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'आप' मंत्री कपिल मिश्रा के भीतर उफनता 'दक्षिणपंथ'

चारू कार्तिकेय | Updated on: 6 October 2016, 7:24 IST
(मलिक सज्जाद)
QUICK PILL
  • दिल्ली की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी हमेशा ख़ुद को गरीबी, बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार समेत आम आदमी से जुड़े मुद्दों पर जूझने वाली पार्टी होने का दावा करती है. 
  • मगर हमेशा ऐसे मौक़े आए हैं जब पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने राष्ट्रवाद के मुद्दे पर अपने बयानों से बीजेपी और संघ को भी पीछे छोड़ दिया है.

हाल ही में दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती पर बरस पड़े. कई मायनों में उनका तेवर गैरजरूरी था. दिल्ली के एक मंत्री और दूसरे राज्य की मुख्यमंत्री के बीच इस तरह आमना-सामना करने का न तो मंच था और ना ही मौका. जिस तरह मिश्रा ने मुफ्ती पर हमला किया, वह एक सुलझे नेता के लिए शोभाजनक भी नहीं है. जो मुद्दा मिश्रा ने उठाया, उसकी भी समीक्षा जरूरी है. 

राष्ट्रीय राजधानी में पर्यटन मेला था और इस मौके पर आप मंत्री कपिल मिश्रा तब नीले-पीले हो गए, जब केंद्रीय पर्यटन मंत्री महेश शर्मा ने कश्मीर के लिए 500 करोड़ रुपए के पैकेज की घोषणा की. मिश्रा ने कहा, ‘कश्मीर हमारा गर्व है, पर साथ ही कश्मीर में आतंकियों के साथ पर्यटकों का-सा बर्ताव किया जाता है.’ 

मिश्रा ने मुफ्ती, और उल्लेखनीय रूप से कश्मीरियों की कड़ी निंदा करते हुए कहा, ‘पर्यटन और आतंकवाद साथ-साथ कैसे चल सकते हैं?’ उन्होंने गुस्से में अपनी बात जारी रखी, यह बताने की कोशिश करते हुए कि यह विषय इस इवेंट पर कितना प्रासांगिक है. उनका आक्रोश मुफ्ती पर था कि वे किस तरह आतंकियों को संरक्षण और सहानुभूति दे रही हैं.

सभी कश्मीरियों को एक रंग में रंगा

हालांकि घाटी में अशांति के दौरान मुफ्ती का रवैया पिछले तीन महीनों में दुखद रहा है, पर मिश्रा के कहने की जगह गलत है और कश्मीर के सभी लोगों के लिए बेहद असंवेदनशील है. उन्होंने मौजूद लोगों को यह पूछकर उकसाने की कोशिश भी की कि क्या कश्मीरियों की मदद के बिना 2 अक्टूबर को हुए बारामूला हमले के आतंकी बचकर निकल सकते थे? 

उन्होंने कहा, ‘किसी ने जरूर उन्हें अपने घर में रखा, शरण दी और छिपाया.’ मिश्रा आगे कहते हैं, ‘वे (कश्मीरी) इस देश के नागरिक हैं. हमें किससे लड़ना चाहिए- अपने लोगों से या बाहर के लोगों से.’ 

अंतत: मिश्रा ने यह किया कि उन्होंने सभी कश्मीरियों को एक रंग में रंग दिया, सभी कश्मीरियों पर आतंकियों का ‘हमदर्द’ होने का आरोप लगाया. उन्होंने राज्य के खराब हालात की वजह पर एक मिनट का भी समय नहीं दिया. उन्होंने पुलिस कार्रवाई के दौरान मरे 90 लोगों, और पेलट गन से बुरी तरह हताहत हुए लोगों के लिए दुख नहीं जताया. उन्होंने कश्मीरियों को भरोसा दिलाने के लिए कि भारत उनकी परवाह करता है, यहां की गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और लगातार विफल रह रही राज्य और केंद्र सरकार पर चर्चा नहीं की.

क्या बुरहान वानी आतंकी नहीं?

मिश्रा ने अपनी बात बारामूला की घटना पर ही खत्म नहीं कर दी. उन्होंने बुरहान वानी और अफजल गुरु का भी जिक्र किया और मुफ्ती से यह बताने को कहा कि वे उन्हें आतंकी मानती हैं या नहीं मानती हैं.  उन्होंने आरोप लगाया कि ‘25 नवंबर 2015 को मुफ्ती के घर पाकिस्तान का झंडा फहराया गया.’ 

साथ ही यह भी पूछा, ‘हम आतंकी और पाकिस्तानियों से लड़ सकते हैं, पर उन लोगों से कैसे लड़ सकते हैं, जो उन्हे शरण दे रहे हैं.’ इस तरह एक के बाद एक अतिराष्ट्रवादी मुद्दों को गिनाना और निहित जटिलताओं को नजरअंदाज करना, दक्षिणपंथियों की ऐसी रणनीति है, जिससे मिश्रा को भाजपा या आरएसएस नेता समझने की भूल हो सकती है. 

मिश्रा ने जो पत्रकारों से कहा, उसे सुनने के बाद लोगों की मिश्रा के लिए यह भ्रांति और गहरी हो सकती थी. ‘मैंने बिलकुल सही प्रश्न पूछे. (आरएसएस प्रमुख) मोहन भागवत भी उसका अनुमोदन करेंगे.’ तो आप को आरएसएस प्रमुख के समर्थन की कब से जरूरत पडऩे लगी? गुरु के बारे में बात करते हुए मिश्रा ने उन दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं का भी उल्लेख किया, जो इस साल के शुरू में जेएनयू में हुई थीं.

जेएनयू कांड में छात्रों पर कार्रवाई चाहती थी आप

जेएनयू के विद्यार्थियों के देशद्रोही नारों पर मुफ्ती की राय पूछते हुए मिश्रा ने दावा किया कि मुफ्ती ने भाजपा पर जोर डाला था कि ‘वह जेएनयू के विद्यार्थियों को दंड नहीं दे.’ पीडीपी को ‘आतंकियों का समर्थन करने वाली पार्टी’ कहते हुए मिश्रा ने शायद पहली बार पुष्टि की कि आप चाहती हैं कि जेएनयू के विद्यार्थियों को नारों के लिए दंड दिया जाए. आप का कश्मीर में चुनाव लड़ना अभी बाकी है और इसलिए उसने कश्मीर मुद्दे पर अपनी बात को साफ नहीं कहा है, पर मिश्रा के कथन कह रहे हैं.

जैसे-जैसे समय बीत रहा है, आप दक्षिपंथियों की साख तेजी से सामने आ रही है. उसी दिन पार्टी की दिल्ली इकाई ने पाकिस्तान हाई कमिशन के बाहर जन-विरोध का आयोजन भी रखा था.  

खुद को ‘पाकिस्तान हाय हाय’ ब्रिगेड का बताकर आप परंपरागत दक्षिणपंथियों की पंक्ति में खुद को ला रही है, पर उससे ज्यादा समस्यात्मक है कश्मीर को लेकर पार्टी का नजरिया. क्या आप भी मानती है कि कश्मीर केवल जमीन का मुद्दा है, वहां रह रहे लोगों का नहीं?

First published: 6 October 2016, 7:24 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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