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तो रिहा हो सकते हैं दिल्ली की जेलों से 1400 विचाराधीन कैदी

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:47 IST

दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट को बताया है कि 1400 विचाराधीन कैदियों को राष्ट्रीय राजधानी के जेलों से रिहा किया जा सकता है.

दिल्ली सरकार ने विचाराधीन कैदियों की रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को आधार बनाया है जिसमें कहा गया कि ऐसे विचाराधीन कैदी, जो संबंधित मामलों में दोषी पाए जाने पर मिलने वाली सजा की आधी अवधि जेल में बिता चुके हैं, उन्हें रिहा किया जाना चाहिए.

दिल्ली हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी और जस्टिस जयंत नाथ की बेंच ने विचाराधीन कदियों की रिहाई के मामले में सुनवाई के दौरान कहा कि ट्रायल कोर्ट और पुलिस सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर रही है. इस मामले में संबंधित अधिकारियों के रवैए को कोर्ट की अवमानना माना जा सकता है.

दिल्ली सरकार के वरिष्ठ वकील राहुल मेहरा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया जाय तो कम से कम 1400 विचाराधीन कैदियों को फायदा मिलेगा. ये कैदी तत्काल ही जेल से बाहर आ सकते हैं.

उन्होंने दिल्ली सरकार द्वारा पेश स्थिति रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 1400 पुरुष विचाराधीन कैदी उन अपराधों के आरोप में दिल्ली की जेलों में बंद हैं जिसके लिए सात साल से कम अवधि की सजा हो सकती है.

इस बीच, दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने कहा है कि पुलिस अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का उल्लंघन कर रहे हैं.

इससे पहले, पिछले साल सात दिसंबर को तिहाड़ जेल के अधीक्षक ने अपनी स्थिति रिपोर्ट में कोर्ट को सूचित किया था कि 105 विचाराधीन कैदियों में से 51 को रिहा किया गया है.

First published: 11 January 2016, 12:00 IST
 
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