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दिल्ली सरकार बनाम LG: सेवाओं पर नियंत्रण के फैसले पर बंटे जज, मामला बड़ी बेंच के पास

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 February 2019, 13:04 IST

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी में सेवाओं के नियमन पर उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार के बीच टकराव पर जजों ने अलग-अलग फैसला सुनाया. ऐसे में अब यह फैसला बड़ी बेंच के पास भेज दिया गया है. न्यायमूर्ति एके सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की खंडपीठ ने दिल्ली में भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) पर नियंत्रण रखने वाले केंद्र पर सहमति व्यक्त की, जबकि 'सेवाओं' के अधिकार क्षेत्र पर मतभेद रहा.

सर्विसेज के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि ग्रेड-1 और ग्रेड-2 के अधिकारियों की ट्रांसफर और पोस्टिंग का अधिकार केंद्र सरकार होगा. जबकि दिल्ली सरकार कमशिन ऑफ इन्क्वायरी का गठन नहीं कर सकती. सुप्रीम कोर्ट ने कहा जमीन से जुड़े मामले दिल्ली सरकार के पास रहेंगे.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार की एसीबी उसके कर्मचारियों की जांच नहीं कर सकता. जुलाई 2018 में, अदालत की पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने राष्ट्रीय राजधानी को संचालित करने के लिए व्यापक मापदंडों को निर्धारित किया था, जिसने केंद्र और अरविंद केजरीवाल सरकार के बीच युद्ध की स्थिति देखी गई. शीर्ष अदालत ने फैसला सुनाया था कि उपराज्यपाल (एल-जी) के पास कोई "स्वतंत्र निर्णय लेने की शक्ति" नहीं है और उसे मंत्रिमंडल की सलाह पर निर्णय लेना होगा.

इसके बाद, 19 सितंबर को, केंद्र ने शीर्ष अदालत से कहा था कि दिल्ली का प्रशासन अकेले दिल्ली सरकार पर नहीं छोड़ा जा सकता है और इस बात पर जोर दिया है कि दिल्ली की देश की राजधानी होने के कारण इसकी असाधारण स्थिति है.

दूसरी ओर दिल्ली सरकार ने 4 अक्टूबर को शीर्ष अदालत को बताया कि वह चाहती थी कि राष्ट्रीय राजधानी के शासन से संबंधित उसकी याचिकाओं पर जल्द सुनवाई हो क्योंकि वह नहीं चाहती कि प्रशासन में गतिरोध जारी रहे". पीठ ने 1 नवंबर 2018 को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

First published: 14 February 2019, 12:37 IST
 
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