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आरुषि-हेमराज हत्याकांड: SC ने हेमराज की पत्नी की याचिका मंजूर की, तलवार दंपत्ति को भेजा नोटिस

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 March 2018, 15:42 IST

नोएडा के बहुचर्चित आरुषि-हेमराज हत्याकांड में एक नया मोड़ आ गया है. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए इस पर दोबारा छानबीन करने की बात कही है. सुप्रीम कोर्ट छानबीन कर यह तय करेगा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला सही है या नहीं.

दरअसल, जब पिछले साल दिसंबर में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलवार दंपति को बरी कर दिया था तो हेमराज की पत्नी ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी थी. हेमराज की पत्नी खुमकला बेंजाडे ने याचिका में कहा है कि इस बारे में हाईकोर्ट का फैसला गलत है क्योंकि हाईकोर्ट ने इसे हत्या तो माना है लेकिन किसी को दोषी नहीं ठहराया.

खुमकला बेंजाडे ने याचिका में कहा कि जब किसी को दोषी नहीं ठहराया गया तो इसका मतलब है कि दोनों को किसी ने नहीं मारा. जबकि ऐसे में ये जांच एजेंसी की ड्यूटी है कि वो हत्यारों का पता लगाए. याचिका में यह भी कहा गया है कि हाईकोर्ट आखिरी बार देखे जाने की थ्योरी पर विचार करने में नाकाम रहा है जबकि इस बात के ठोस सबूत थे कि घर में नूपुर तलवार और राजेश तलवार मरने वालों के साथ ही मौजूद थे.

इसकी पुष्टि के लिए उनके ड्राइवर उमेश शर्मा ने कोर्ट के सामने बयान भी दिए. हाईकोर्ट इस तथ्य पर भी विचार करने में नाकाम रहा कि ऐसा कुछ नहीं है जो ये दिखाता हो कि रात 9.30 के बाद कोई बाहरी घर में भीतर आया हो. इस बात का भी कोई मैटेरियल नहीं है कि कोई संदिग्ध परिस्थितियों में फ्लैट के आसपास दिखाई दिया हो.

15-16 मई 2008 की रात को ड्यूटी पर तैनात चौकीदार ने भी यही बयान दिए थे. याचिका में कहा गया है कि ट्रायल कोर्ट ने ये सही पाया था कि इतने कम वक्त में किसी के घर में घुसने का मौका नहीं था.

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12 अक्तूबर 2017 को हत्या केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट से आरुषि के पिता डॉ राजेश तलवार और मां डॉ नुपूर तलवार को बड़ी राहत मिली थी. हाईकोर्ट ने स्पेशल कोर्ट का फैसला पलटते हुए दोनों को बरी कर दिया था. ये फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि मौजूदा सबूतों के आधार पर तलवार दंपत्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. ऐसे सबूत हों तो सुप्रीम कोर्ट भी इतनी कठोर सजा नहीं सुनाता.

First published: 19 March 2018, 15:42 IST
 
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