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दिल्ली में सम/विषम संख्या वाहन नीतिः आप सरकार को ढूंढ़ने होंगे 15 जवाब

सलमा रहमान | Updated on: 10 February 2017, 1:47 IST

इस पर कोई विवाद ही नहीं है कि दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे. दिल्ली सरकार ने इनमें से एक महत्वपूर्ण निर्णय ले भी लिया है. नए नियम के तहत एक जनवरी 2016 से राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों पर एक दिन सम और एक दिन विषम पंजीकरण संख्या वाले निजी वाहन ही चल सकेंगे. 

जहां दिल्ली सरकार इसे वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन में कमी का एक उपाय बताते हुए प्रदूषित वायु में सुधार का अहम कदम मान रही है. वहीं, इसका बारीक विश्लेषण करने पर इसकी अव्यावहारिकता भी सामने आती है.

इस नियम को लागू करने से पहले सरकार को इन महत्वपूर्ण प्रश्नों के जवाब ढूंढ़ने होंगेः

1) इतनी भारी तादाद में हर रोज यात्रा करने वाले नए यात्रियों के लिए दिल्ली सरकार के पास क्या इतनी बड़ी सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था है? यह देखते हुए कि आज भी जब दिल्ली के लोग खराब कनेक्टिविटी से जूझ रहे हैं, तब निजी वाहन से चलने वाले आधे लोग सार्वजनिक परिवहन की सेवा लेना शुरू कर देंगे तब स्थिति क्या होगी?

2) कम आय वाले परिवार कैसे ऑटो-टैक्सी की कीमतों से निपटेंगे? अभी भी मेट्रो दिल्ली के सारे हिस्सों को नहीं जोड़ती है. इसी तरह दोपहिया इस्तेमाल करने वाले लाखों लोगों को इस निर्णय से काफी परेशानी उठानी पड़ेगी.

3) तब क्या होगा जब गैर एनसीआर वाला वाहन 'सप्ताह के गलत दिन' दिल्ली से गुजर रहा होगा? तो क्या देश भर के वाहन चालकों को अपनी यात्रा इस तरह से प्लान करनी होगी कि वे अपना वाहन दिल्ली के सम-विषम संख्या वाले दिन के हिसाब से ही ले जा सकें? 

4) इन नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए सरकार की क्या योजना है? क्या वाहनों पर नजर रखने या नियंत्रण के लिए सरकार के पास इतने बड़े पैमाने पर कर्मचारी या पुलिसबल है. 

5) भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ा होने का दावा करने वाली दिल्ली सरकार को इन मुद्दों से भी निपटना होगा:

  • नई सड़क नीति के खत्म होने के बाद मौजूदा दूसरी कारों की पंजीकरण संख्या बदलने जैसी योजना, भ्रष्टाचार में वृद्धि हो सकती है. 
  • टैक्सी, कैब और ऑटो चालक अपनी दरें बढ़ा सकते हैं. 
  • लोग निजी वाहनों के लिए टैक्सी लाइसेंस लेना शुरू कर सकते हैं.
  • यातायात पुलिस को घूस देकर लोग सजा से बचने का प्रयास शुरू कर सकते हैं. 

Delhi-6 times more polluted than who norms

6) मेडिकल इमरजेंसी जैसी स्थिति में क्या होगा?

किसी गंभीर मरीज को लेकर जाते वक्त चालक को अपनी त्वरित जरूरत साबित करनी होगी. लेकिन अगर उसे किसी निश्चित स्थान पर जाकर यह साबित करना पड़े तब क्या होगा?

7) क्या सरकार ने एक जनवरी 2016 से योजना शुरू करने से पहले सार्वजनिक वाहनों की संख्या बढ़ाने की कोई योजना बनाई है? सम-विषम संख्या नीति कब से लागू की जाएगी?

8) सरकार यह कैसे तय करेगी कि निजी वाहनों के स्थान पर जो सार्वजनिक वाहन जोड़े जाएंगे, वो प्रदूषण स्तर बढ़ाने की जगह उत्सर्जन स्तर में कमी ला रहे हैं? 

9) चूंकि इससे देर रात में सार्वजनिक वाहनों की सवारी करने वाले लोगों की संख्या ज्यादा बढ़ जाएगी, तो महिला सुरक्षा का मसला गंभीर हो सकता है.

10) उन लोगों का क्या होगा जो रात की शिफ्ट में काम करते हैं. यानी देर शाम जाते हैं और सुबह वापसी करते हैं. क्योंकि आते या जाते वक्त में से एक समय तो वो सम-विषय संख्या नीति का तो उल्लंघन कर ही रहे होंगे?

11) निजी कंपनियों को भी अपनी वाहन नीतियों में बदलाव करने की जरूरत पड़ेगी? इसके साथ ही कंपनियों को यह भी सुनिश्चित करना पड़ेगा कि सार्वजनिक वाहनों से आने के चलते उनके कर्मचारियों को ऑफिस आने में होने वाली देरी के लिए जुर्माना न लगाया जाए. 

12) दिल्ली में रहने वाले अधिकांश रईस अपने निजी वाहन चलाने के लिए ड्राइवर रखते हैं. तो क्या इस नीति के नतीजे के रूप में उन ड्राइवरों को अपनी नौकरी खोनी पड़ेगी या फिर कम वेतन पर काम करना होगा?

13) तब क्या होगा जब उच्च आयुवर्ग वाले लोग नई नीति से निपटने के लिए एक दूसरा वाहन खरीद लेंगे?

14) सरकारी मानदंडों के मुताबिक, तमाम लोगों ने अपने वाहनों में सीएनजी किट लगवा ली है, जिसका मतलब कि उनका वाहन काफी गैर सीएनजी वाहनों की तुलना में काफी कम उत्सर्जन करता है. क्या यह सही है कि नए नियम का खामियाजा ऐसे लोगों को भी उठाना पड़े.

15) यह नियम कब तक लागू रहेगा यह भी बहुत चिंता का विषय है. दुनिया भर में लागू नीतियों को देखते हुए इसकी घोषणा की जानी चाहिए. जैसे पेरिस ने ऐसे नियम को एक निर्धारित वक्त तक के लिए ही लागू किया था. 

arvind kejriwal crying

और यदि सरकार बीजिंग जैसे शहरों के नियमों का पालन करने की योजना बना रही है, तो यह साफ जाहिर है कि वहां पर इन नियमों को लागू करने से पहले एक व्यापक योजना बनाकर विचार किया गया था. लेकिन दिल्ली सरकार की तरफ से ऐसा कोई भी कठोर प्रयास नहीं किया गया.

First published: 5 December 2015, 7:21 IST
 
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