Home » इंडिया » AAP inducts Akali icon Gurcharan Tohra's kin to cash in on his legacy. It backfires
 

तोहरा विरासत को भुनाने की कोशिश उल्टी पड़ी आप को

राजीव खन्ना | Updated on: 3 September 2016, 7:35 IST

अपनी पार्टी के लिए राजनीतिक चेहरों की तलाश में, खासकर सिख, आम आदमी पार्टी (आप) ने शिरोमणि अकाली दल के विधानसभा सदस्य, मंत्री और प्रतिष्ठित नेता गुरुचरण सिंह तोहरा के दामाद हरमेल तोहरा को चुना है. राज्य संयोजक सुच्चा सिंह छोटेपुर की बर्खास्तगी की वजह से खराब संबंध के कारण पहले ही संकट में घिरे आप का यह कदम उन्हीं पर उल्टा पड़ा है, और पार्टी के लिए राजनीतिक लाभ की संभावना क्षीण हुई है.

इस सप्ताह हरमेल को उनकी पत्नी कुलदीप कौर सहित पार्टी ने आप में शामिल किया है. आलोचकों का कहना है कि आप के नेता तोहरा परिवार की विरासत से राजनीतिक लाभ उठाना चाहते हैं, जिन्होंने शीर्ष अकाली राजनेता होने के अलावा 27 साल तक शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की अध्यक्षता की.

तोहरा को पंजाबी शिरोमणि अकाली दल में ताकत के एक स्तंभ के तौर पर देखते थे, जिन्होंने वर्तमान मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को पार्टी के कार्यों पर पूरा नियंत्रण नहीं रखने दिया था, पर अंत में बादल को तोहरा का निधन होते ही वह अधिकार मिल गया.

पंजाबियों पर तोहरा का प्रभाव बेजोड़ था, चाहे वे राजनीतिक कार्यकर्ता हों या मतदाता या राज्य की नौकरशाही. शायद इन्हीं कारणों से आप के नेताओं ने उनकी बेटी और दामाद सें संपर्क किया.

उनके शामिल होने से पार्टी में जमीनी स्तर पर विरोध का एक और दौर शुरू हो गया, यहां तक कि पत्रकारिता से राजनीति में आए कुंवर संधु जैसे नेता भी, जो खुले आम अपने आरक्षण की बात कर रहे हैं. हरमेल के शामिल होने से नेताओं को आप के निलंबित पटियाला सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी पर हुए हमले का वाकया याद आ गया, हालांकि हरमेल इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं.

हरमेल को पार्टी में मीडिया की मौजूदगी में बड़े जोर-शोर से आप के नेताओं-संजय सिंह, भागवंत मान, गुरप्रीत घुग्गी और हिम्मत सिंह शेरगिल ने शामिल किया था.

हालात तब बदतर हुए जब सुखबीर बादल ने कमान संभाली, क्योंकि उन्होंने टकसाली अकालियों की उपेक्षा करनी शुरू कर दी

भगवंत मान ने कहा कि आप में तोहरा परिवार के आने से पार्टी को आगामी विधानसभा चुनावों में निश्चित रूप से बल मिलेगा.

हरमेल ने कहा कि तोहरा परिवार ने हमेशा सिखवाद और पंजाब के उत्थान में योगदान किया है और तोहरा ने अपनी पूरी जिंदगी शिरोमणि अकाली दल की सेवा में लगाई है. वे आगे कहते हैं, 'हालात तब बदतर हुए जब सुखबीर बादल ने कमान संभाली, क्योंकि उन्होंने टकसाली अकालियों की उपेक्षा करनी शुरू कर दी, जो पार्टी को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के तौर पर चला रहे थे.'

हरमेल ने अतीत में अकाली दल के सभी आंदोलनों में तोहरा परिवार के योगदान और उनके जेल जाने के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि यह सुखबीर की सिख-विरोधी और पंजाब-विरोधी नीति है, जिसकी वजह से उनको पार्टी छोड़कर आप में शामिल होने को मजबूर होना पड़ा है. इससे पंजाबियों और पंजाब के लिए उम्मीद की किरण दिखाई देती है.

उन्होंने कहा, 'शिरोमणि अकाली दल में ईमानदार और समर्पित नेताओं के लिए जगह नहीं है और कई अन्य टकसाली अकाली सुखबीर के अकाली दल में घुटन महसूस कर रहे हैं.'

हाल में अपनी पत्नी कुलदीप कौर को पटियाला (ग्रामीण) विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में हल्का प्रभारी के पद से सुखबीर द्वारा हटाए जाने से भी हरमेल खफा हैं. कुलदीप की जगह सतबीर सिंह खटड़ा को नियुक्त किया गया. विधानसभा के पिछले चुनावों में खटड़ा कुलदीप कौर के विरुद्ध विरोधी पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर खड़े हुए थे. 

2012 में कुलदीप की हार के लिए जो शख्स जिम्मेदार थे, उन्हें उनकी जगह देने से हरमेल और उनके परिवार ने अपमानित महसूस किया. उनके सहयोगी इस बात पर जोर दे रहे हैं कि सुखबीर, तोहरा परिवार को पंजाब की राजनीति से बेदखल करने को आमादा हैं.

उन्हें आप में शामिल हुए चंद घंटे भी नहीं हुए थे कि पार्टी के भीतर ही इस निर्णय के खिलाफ स्वर उठने लगे

पर उन्हें आप में शामिल हुए चंद घंटे भी नहीं हुए थे कि पार्टी के भीतर ही इस निर्णय के खिलाफ स्वर उठने लगे. मुख्य रूप से मुद्दा यह उठाया गया कि हरमेल पिछले संसदीय चुनावों में आप के निलंबित पटियाला के सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी पर हमले में कथित रूप से शामिल थे.

यह कोई और नहीं, आप के मेनिफेस्टो कमेटी के प्रभारी कंवर संधु ने कहा. उन्होंने फेसबुक पर पोस्ट किया, 'तोहरा को लेना जल्दबाजी है. काश! मुझे 2014 के लोकसभा चुनावों में आप सांसद डॉ.धर्मवीर पर उस दुर्भाग्यपूर्ण हमले में हरमेल सिंह तोहरा की सहभागिता की जानकारी होती. मैं उनके लेने का विरोध करता. 

अब इस शख्स को उस हमले के लिए सार्वजनिक रूप से खेद प्रकट करना चाहिए. इसके अलावा उन्हें किसी भी चुनाव क्षेत्र का उम्मीदवार बनाए जाने से पहले यह सिद्ध करना चाहिए कि वे आप की रणनीति के लिए प्रतिबद्ध हैं. जाहिर है, हमें लोगों को पार्टी में लेने से पहले हर तरह से सावधान रहना है.'

सुनने में आ रहा है कि गांधी और उनके सहयोगियों द्वारा लगाए गए उक्त आरोप से हरमेल ने इनकार करते हुए कहा कि उन्हें ऐसा जानकारी के अभाव में कहा जा रहा है. गांधी पर हमला करने का दोषी पटियाला सेंट्रल जेल से बाहर आ गया है. उन्होंने गांधी और आप से इस कृत्य के लिए माफी मांगी है. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक रूप से कहने से पहले संधु उनसे उस घटना का विस्तृत ब्योरा मांग सकते थे.

गांधी आप के नेतृत्व से असहमत हैं और राज्य में उन्होंने एक नया राजनीतिक मोर्चा शुरू कर दिया है. पिछले चार दशकों में मालवा क्षेत्र के गांवों में सामाजिक कार्य करने की वजह से गांधी का बहुत ज्यादा व्यक्तिगत प्रभाव है.

हरमेल के कांग्रेस से निकलने को कांग्रेस पार्टी ने अकालियों की निंदा करने का एक और मुद्दा बना लिया. पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रकाश सिंह बादल को इस बात का दोषी ठहराया है कि उन्होंने एक सदी पुरानी महान अकाली विरासत को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है, उस हद तक कि 'सच्चे अकाली' घुटन महसूस कर रहे हैं और बाहर निकलने का रास्ता देख रहे हैं.

अमरिंदर सिंह ने यह इस ओर इशारा करते हुए कहा कि राज्य में पंजाब का भविष्य खतरे में है

साथ ही उन्होंने टकसाली अकालियों को गलत चुनाव नहीं करने के लिए आगाह किया. 'आप सावधानी से बेहतर चुनाव करें, न कि गलत और बदतर.' अमरिंदर सिंह ने यह इस ओर इशारा करते हुए कहा कि राज्य में पंजाब का भविष्य खतरे में है.

अरमिंदर ने अफसोस से आगे कहा, 'इससे राज्य की छवि गलत जाती है कि जत्थेदार तोहरा जैसी विरासत के उत्तराधिकारियों को कहीं और राजनीतिक शरण तलाशनी पड़ रही है.'

उन्होंने कहा कि आज बादल जिनका नेतृत्व कर रहे हैं, वो अकाली दल नहीं है, जिसका जन्म महान गुरुद्वारा आंदोलन से हुआ था और जिसकी कल्पना और संकल्पना बाबा खड़क सिंह, संत फतेह सिंह, मास्टर तारा सिंह जैसे महान सिख नेताओं द्वारा की गई थी. अरमिंदर ने कहा, 'इसे महज मुनाफा कमाने वाली प्राइवेट कंपनी बना दिया गया है, जो केवल और केवल बादल परिवार के व्यावसायिक हितों को देखती है.'

इस बीच हरमेल और कुलदीप का शिरोमणि अकाली दल से हट जाने सेे पटियाला इलाके में खास परिणाम होंगे क्योंकि उन्हें तोहरा वफादारों के विरुद्ध खड़ा किया जाएगा, जिनकी अब भी शिरोमणि अकाली दल में पैठ है. देखना यह है कि आप उनका कैसे फायदा उठाते हैं.

First published: 3 September 2016, 7:35 IST
 
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