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आरुषि-हेमराज हत्याकांड: मर्डर मिस्ट्री केस की पूरी टाइमलाइन

हेमराज सिंह चौहान | Updated on: 12 October 2017, 11:00 IST

देश की चर्चित मर्डर मिस्ट्री आरुषि-हेमराज हत्याकांड में गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट फैसला सुना सकता है. इस मामले में सीबीआई कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए गए आरुषि के माता-पिता राजेश-नुपुर तलवार की अपील पर इलाहाबाद कोर्ट में केस चल रहा है.

सीबीआई की गाजियाबाद कोर्ट ने डॉ तलवार दंपति को इस मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी. कोर्ट का फैसला दोपहर दो बजे तक आ सकता है. गुरुवार को होने वाली सुनवाई में कोर्ट ये तय कर सकती है कि आरुषि-हेमराज के हत्यारे कौन हैं? उनकी हत्या राजेश और नुपूर तलवार ने की या फिर वो बेकुसूर हैं.

डॉ तलवार दंपती की बेटी आरुषि की हत्या नोएडा के जलवायु विहार के एल-32 फ्लैट में 16 मई 2008 को हुई. पुलिस को शुरुआत में नौकर हेमराज पर शक था लेकिन हेमराज की लाश दो दिन बाद उसी फ्लैट की छत पर बरामद हुई. उसके बाद इस केस में कई मोड़ आ गए.

आरुषि-हेमराज मिस्ट्री मर्डर केस की पूरी टाइमलाइन

16 मई 2008- पेशे से डेंटिस्ट राजेश तलवार की 14 साल की बेटी आरुषि और उनके घरेलू नौकर हेमराज की जलवायु विहार फ्लैट पर हत्या. आरुषि का गला कटा था.

17 मई 2008- छत से नौकर हेमराज की लाश बरामद हुई.

23 मई 2008- दोनों की हत्या के शक में आरुषि के पिता राजेश तलवार गिरफ्तार.

24 मई 2008- यूपी पुलिस ने राजेश तलवार को मुख्य अभियुक्त माना.

29 मई 2008- पूर्व सीएम मायावती ने सीबीआई जांच की सिफारिश की.

1 जून 2008- सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ली.

13 जून 2008 - डॉ राजेश तलवार के कम्पाउंडर कृष्णा को सीबीआई ने गिरफ्तार किया. तलवार के दोस्त दुर्रानी के नौकर राजकुमार और तलवार के पड़ोसी के नौकर विजय मंडल को भी बाद में गिरफ्तार किया. तीनों दोहरे हत्याकांड के आरोपी बने.

12 जुलाई 2008- सबूतों के अभाव में राजेश तलवार को रिहा किया गया.

12 सितंबर 2008 : कृष्णा, राजकुमार और विजय मंडल को लोअर कोर्ट से जमानत मिली. सीबीआई 90 दिन तक  चार्जशीट फाइल नहीं कर सकी.

10 सितंबर 2009 आरुषि हत्याकांड की जांच के लिए सीबीआई की दूसरी टीम बनी.

9 फरवरी 2009- तलवार दम्पति पर हत्या का मुकदमा दर्ज.

29 दिसंबर 2010- 30 महीने तक चली जांच के बाद सीबीआई ने अदालत को क्लोजर रिपोर्ट सौंपी.

25 जनवरी 2011- राजेश तलवार ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ लोअर कोर्ट में प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल की.

9 फरवरी 2011- लोअर कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट खारिज की, आरुषि के मां-बाप, राजेश और नुपुर तलवार को हत्या और सुबूत मिटाने का दोषी माना.

21 फरवरी 2011- डॉ राजेश और नुपुर तलवार ट्रायल कोर्ट के समन को रद्द करवाने हाइकोर्ट गए.

18 मार्च 2011 - हाईकोर्ट ने समन रद्द करने की तलवार की गुजारिश खारिज की और उन पर कार्यवाही शुरू करने को कहा.

19 मार्च 2011 : तलवार दंपति सुप्रीम कोर्ट गए, जिसने उनके खिलाफ ट्रायल को स्टे कर दिया.

6 जनवरी 2012- सुप्रीम कोर्ट ने तलवार दंपति की अर्ज़ी खारिज की और उनके खिलाफ ट्रायल शुरू करने की इजाजत दी.

25 नवंबर 2013- तलवार दंपति को गाज़ियाबाद की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने दोषी पाया और उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई.

जनवरी 2014- तलवार दंपति ने सीबीआई कोर्ट के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी.

11 जनवरी 2017- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलवार दंपति की अपील पर फैसला सुरक्षित रखा.

1 अगस्त 2017- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि तलवार की अपील दोबारा सुनेंगे क्योंकि सीबीआई के दावों में विरोधाभास है. 

8 सितंबर 2017 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरुषि-हेमराज हत्याकांड में फैसला सुरक्षित किया. 

First published: 12 October 2017, 11:00 IST
 
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