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आरुषि-हेमराज हत्याकांड: नौ साल बाद भी जिंदा हैं यह 7 सवाल

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 October 2017, 16:39 IST

देश की बहुचर्चित मर्डर मिस्ट्री आरुषि-हेमराज हत्याकांड में गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुना दिया है. इस मामले में सीबीआई कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए गए आरुषि के माता-पिता डॉ. नुपुर और राजेश तलवार को कोर्ट ने बरी कर तुरंत जेल से रिहा करने का फैसला सुनाया. इसके बावजूद आज भी आरुषि-हेमराज हत्याकांड के ये सात सवाल जिंदा है.

दरअसल इस केस से पहले दिन से जुड़े प्रमुख हिंदी अखबार में नोएडा के एक क्राइम रिपोर्टर सुनील मौर्य ने मई 2017 में एक किताब लिखी थी. किताब का शीर्षक है, 'आरुषिः कातिल जिंदा है'. इस किताब में सुनील ने पुलिस-सीबीआई रिपोर्ट के हवाले से ही सवाल उठाए हैं. जानिए क्या कहते हैं उनकी किताब के सवाल.

1. सीबीआई की फॉरेंसिक जांच व क्लोजर रिपोर्ट के हवाले से 15 मई की रात में दो कत्ल किए गए थे तो तलवार की टीशर्ट पर सिर्फ आरुषि का ही खून क्यों लगा. हेमराज का क्यों नहीं. जबकि, रात में पहने कपड़े और सुबह में भी वही पहने होने का सबूत भी मिला था. इसके लिए 15 मई की रात नए कैमरे से खींची गई फोटो और सुबह मीडिया फुटेज से कपड़ों का मिलान किया गया था.

2. वाकई में आरुषि के कमरे से ली गई पहली फोटो इस केस का सबसे बड़ा प्रूफ है. अगर आप इस तस्वीर को ध्यान से देखेंगे तो पता चलेगा कि कत्ल वाली रात आरुषि के साथ जोर-जबर्दस्ती की गई थी. आरुषि ने भी विरोध किया था इसलिए उसके दाहिने हाथ पर किसी आदमी के दबाव डालने का गहरा निशान भी पड़ गया था. अगर, आरुषि अपनी मर्जी से हेमराज के साथ संबंध बनाती तो ऐसा नहीं होता और उसका पिता उसे मारता तब भी हाथापाई की नौबत नहीं आती. ऐसे में यह निशान क्यों आता. सीबीआई की कमेटी की रिपोर्ट में भी लिखा गया था कि वह निशान किसी व्यक्ति का ही है.

3. शुरू में आरुषि को सगी बेटी नहीं होने से लेकर कई बातें सामने आई थीं, जिससे यह बताया गया कि आरुषि से उसके माता-पिता का लगाव नहीं था, इसलिए मार दिया होगा. इसके बाद सीबीआई ने डीएनए जांच कराकर यह पुष्टि कर दी थी आरुषि ही राजेश व नूपुर तलवार की बायोलॉजिकल बेटी थी. साथ ही एक रिसर्च रिपोर्ट के आधार पर यह बताया गया है कि कोई मां-बाप आखिर किन परिस्थितियों में अपने बच्चे की हत्या करता है.

4. अभी तक यह भी कहा जाता रहा है कि दोनों कत्ल रात में 12 से 1 बजे के बीच हुए. मगर, किताब में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर दावा है कि मर्डर रात में 1 बजे के बाद किए गए. इसके पीछे साइंटिफिक प्रूफ भी है कि गर्मी में कैसे रात में खाना खाने के बाद पचाने में समय लगता है और फिर एक शख्स को कब गहरी नींद आती है, जिससे उसे आस-पास के बारे में उतना बेहतर तरीके से पता नहीं चल पाता है.

5. आरुषि की पंचनामा रिपोर्ट में की गई थी हेरा-फेरी. इसलिए रेप का पता लगाने के लिए पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर ने पहले जांच ही नहीं की थी. इस पंचनामे को बाद में आनन-फानन में बनाकर बाहर से एंट्री की गई थी, जिसे कोई भी देख सकता है कि उसमें अलग से रेप का पता लगाने के लिए एंट्री की गई थी.

6. आखिरी बात में नूपुर व राजेश तलवार से बातचीत का अंश है. नूपुर से सवाल किया गया कि क्या ऐसा नहीं कि जब आरुषि को मार ही डाला, तो अपने पति को बचाने के लिए वह उससे मिल गई. इस पर नूपुर ने कहा था कि ...मैं पत्नी हूं तो एक मां भी. ऐसा कैसे हो सकता है कि एक तरफ कोई मेरी बेटी को मार दे और मैं चुप रहूं. अगर पति वाकई में ऐसे होते, तो मैं उन्हें सजा दिलाती. ऐसा कैसे हो सकता है कि एक मां को पता हो कि उसकी बेटी की हत्या हो गई और वह कमरे में आराम से नींद ले. मैं तो बिल्कुल भी नहीं.

7. एक सवाल के जवाब में दंपति ने बताया कि हमेशा पुलिस कहती रही कि जहां हेमराज की लाश थी उस छत की चाबी तलवार ने नहीं दी थी, बल्कि गुमराह किया था. वाकई में उसकी चाबी ही नहीं थी. इसके बाद गोल्फ स्टिक की बात आई कि एक को गुम करा दिया गया. करीब एक साल बाद जैसे ही उन्हें गोल्फ स्टिक मिली तो उसे सीबीआई के हवाले कर दिया. उसी के आधार पर सीबीआई की दूसरी टीम ने कातिल बना दिया. अगर ऐसा होता तो वे खुद गोल्फ स्टिक क्यों देते. अंत में सबसे बड़ी बात कि जब सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट लगा दी थी तब वे खुद ही हाई कोर्ट में केस को री-ओपन कराने के लिए क्यों गुहार लगाते, अगर वे खुद कातिल होते. क्या कोई ऐसा शख्स होगा जो किसी जुर्म करने के बाद भी पुलिस से बच जाए तो दोबारा वह खुद ही केस को ओपन कराकर जांच कराने की मांग करेगा. जरा सोचिए.

First published: 12 October 2017, 16:39 IST
 
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