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एक साल कैसी रही केजरीवाल सरकार?

सलमा रहमान | Updated on: 10 February 2016, 22:39 IST
QUICK PILL
  • 49 दिनों की सरकार चलाने के बाद दोबारा सत्ता में आई आम आदमी पार्टी की सरकार ने दिल्ली की जनता को खुश करने के लिए वादों की झड़ी लगा दी.
  • अरविंद केजरीवाल ने वादों को पूरा करने की दिशा में पहला कदम उठाते हुए सबसे पहले 400 यूनिट से कम बिजली की खपत करने वाले परिवारों को 50 फीसदी सब्सिडी दिए जाने की घोषणा की.

दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) का एक साल का कार्यकाल जबरदस्त उतार-चढ़ाव वाला रहा. जबरदस्त भाषण, भ्रष्टाचार के मामले और स्याही फेंके जाने की घटना के बाद आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति. 49 दिनों की सरकार चलाने के बाद दिल्ली के नागरिकों का दिल जीतने के लिए आम आदमी पार्टी ने एक के बाद एक कई वादों की झड़ी लगा दी. 

आप को केंद्र सरकार के 'राजनीतिक हमले' का भी सामना करना पड़ा. यह समस्या दिल्ली के उप-राज्यपाल नजीब जंग और दिल्ली पुलिस के रवैये की वजह से और अधिक गंभीर हो गई. पार्टी के लंबे चौड़े वादों को छोड़ दें तो बिजली, पानी और इंफ्रास्ट्रक्चर को सबसे ज्यादा तवज्जो दी गई.

तो क्या पार्टी इन सभी क्षेत्रों में किए गए वादों के मुताबिक सुधार कर पाई?

बिजली

बिजली को लेकर चुनाव पूर्व किए गए वादों को निभाते हुए आप की सरकार ने हर महीने 400 यूनिट से कम खपत करने वाले परिवारों को बिजली बिली पर 50 फीसदी सब्सिडी दिए जाने का ऐलान कर दिया. आप सरकार के इस फैसले से मध्यमवर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिली.

केजरीवाल सरकार ने सत्ता में आते ही बिजली बिल पर 50 फीसदी सब्सिडी दिए जाने की घोषणा कर दी

सरकार ने न केवल तीनों बिजली वितरण कंपनियों टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड, बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड और बीएसईस यमुना पावर लिमिटेड पर लगाम लगाने की कोशिश की बल्कि कई मामलों को आधार बनाते हुए इन कंपनियों के सीएजी ऑडिट का भी फरमान जारी कर दिया.

हालांकि सरकार की कोशिशों को उस वक्त झटका लगा जब दिल्ली की एक अदालत ने यह कहते सीएजडी ऑडिट पर रोक लगा दी, 'राज्य सरकार सीएजडी ऑडिट का फैसला नहीं ले सकती क्योंकि नियामकीय संस्था दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन पहले से ही बिजली वितरण कंपनियों का ऑडिट करता रहा है.'

सुप्रीम कोर्ट फिलहाल सीएजी और राज्य सरकार की तरफ से दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर की गई अपील की सुनवाई कर रहा है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सब्सिडी की वजह से दिल्ली सरकार पर करीब 1,400 करोड़ रुपये का बोझ बढ़ा है.

पानी और सीवेज

वादों के तहत आप सरकार ने दिल्ली जल बोर्ड के कनेक्शन वाले परिवारों को हर महीने 20 किलोलीटर मुफ्त पानी देने का फैसला किया है. सरकार को इसकी वजह से जबरदस्त आलोचना का भी सामना करना पड़ रहा है क्योंकि इस मद में 23.3 करोड़ रुपये की सब्सिडी की वजह से यूटिलिटी रेवेन्यू में जबरदस्त गिरावट आने की उम्मीद है.

हालांकि इस मामले में आप पर किस्मत मेहरबान रही और दिल्ली जल बोर्ड 2014 के मुकाबले 178 करोड़ रुपये अधिक राजस्व जुटाने में सफल रही. हालांकि सभी को मुफ्त पानी मुहैया कराने का वादा पूरी तरह से पूरा नहीं किया जा सका है. शहर में ऐसे कई इलाके हैं जहां अभी भी लोगों को पानी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है और अंत में उन्हें अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए निजी और सरकारी टैंकरों की मदद लेनी होती है.

पहले साल के दौरान आप सरकार ने दिल्ली के लोगों को मुफ्त पानी मुहैया कराए जाने के वादे को भी पूरा किया

लेकिन पानी की समस्या को दूर करने के लिए सरकार की कोशिशों की तारीफ की जानी चाहिए. अभी तक करीब 20 से अधिक कॉलोनियों में पाइपलाइन को बिछाया जा चुका है और इससे करीब 7 लाख परिवारों को मदद मिली है. सरकार ने सीवर डिवेलपमेंट चार्ज को भी 494 रुपये प्रति वर्गमीटर से घटाकर 100 रुपये प्रति वर्गमीटर कर दिया है. इससे करीब 152 अनाधिकृत कॉलोनियों को मदद मिली है जहां सीवेज लाइन बिछाया जा चुका है.

हालांकि शहर के कई हिस्सों में सीवर कनेक्शन को लगाए जाने की जरूरत है. इसके अलावा सीवेज ट्रीटमेंट के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर को भी दुरुस्त किए जाने की आवश्यकता है.

इंफ्रास्ट्रक्चर

केवल इस मामले में पार्टी अपने वादों को पूरा करने में सफल नहीं रही है. पार्टी को विकास कार्यों को ठंडे बस्ते में डालने की वजह से विपक्ष की आलोचानओं का सामना करना पड़ रहा है.

2015-16 के बजट में सभी इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्रों को कम बजटीय आवंटन मिला जबकि सार्वजनिक स्वास्थ्य, शिक्षा और बिजली के मद में ज्यादा धन का आवंटन किया गया जबकि हाउसिंग और शहरी एवं ग्रामीण विकास के मद में किए जाने वाले आवंटन में कटौती की गई.

बीजेपी ने इसकी आलोचना करते हुए कहा कि आप की सरकार अपने एजेंडे को पूरा करने के लिए विकास कार्यों को रोक रखा है. आप की सरकार मंगोलपुरी से मधुबन चौक के बीच एलिवेटेड कॉरिडोर को 300 करोड़ रुपये के बजट में बनाए जाने का श्रेय ले रही है जबकि इसका प्रोजेक्ट 450 करोड़ रुपये का था. हालांकि इस प्रोजेक्ट की शुरुआत शीला दीक्षित के कार्यकाल में हुई थी.

केंद्र सरकार की दिल्ली के छह फ्लाइओवर को बनाए जाने के मद में 3,250 करोड़ रुपये दिए जाने से भी सरकार को राहत मिली है. मीडिया में आई खबरों के मुताबिक इन परियोजनाओं को शीला दीक्षित के कार्यकाल में शुरू किया गया लेकिन फंड में कमी की वजह से इस पर काम रोकना पड़ा.

सरकार ने डीडीए के लिए 1,665 करोड़ रुपये जबकि उत्तरी एमसीडी के लिए 85 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है. डीडीए और दिल्ली पुलिस को शहर की सड़कों को और अधिक व्यवस्थित करने के लिए उपाय सुझाने को कहा गया है.

आप सरकार 5.8 किलोमीटर लंबे बस रैपिड ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर को भी खत्म करने में सफल रही है. बीआरटी कॉरिडोर की वजह से दिल्ली के लोगों को काफी लंबे समय तक ट्रैफिक की परेशानियां उठानी पड़ी. सरकार के ऑड-ईवन के फॉर्मूले की वजह से भी ट्रैफिक को कम करन में मदद मिली है. हालांकि यह दीर्घकालिक समाधान नहीं होकर महज एक तात्कालिक समाधान था.

First published: 10 February 2016, 22:39 IST
 
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