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आरुषि-हेमराज हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसलाः तलवार दंपति को किया बरी

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 October 2017, 15:35 IST

देश की बहुचर्चित मर्डर मिस्ट्री आरुषि-हेमराज हत्याकांड में गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुना दिया है. इस मामले में सीबीआई कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए गए आरुषि के माता-पिता डॉ. नुपुर और राजेश तलवार को कोर्ट ने बरी कर तुरंत जेल से रिहा करने का फैसला सुनाया. तलवार दंपति की अपील पर इलाहाबाद कोर्ट में इस केस की सुनवाई चल रही थी.

हाईकोर्ट के जज न्यायमूर्ति एके मिश्रा ने अपने फैसले में कहा कि सबूतों के अभाव, जांच एजेंसियों की कार्रवाई में खामी के चलते दोनों की सजा वाजिब नहीं है. आज तक ऐसे किसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस तरह की सजा नहीं सुनाई है. संदेह के आधार पर तलवार दंपति को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए.

गौरतलब है कि सीबीआई की गाजियाबाद कोर्ट ने डॉ. तलवार दंपति को इस मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इन दोनों को कोर्ट ने आरुषि और उनके नौकर हेमराज के कत्ल का दोषी माना था. हम आपको बता दें कि डॉ. तलवार दंपति की बेटी आरुषि की हत्या नोएडा के जलवायु विहार के एल-32 फ्लैट में 15-16 मई 2008 की रात को हुई.

 

पुलिस को शुरुआत में नौकर हेमराज पर शक था लेकिन हेमराज की लाश दो दिन बाद उसी फ्लैट की छत पर बरामद हुई. उसके बाद इस केस में कई मोड़ आ गए. तलवार दंपति इस फैसले से पहले गाजियाबाद के डासना जेल में सजा काट रहे थे. तलवार दंपति की अपील पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 8 सितंबर को ही सुनवाई पूरी कर ली थी, लेकिन न्यायमूर्ति बीके नारायण और न्यायमूर्ति एके मिश्रा की खंडपीठ ने 12 अक्टूबर तक फैसला सुरक्षित रख लिया था.

आरुषि-हेमराज मिस्ट्री मर्डर केस की पूरी टाइमलाइन

16 मई 2008- पेशे से डेंटिस्ट राजेश तलवार की 14 साल की बेटी आरुषि और उनके घरेलू नौकर हेमराज की जलवायु विहार फ्लैट पर हत्या. आरुषि का गला कटा था.

17 मई 2008- छत से नौकर हेमराज की लाश बरामद हुई. 23 मई 2008- दोनों की हत्या के शक में आरुषि के पिता राजेश तलवार गिरफ्तार.

24 मई 2008- यूपी पुलिस ने राजेश तलवार को मुख्य अभियुक्त माना. 29 मई 2008- पूर्व सीएम मायावती ने सीबीआई जांच की सिफारिश की.

1 जून 2008- सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ली. 13 जून 2008 - डॉ राजेश तलवार के कम्पाउंडर कृष्णा को सीबीआई ने गिरफ्तार किया. तलवार के दोस्त दुर्रानी के नौकर राजकुमार और तलवार के पड़ोसी के नौकर विजय मंडल को भी बाद में गिरफ्तार किया. तीनों दोहरे हत्याकांड के आरोपी बने.

12 जुलाई 2008- सबूतों के अभाव में राजेश तलवार को रिहा किया गया. 12 सितंबर 2008 : कृष्णा, राजकुमार और विजय मंडल को लोअर कोर्ट से जमानत मिली. सीबीआई 90 दिन तक चार्जशीट फाइल नहीं कर सकी.

10 सितंबर 2009 आरुषि हत्याकांड की जांच के लिए सीबीआई की दूसरी टीम बनी. 9 फरवरी 2009- तलवार दम्पति पर हत्या का मुकदमा दर्ज.

29 दिसंबर 2010- 30 महीने तक चली जांच के बाद सीबीआई ने अदालत को क्लोजर रिपोर्ट सौंपी.

25 जनवरी 2011- राजेश तलवार ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ लोअर कोर्ट में प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल की.

9 फरवरी 2011- लोअर कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट खारिज की, आरुषि के मां-बाप, राजेश और नुपुर तलवार को हत्या और सुबूत मिटाने का दोषी माना.

21 फरवरी 2011- डॉ राजेश और नुपुर तलवार ट्रायल कोर्ट के समन को रद्द करवाने हाइकोर्ट गए.

18 मार्च 2011 - हाईकोर्ट ने समन रद्द करने की तलवार की गुजारिश खारिज की और उन पर कार्यवाही शुरू करने को कहा.

19 मार्च 2011 : तलवार दंपति सुप्रीम कोर्ट गए, जिसने उनके खिलाफ ट्रायल को स्टे कर दिया.

6 जनवरी 2012- सुप्रीम कोर्ट ने तलवार दंपति की अर्ज़ी खारिज की और उनके खिलाफ ट्रायल शुरू करने की इजाजत दी.

25 नवंबर 2013- तलवार दंपति को गाज़ियाबाद की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने दोषी पाया और उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई.

जनवरी 2014- तलवार दंपति ने सीबीआई कोर्ट के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी.

11 जनवरी 2017- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलवार दंपति की अपील पर फैसला सुरक्षित रखा.

1 अगस्त 2017- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि तलवार की अपील दोबारा सुनेंगे क्योंकि सीबीआई के दावों में विरोधाभास है.

8 सितंबर 2017 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरुषि-हेमराज हत्याकांड में फैसला सुरक्षित किया.

12 अक्टूबर 2017: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरुषि-हेमराज हत्याकांड में तलवार दंपति को कातिल नहीं माना

First published: 12 October 2017, 15:12 IST
 
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