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मुंबईः प्रस्तावित मेट्रो रेल कार शेड पर्यावरण पर नया कुठाराघात होगा

अश्विन अघोर | Updated on: 15 March 2016, 8:56 IST
QUICK PILL
  • केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय मुंबई के आरे कॉलोनी में  मेट्रो रेल कार शेड बनवाना चाहता है. पर्यावरणविदों के अनुसार इससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचेगा.
  • सरकार आरे कॉलोनी में प्रस्तावित कार शेड बनवाने को लेकर अड़ियल रुख में नजर आ रही है. पर्यावरणविदों के अनुसार दूसरी जगहों पर भी बन सकता है कार शेड.

खुद को विकासवादी साबित करने के लिए केंद्र और महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार पर्यावरण हितों की जमकर अनदेखी कर रही है. केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा मुंबई के आरे कालोनी में मेट्रो रेल कार शेड बनाने के फैसले को इसकी ताजा कड़ी माना जा रहा है.

महाराष्ट्र सरकार पिछले एक साल से एक के बाद एक ऐसे कई फैसले लेती रही है जिन्हें पर्यावरण हितों को क्षति पहुंच सकती है. राज्य में सरकार के गठन के तत्काल बाद 15 साल पुराने रिवर रेगुलेटरी ज़ोन (आरआरज़े) को भंग कर दिया गया. राज्य की पहले से ही प्रदूषित नदियों के लिए ये फैसला ताबूत में आखिरी कील की तरह था.

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सरकार पर आरोप लग रहा है कि उसने बहुुराष्ट्रीय कंपनियों की मदद के लिए आरआरजे को भंग किया ताकि वो नदियों के किनारे निर्माण कर सकें और अपना कचरा नदी में बेरोकटोक बहा सकें.

राज्य सरकार जिस आरे कॉलोनी में मेट्रो रेल कार शेड बनाने पर अड़ी है वो संजय गांधी राष्ट्रीय पार्क का हिस्सा है. सरकार के फैसले से इलाके के इस हरित पट्टी को भारी नुकसान पहुंचेगा.

महाराष्ट्र सरकार ने पिछले एक साल में एक के बाद एक ऐसे कई फैसले किए जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच सकता है

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने शनिवार को अपने मुंबई दौरे में कहा कि आरे कॉलोनी प्रस्तावित कार शेड के लिए एकमात्र विकल्प है. पर्यावरणविदों ने सुझाव दिया है कि प्रस्तावित कार शेड कांजुरमार्ग पर भी बनाया जा सकता है. सरकार ने भी इसका सर्वे कराया था जिसमें कहा गया कि यहां प्रस्तावित कार शेड बनाया जा सकता है. फिर भी केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय इसे आरे कॉलोनी में ही बनाने पर अड़ा हुआ है.

शनिवार को मीडिया से बात करते हुए जावडेकर ने कहा कि उनका मंत्रालय इस बात की पूरी कोशिश करेगा कि प्रस्तावित कार शेड के निर्माण से पर्यावरण को न्यूनतम नुकसान हो.

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राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस ने भी लोगों को आश्वस्त किया कि प्रस्तावित कार शेड़ के लिए केवल 350 पेड़ काटे जाएंगे. पहले 2500 पेड़ काटने की योजना थी.

मुख्यमंत्री ने ये भी कहा कि सरकार आरे कॉलोनी में कार शेड बनाने के लिए प्रतिबद्ध है क्योंकि इसे कहीं और ले जाने से 1500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा.

Aarey Colony 2

वनशक्ति

पर्यावरणविद् सरकार के तर्क से सहमत नहीं हैं. मुंबई स्थित एनजीओ वनशक्ति के प्रोजेक्ट निदेशक स्टालिन डी कहते हैं, "सरकार का और मुंबई मेट्रो डेवलपमेंट अथॉरिटी(एमएमआरडीए) का ट्रैक रिकॉर्ड इसके उलटा रहा है. ये कई बार प्रमाणित हो चुका है कि एमएमआरडीए पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की कत्तई चिंता नहीं करता."

स्टालिन इलाके के पर्यावरण संरक्षण से जुड़े एनजीओ के समूह आरे कंजर्वेशन ग्रुप के सदस्य हैं. स्टालिन कहते हैं, "ये समझना मुश्किल है कि सरकार आरे कॉलोनी में प्रस्तावित कार शेड बनाने पर क्यों अड़ी है. हमने उन्हें कई विकल्प सुझाए हैं लेकिन वो उनपर विचार ही नहीं करना चाहते."

स्टालिन ये भी कहते हैं कि जावडेकर जनभावनाओं को समझने में विफल रहे हैं. वो कहते हैं,"हमने नेशनल गरीन ट्राइब्यूनल में काफी कुछ हासिल किया. अब जावडेकर के बयान के बाद हमें अपनी लड़ाई फिर से शुरू करने की जरूरत है."

"सरकार आरजे कॉलोनी में इसलिए कार शेड बनानी चाहती है ताकि भविष्य में उसका वाणिज्यिक दोहन किया जा सके''

स्टालिन कहते हैं कि सरकार आरजे कॉलोनी में इसलिए कार शेड बनानी चाहती है ताकि भविष्य में उसका वाणिज्यिक दोहन किया जा सके.

स्टालिन कहते हैं, "हम मेट्रो रेल के खिलाफ नहीं हैं. हम केवल कार शेड की जगह बदलने की मांग कर रहे हैं. हम पेड़ों की कटायी के विरोध में आरे कॉलोनी के अंदर रहने वाले आदिवासियों को संगठित करेंगे."

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सुप्रीम कोर्ट के साल 2006 के फैसले के अनुसार किसी भी राट्रीय पार्क या वन्यजीव अभयारण्य के चारों तरफ 10 किलोमीटर तक का जैव संवेदनशील ज़ोन होना चाहिए.

स्टालिन बताते हैं कि पर्यावरण मंत्रालय ने एनजीटी में माना था कि आरे कॉलोनी संजय गांधी नेशनल पार्क के जैव संवेदनशील ज़ोन के अंतर्गत आता है.

पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स, कांजुरमार्ग और कलीना को कार शेड के लिए वैकल्पिक स्थान के रूप में सुझाया है.

एमएमआरडीए के एक अधिकारी ने नाम न देने की शर्त पर कहा, "हम जैव पारिस्थितिकी से जुड़ी चिंताओं से वाकिफ हैं. हमने योजना बनाते समय पर्यावरणविदों के कई सुझावों का ध्यान रखा है. एक बार मेट्रो रेल बन जाएगी तो शहर का कार्बन फुट प्रिंट बहुत कम हो जाएगा."

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कार शेड की जगह बदलने की संभावना पर एमएमआरडीए अधिकारी ने कहा, "इसकी जगह बदलना लगभग असंभव है क्यों कि कार शेड को या तो मेट्रो रेल लाइन के शुरू में होना चाहिए या अंत में. इसे बीच की किसी जगह पर नहीं बनाया जा सकता."

बहरहाल, सरकार के अड़ियल रुख के बावजूद पर्यावरण कार्यकर्ता अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे. स्टालिन कहते हैं, "हम आसानी से हार नहीं मानेंगे."

First published: 15 March 2016, 8:56 IST
 
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