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आरुषि-हेमराज हत्यकांड: CBI फिर से कातिलों का लगाएगी पता,तलवार दंपति को हाईकोर्ट ने किया था बरी

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 March 2018, 9:01 IST

करीब एक दशक बाद भी आरुषि हत्याकांड की गुत्थी सुलझने का नाम नहीं ले रही है. सबूतों के आभाव में आरुषि के माता-पिता राजेश तलवार और नूपुर तलवार को इलाहबाद हाई कोर्ट ने बरी कर दिया था. पिछले साल आए इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआइ) ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. इसी के साथ आरुषि-हेमराज हत्याकांड में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है.

केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआइ) ने पिछले साल आए इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें सुबूतों के अभाव में तलवार दम्पति को बरी कर दिया था.
सीबीआई के प्रवक्ता ने बताया कि एजेंसी ने बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी है. यानी सीबीआइ नए सिरे से हत्याकांड की जांच करेगी और सच का पता लगाएगी. ऐसे में तलवार दंपती की मुश्किलें बढ़ सकती है. इससे पहले हेमराज की पत्नी खुमकला बंजाडे ने विगत दिसंबर में ही सुप्रीम कोर्ट में अपील कर दी थी.

 

गौरतलब है की पिछले साल 12 अक्टूबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलवार दंपती को बरी कर दिया था. न्यायमूर्ति बीके नारायण और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार मिश्र की खंडपीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए दोनों को दोषी नहीं माना था. तब खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा था कि सीबीआइ की जांच में कई कमियां हैं.

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कोर्ट ने मामले में तलवार दंपति को संदेह का लाभ दिया गया था. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मां-बाप राजेश और नूपुर तलवार ने आरुषि को नहीं मारा. इस मामले में आरोपी दंपती डॉ. राजेश तलवार और नुपुर तलवार ने सीबीआई अदालत की ओर से उम्रकैद की सजा के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी.

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2008 में हुई आरुषि की हत्या का केस अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पंहुचा है. तलवार दंपत्ति पर शक और फिर सबूतों के आभाव में उनका बरी होना. अब सीबीआई नए सिरे से इस केस की जांच करेगी.

 

आरुषि-हेमराज मिस्ट्री मर्डर केस की पूरी टाइमलाइन

16 मई 2008- पेशे से डेंटिस्ट राजेश तलवार की 14 साल की बेटी आरुषि और उनके घरेलू नौकर हेमराज की जलवायु विहार फ्लैट पर हत्या. आरुषि का गला कटा था.

17 मई 2008- छत से नौकर हेमराज की लाश बरामद हुई. 23 मई 2008- दोनों की हत्या के शक में आरुषि के पिता राजेश तलवार गिरफ्तार.

24 मई 2008- यूपी पुलिस ने राजेश तलवार को मुख्य अभियुक्त माना. 29 मई 2008- पूर्व सीएम मायावती ने सीबीआई जांच की सिफारिश की.

1 जून 2008- सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ली. 13 जून 2008 - डॉ राजेश तलवार के कम्पाउंडर कृष्णा को सीबीआई ने गिरफ्तार किया. तलवार के दोस्त दुर्रानी के नौकर राजकुमार और तलवार के पड़ोसी के नौकर विजय मंडल को भी बाद में गिरफ्तार किया. तीनों दोहरे हत्याकांड के आरोपी बने.

12 जुलाई 2008- सबूतों के अभाव में राजेश तलवार को रिहा किया गया. 12 सितंबर 2008 : कृष्णा, राजकुमार और विजय मंडल को लोअर कोर्ट से जमानत मिली. सीबीआई 90 दिन तक चार्जशीट फाइल नहीं कर सकी.

10 सितंबर 2009 आरुषि हत्याकांड की जांच के लिए सीबीआई की दूसरी टीम बनी. 9 फरवरी 2009- तलवार दम्पति पर हत्या का मुकदमा दर्ज.

29 दिसंबर 2010- 30 महीने तक चली जांच के बाद सीबीआई ने अदालत को क्लोजर रिपोर्ट सौंपी.

25 जनवरी 2011- राजेश तलवार ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ लोअर कोर्ट में प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल की.

9 फरवरी 2011- लोअर कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट खारिज की, आरुषि के मां-बाप, राजेश और नुपुर तलवार को हत्या और सुबूत मिटाने का दोषी माना.

21 फरवरी 2011- डॉ राजेश और नुपुर तलवार ट्रायल कोर्ट के समन को रद्द करवाने हाइकोर्ट गए.

18 मार्च 2011 - हाईकोर्ट ने समन रद्द करने की तलवार की गुजारिश खारिज की और उन पर कार्यवाही शुरू करने को कहा.

19 मार्च 2011 : तलवार दंपति सुप्रीम कोर्ट गए, जिसने उनके खिलाफ ट्रायल को स्टे कर दिया.

6 जनवरी 2012- सुप्रीम कोर्ट ने तलवार दंपति की अर्ज़ी खारिज की और उनके खिलाफ ट्रायल शुरू करने की इजाजत दी.

25 नवंबर 2013- तलवार दंपति को गाज़ियाबाद की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने दोषी पाया और उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई.

जनवरी 2014- तलवार दंपति ने सीबीआई कोर्ट के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी.

11 जनवरी 2017- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलवार दंपति की अपील पर फैसला सुरक्षित रखा.

1 अगस्त 2017- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि तलवार की अपील दोबारा सुनेंगे क्योंकि सीबीआई के दावों में विरोधाभास है.

8 सितंबर 2017 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरुषि-हेमराज हत्याकांड में फैसला सुरक्षित किया.

12 अक्टूबर 2017: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरुषि-हेमराज हत्याकांड में तलवार दंपति को कातिल नहीं माना

First published: 9 March 2018, 9:01 IST
 
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