Home » इंडिया » abdul basit message is clear, pakistan army consider india as enemy
 

'पाकिस्तानी सेना और सरकार ने भारत की कमजोरी भांप ली है'

विवेक काटजू | Updated on: 9 April 2016, 9:28 IST

पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित के गुरुवार को भारत-पाकिस्तान संबंध पर दिए गए बयान से साफ हो गया है कि पाकिस्तानी सेना भारत के साथ शांति नहीं चाहती. पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों ने इस बाबत पहले भी कई खुले संकेत और संदेश दिए थे. ऐसा आखिरी संदेश इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के डायरेक्टर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल असीम बाजवा ने 29 मार्च को दिया था. 

उनका संदेश सीधे भारतीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के लिए था. अब बासित ने खुलकर पठानकोट हमले, दोनों देशों की बीच शांति वार्ता और आतंकवादी मसहूद अज़हर पर भारत के आधिकारिक रुख का विरोध किया है.

पढ़ेंः पाकिस्तान उच्चायुक्त ने कहा भारत के साथ शांति वार्ता स्थगित

आश्चर्य की बात है कि भारतीय अधिकारी ये दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि बासित अनाधिकारिक तौर पर बोल रहे थे और पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के पहले दिए गए विचार उनसे अलग हैं. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के पाकिस्तान दौरे के समय दोनों देशों के बीच समग्र द्विपक्षीय बातचीत पर सकारात्मक रुख दिखाया था.

बासित अनुभवी राजनयिक हैं इसलिए उनके बयान को तवज्जो देनी चाहिए. ऐसा भी नहीं है कि बासित भारत के लिए नए हैं. उन्होंने बहुत साफ शब्दों में कहा इन मामलों पर पाकिस्तानी रुख को स्पष्ट कर दिया.

बातचीत की शुरुआत


भारत की पहल पर बैंकॉक में दोनों देशों के सुरक्षा सलाहकारों के बीच बैठक हुई. उसके बाद सुषमा स्वराज और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पाकिस्तान गए.

जनवरी के पहले हफ्ते में भारत के पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले से नरेंद्र मोदी की पहला को पहला बड़ा झटका लगा. इसके बाद दोनों देशों के बीच के रिश्ते सामान्य बनाने की पाकिस्तान की मंशा पर संदेह जताया जाने लगा.

नरेंद्र मोदी सरकार के पाकिस्तान के साथ शांति वार्ता के प्रयासों पर अब्दुल बासित के बयान ने पानी फेर दिया

भारत ने उसके बाद भी दोनों देशों के सुरक्षा सलाहकारों पर भरोसा जताया कि वो मामले को सही रास्ते पर ले आएंगे. कहा जा रहा था कि पाकिस्तानी सुरक्षा सलाहकार सेना के रिटायर्ड जनरल हैं इसलिए उन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए. माना जा रहा था कि उनके विचार पाकिस्तानी सेना के बदले हुए रवैये के प्रतिबिंब हैं. ये रवैया तब भी पुष्ट होता प्रतीत हुआ जब जंजुआ ने डोभाल क सूचित किया कि 10 आतंकवादी भारत में गुजरात के रास्ते घुसे हैं.

पाठनकोट और जेआईटी


पठानकोट हमले के बाद पाकिस्तान ने ज्वाइंट इन्वेस्टिगेशन टीम (जेआईटी) का गठन किया. भारत को आश्वासन दिया गया कि पाकिस्तान पठानकोट हमले को लेकर बेहद गंभीर है. इसके बाद भारत ने जेआईटी को इस शर्त के साथ भारत में जांच का अवसर दे दिया कि भारतीय जांच दल को पाकिस्तान जाकर जांच करने का मौका दिया जाएगा.

पढ़ेंः 2015 में फांसी की सजा में 50% बढ़ोत्तरी हुई, ईरान टॉप पर

पाकिस्तानी जेआईटी को भारत में जांच का अवसर देकर भारत सरकार ने कोई गलत कदम नहीं उठाया था. लेकिन भला भारत ने ये उम्मीद कैसे कर ली कि पाकिस्तान भारतीय जांच दल को वहां जाकर जांच करने देगा? बहरहाल जो भी हुआ हो, बासित के बयान ने भारत की योजना पर ठंडा पानी डाल दिया है.

पाकिस्तान की रणनीति


बासित के बयान पर हैरान होने की जरूरत नहीं है. बासित ने चीन द्वारा मसूद अज़हर को संयुक्त राष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किए जाने के खिलाफ वीटो करने पर जो बयान दिया वो भी नया नहीं था. चीन के कार्रवाई को समर्थन करने के अलावा बासित के पास कोई विकल्प नहीं था.

भारत को ये समझना होगा कि मसूद अज़हर और उनका आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का पाकिस्तानी सेना से बहुत मधुर संबंध भले ही न हो, पाकिस्तानी कूटनीति में उसकी एक विशेष भूमिका है.

फिलहाल पाकिस्तान कुलभूषण जाधव की गिरफ्तारी का पूरा फायदा उठा लेना चाहता है. उसे इस बात से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता की अंतरराष्ट्रीय समुदाय में उसकी बात पर बहुत कम लोग यकीन करते हैं.

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्या बदलेंगे अपनी पाकिस्तान नीति या करेंगे एक और प्रयास?

पाकिस्तान लगातार ये दावा करता रहा है कि भारत कराची और बलूचिस्तान में आतंकवादी को बढ़ावा देता है. इसमें कोई शक़ नहीं है कि जाधव पर पाकिस्तानी अदालत में मुकदमा चलेगा और इसका खूब प्रचार किया जाएगा. इसलिए अब पाकिस्तान समग्र द्विपक्षीय वार्ता में कोई रुचि नहीं रही. बासित की प्रेस वार्ता का यही मूल संदेश था.

मोदी और उनके सलाहकारों ने पाकिस्तान की तरफ हाथ बढ़ाकर जोखिम उठाया था. रूस के उफा में दोनों देशों की तरफ से जारी संयुक्त बयान में भारत ने लचीलापन दिखाया जिसके बाद बैंकॉक में बैठक संभव हुई. भारत में कई लोगों ने माना कि इससे पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों की नजर में मोदी की छवि कमजोर प्रधानमंत्री की बनी है.

पाकिस्तानी जेआईटी ने पठानकोट हमले को भारत का नाटक कहा

अब ये साफ हो गया है कि बैंकॉक में जो वादे किए गए थे वो झूठे थे. पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी भारत को अपना दुश्मन ही समझते हैं और उनका रुख अभी नहीं बदलने वाला है.

ऐसे में अब सवाल ये है कि मोदी को क्या इस दिशा में और प्रयास करना चाहिए या फिर नई पाकिस्तानी नीति पर विचार करना शुरू कर देना चाहिए.

First published: 9 April 2016, 9:28 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी