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छोटेपुर के जाने के मायने 'आप' के लिए बहुत बड़े हैं

राजीव खन्ना | Updated on: 27 August 2016, 15:56 IST
(कैच न्यूज)

पंजाब में आम आदमी पार्टी का संकट बढ़ता ही जा रहा है. आप ने पंजाब के नेता सुच्चा सिंह छोटेपुर को संयोजक पद से हटा दिया गया है. माना जा रहा है कि जल्द ही उन्हें पार्टी से भी निकाला जाएगा. सुच्चा सिंह ने पार्टी नेतृत्व पर तीखे हमले किए हैं. उन्होंने पार्टी के पाले में अपनी गेंद फेंकते हुए पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

दरअसल, छोटेपुर को लेकर एक स्टिंग वीडियो सामने आया है जिसमें वे कथित रूप से विधानसभा का टिकट दिलाने के बदले में दो लाख रुपये लेते हुए दिख रहे हैं. इस आरोप से अपना बचाव करने के लिए उन्होंने बड़ी संख्या में अपने समर्थकों के साथ चंडीगढ़ में प्रेस ब्रीफिंग की.

आप के 21 नेताओं ने पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को पत्र लिखकर उनको हटाए जाने की मांग की है.

अपने खिलाफ लगे सभी आरोपों से इनकार करते हुए छोटेपुर ने कहा है कि पार्टी ने उनके खिलाफ षडयंत्र किया है. उन्होंने निडर होकर पार्टी नेतृत्व को चुनौती दी कि वीडियो को सार्वजनिक किया जाए और सच्चाई सामने लाने के लिए उनके खिलाफ सीबीआई जांच कराई जाए.

मेरी छवि खराब करने की कोशिश

उन्होंने कहा कि मेरी पार्टी के कुछ साथियों ने धन के बल पर ओछी हरकत कर मेरी छवि खराब करने की कोशिश की है. सब कुछ झूठ की बुनियाद पर बुना गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के संगठन सचिव दुर्गेश पाठक इस मुद्दे पर मीडिया में खबरें छपवाने के लिए धन का इस्तेमाल कर रहे हैं.

आप पार्टी से इस्तीफा देने से इनकार करते हुए उन्होंने कहा कि मैं उस पार्टी से इस्तीफा कैसे दे सकता हूं जिसे मैंने पिछले ढाई सालों से पाल-पोसा है, उसकी साख बनाई है ताकि लोग पार्टी को गंभीरता से ले सकें.

आप पार्टी को पंजाबियों की आखिरी उम्मीद होने की बात कहते हुए छोटेपुर ने कहा कि (मुझे पार्टी से निकाले जाने पर) मेरे समर्थक ही मेरा भविष्य तय करेंगे. उन्होंने टिकट वितरण के मुद्दे पर पार्टी नेतृत्व की आलोचना की और आरोप लगाया कि आप ने सत्तारूढ़ शिरोमणि अकाली दल से साठगांठ कर कमजोर प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है.

उन्होंने कहा कि अब तक पार्टी द्वारा खड़े किए गए 32 में से 25 प्रत्याशियों के खिलाफ आप कार्यकर्ताओं ने विद्रोह कर दिया है. जबकि वे अपनी राजनीति जनता के पैसों के सहारे कर रहे हैं. उन्होंने रेखांकित किया कि पार्टी ने अभी तक पंजाब में या राज्य इकाई में कोई कोषाध्यक्ष नहीं बनाया है.

मामला तो करोड़ों का है

छोटेपुर के मुताबिक पार्टी को विदेशों से मिले धन के बारे में उन्हें कुछ नहीं बताया गया था. टिकट के लिए धन उगाहने के आरोपों के जवाब में उनका कहना है कि टिकट किसे दिया जाना है, यह पहले ही तय कर लिया जाता है. आप टिकट दो लाख रुपए की बात कर रहे हैं. यह मामला तो करोड़ों का है. मैंने प्रत्याशियों की पहली दो सूची जारी करने से इनकार कर दिया था क्योंकि उसमें जमीनी और परिश्रम करने वाले कार्यकर्ताओं की पूरी तरह उपेक्षा की गई थी.

छोटेपुर ने पंजाब में युवाओं के लिए जारी घोषणापत्र की तुलना श्री गुरु ग्रन्थ साहिब से किए जाने से मचे बवाल पर केजरीवाल पर भी निशाना साधा. कवर की पृष्ठभूमि पर स्वर्ण मंदिर के साथ पार्टी का चुनाव चिन्ह झाड़ू छपा था. केजरीवाल ने मीडिया को दिए अपने बयान में हैरानी जताते हुए कहा था कि उन्होंने इस कवर को नहीं देखा था. छोटेपुर का कहना है कि खुद उन्होंने केजरीवाल से कहा था कि वह मीडिया से झूठ क्यों बोले. क्या आपको इसके नतीजे का अंदाजा है?

इसका यह अर्थ होगा कि मुझे इस मुद्दे पर अकाल तख्त के सामने पेश होने के लिए कहा जाए और सिख धर्म से निकाल दिया जाए. उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में उन्हें इसी मुद्दे की वजह से बरनाला सरकार में मंत्री पद छोड़ना पड़ा था, जेल भी जाना पड़ा था. अब मैं इस तरह के मुद्दे पर झूठ नहीं बोलूंगा.

डिप्टी सीएम पद पर बैठे व्यक्ति को यह शोभा नहीं देता

उन्होंने दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पर आरोप लगाया कि वे जासूसी कर रहे हैं. डिप्टी सीएम जैसे पद पर बैठे व्यक्ति को यह काम शोभा नहीं देता.

उन्होंने आप नेताओं पर आरोप लगाया कि वे बाहर से पंजाब के मामलों को नियंत्रित कर रहे हैं. पंजाबियों पर उनका कोई भरोसा नहीं है. ऐसे ही आरोप अन्य कई लोगों ने लगाए हैं जो आप से जुड़े रहे हैं और अब आप से अलग हो चुके हैं.

छोटेपुर ने कहा कि उन्हें इसलिए निशाने पर लिया गया क्योंकि उन्होंने पार्टी बैठक में खुले आम कहा था कि दुर्गेश पाठक पंजाब में सत्ता केन्द्र बने हुए हैं. पार्टी को एकजुट रखना उन पर निर्भर करता है.

छोटेपुर का आप नेतृत्व के साथ रस्साकसी का मामला सामने आने के साथ ही पंजाब कांग्रेस के मुखिया अमरेन्द्र सिंह खुले तौर पर उनके समर्थन में आ गए हैं और आप को पंजाब से बाहर करने के लिए एक अवसर के रूप में देख रहे हैं. अपने हालिया हमले में अमरेन्द्र ने केजरीवाल से कहा है कि वे छोटेपुर की फंडिंग की जांच फोर्ड फाउंडेशन की फंडिंग वाले अपने एनजीओ की जांच के साथ ही क्यों नहीं करवा लेते.

कैप्टन ने केजरीवाल पर निशाना साधते हुएए कहा कि दिल्ली और उप्र के आप नेता पार्टी फंड स्वीकार करने के लिए छोटेपुर को बदनाम कर रहे है. सुखपाल खेरा और अन्य नेता जब कुछ महीने पहले अमरीका और कनाडा गए थे तो उन्होंने एनआरआई लोगों से धन एकत्रित किया था. इस मामले पर पार्टी चुप क्यों है?

उन्होंने केजरीवाल से यह भी कहा कि दान देने की शुरुआत घर से होती है. विवादों और संदेह में घिरे फोर्ड फाउंडेशन की फंडिंग वाले उनके एनजीओ की जांच की शुरुआत भी घर से ही होनी चाहिए.

कांग्रेस के दरवाजे सबके लिए खुले

छोटेपुर को अपने पाले में खीचने की कोशिश के तहत कैप्टन ने कहा है कि कांग्रेस के दरवाजे सबके लिए खुले हुए हैं, चाहे वे छोटेपुर हों या नवजोत सिद्धू, परगट सिंह अथवा इंदरबीर बोलारिया. जानकारो की मानें तो छोटेपुर के कांग्रेस में आने से पार्टी को लाभ होगा. उनका गुरदासपुर में अपना आधार भी है.

अमरेन्द्र सिंह ने पंजाब के धरतीपुत्र छोटेपुर की उप्र, दिल्ली और हरियाणा के आप नेताओं द्वारा धूर्तता भारी आलोचना करने पर भी नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा कि छोटेपुर, जिसने पंजाब में आप के प्रवेश के साथ ही उसे जमीन देने, पोषित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, उसको बदनाम किया जा रहा है, साजिशें और षडयंत्र रचा जा रहा है.

कैप्टन अमरेन्द्र का मानना है कि छोटेपुर के खिलाफ कल्पित, पूर्व नियोजित तरीके से आप नेताओं द्वारा स्टिंग आपरेशन किया गया. इससे यह पता चलता है कि किस तरह से बाहरी आप नेता अपने कठपुतली, बेमेल, महत्वहीन नेताओं के जरिए रिमोट कंट्रोल से पंजाब इकाई व उसके नेताओं को चला रहे हैं.

कांग्रेस के दरवाजे सबके लिए खुले हुए हैं, चाहे वे छोटेपुर हों या नवजोत सिद्धू, परगट सिंह अथवा इंदरबीर बोलारिया

कैप्टन ने पंजाब से ही अपना राजनीतिक सफर शुरू करने वाले संजय सिंह, दुर्गेश पाठक जैसे नेताओं की बदलती जीवनशैली पर ध्यान दिए जाने का केजरीवाल को सुझाव भी दिया है कि उक्त नेता किस तरह से अब शानो-शौकत से जीवन जी रहे हैं.

पिछले कुछ दिनों से आप में जो चल रहा है, मसलन केजरीवाल द्वारा अपने ही सांसद धर्मवीर गांधी का निलम्बन, छोटेपुर को लेकर विवाद, पार्टी कार्यकर्ताओं में विद्रोह, टिकट को लेकर धन उगाहने जैसे आरोप आदि. इससे ऐसी चुनौतियां पैदा हुई हैं, जिनका राजनीतिक मोर्चे पर सामना करना मुस्किल होगा.

इससे अकालियों और कांग्रेस दोनों को ही आप पार्टी, जो भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम और अनुशासन के नाम पर आगे बढ़ रही थी, को खोखला करने का अवसर मिल गया है. आने वाले दिनों में अब ये राजनीतिक दल इस अवसर का कैसे लाभ उठाएंगे, देखने वाली बात होगी?

First published: 27 August 2016, 15:56 IST
 
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