थी. लेकिन नवभारत टाइम्स ने ‘असहनसीलता पर बहस’ नाम से विष्णु नागर और चंद्रकांत प्रसाद सिंह के फेसबुक वॉल से उनके विचार छापे हैं. विष्णु नागर के विचार काफी परिपक्व से हैं जबकि चंद्रकांत जी कुछ विचित्र तर्क देते नजर आते हैं.

चिदबंरम को आखिर 29 साल यह बात स्वीकारने की जरूरत क्यों पड़ी कि उनकी पार्टी से गलती हुई थी

कई दिनों तक नकारे जाने के बाद चेन्नई में आई भीषण तबाही की खबर काफी प्रमुखता से सभी अखबारों में छपी. इस खबर की न सिर्फ हिन्दी अखबारों ने बल्कि अंग्रेजी अखबारों ने भी शुरू में अवहेलना की थी लेकिन पिछले तीन दिनों से इस खबर को केन्द्र में रखा गया है.

दैनिक भास्कर ने "नवाज का यू टर्न” शीर्षक से एक खबर छापी है. यह खबर लगभग सभी अखबारों में किसी न किसी रूप में मौजूद है. दैनिक जागरण ने संपादकीय पेज पर इस विषय से जुड़ा एक लेख छापा है तो एक अखबार ने "बिना शर्त शरीफ” शीर्षक से संतुलित संपादकीय लिखा है.

कल के अखबारों में दिल्ली सरकार की पहल, पहली जनवरी से लोग हर दिन अपनी गाड़ियां नहीं चला पाएंगे, सबसे प्रमुखता से छपी है. लगभग सभी अखबारों ने इसे या तो पहली खबर बनाया है या पहले पेज पर जगह दिया है.

संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले से ही यह चर्चा जोरों पर थी कि इस सत्र का मुख्य उदेश्य जीएसटी बिल को पास कराना है. यह खबर छिटपुट ढंग से सभी अखबारों में आती रही है लेकिन लगभग एक सप्ताह से अधिक दिनों की कार्यवाही बीत जाने के बाद भी किसी भी हिन्दी अखबार ने इसकी गहराई से पड़ताल नहीं की है कि आखिर सरकार इस बिल को पास कराने के लिए इतनी उत्सुक क्यों है और विपक्ष खासकर कांग्रेस इसके इतना खिलाफ क्यों है?

First published: 10 December 2015, 8:46 IST
 
जीतेन्द्र कुमार

Senior journalist and social activist

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