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हरियाणा सेंट्रल यूनिवर्सिटी: क्या महाश्वेता देवी को बीजेपी की श्रद्धांजलि महज़ दिखावा थी?

शाहनवाज़ मलिक | Updated on: 1 October 2016, 2:26 IST
QUICK PILL
  • सेंट्रल यूनिवर्सिटी हरियाणा में मशहूर लेखिका महाश्वेता देवी की एक कहानी द्रोपदी का मंचन करने की वजह से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने इसे राष्ट्र विरोधी गतिविधि करार दिया है.
  • उप कुलपति आरसी कुहाड़ ने आयोजन करने वाले शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जाने करने के अलावा एक छह सदस्यीय जांच समिति भी गठित की है.
  • माना जा रहा है कि एबीवीपी और संघ का दबाव बढ़ने की वजह से विश्वविद्यालय प्रशासन जांच समिति गठित करने के लिए मजबूर हुआ है.

'भारत ने एक महान लेखिका खो दी है. बंगाल ने एक महान मां को खोया है. मैंने अपना एक मार्गदर्शक खो दिया है.' यह वाक्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर प्राख्यात बांग्ला लेखिका महाश्वेता देवी को दी गई श्रद्धांजलि में लिखा था.

प्रधानमंत्री के अलावा वित्त मंत्री अरुण जेटली, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत साहित्य और फिल्म जगत की तमाम हस्तियों ने भी महाश्वेता देवी पर शोक संदेश जारी किए थे.

90 साल की उम्र में बांग्ला की साहित्यकार महाश्वेता देवी का निधन 28 जुलाई को हुआ था. देश के अलग-अलग हिस्सों में महाश्वेता के चाहने वाले अभी भी उनकी कहानियों का पाठ और साहित्यिक मंचन कर उन्हें याद कर रहे हैं.

इसी कड़ी में 21 सितंबर को महेंद्रगढ़ स्थित केंद्रीय यूनिवर्सिटी, हरियाणा के अंग्रेज़ी विभाग ने उनकी कहानी द्रौपदी का साहित्यिक मंचन किया था. अब इस नटक के मंचन को कुछ लोग राष्ट्रविरोधी गतिविधि करार दे रहे हैं.

नाटक के आयोजक सेंट्ल यूनिवर्सिटी के शिक्षक हैं जिनपर देशद्रोह का मुक़दमा दर्ज करने के लिए पुलिस में तहरीर दी गई है. एबीवीपी ने पूर्व सैनिकों और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर कई राउंड विरोध प्रदर्शन आयोजित किया और यूनिवर्सिटी के ऊपर दबाव बनाया.

जांच समिति ने किया दौरा

इस दबाव के चलते यूनिवर्सिटी प्रशासन ने नाटक का मंचन आयोजित कराने वाले अपने कुछ शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है. साथ ही यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आरोपों की जांच के लिए एक छह सदस्यीय कमेटी का गठन भी किया है. इस कमेटी में ख़ुद उप कुलपति आरसी कुहाड़ भी शामिल हैं.

गुरुवार को पहली बार जांच कमेटी ने यूनिवर्सिटी का दौरा किया था लेेकिन आयोजकों में से एक स्नेहसता के मुताबिक अभी तक उनसे कोई पूछताछ नहीं हुई है.

हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में हंगामा महाश्वेता देवी की एक कहानी द्रौपदी के साहित्यिक मंचन के बाद शुरू हुआ है. हंगामा शुरू करने वाले एबीवीपी ने बाक़ायदा बयान जारी कर कहा, 'वर्तमान परिस्थिति में विश्वविद्यालय प्रशासन को यह उत्तर देना पड़ेगा कि आख़िर किस उद्देश्य से इस कार्यक्रम का आयोजन हुआ. एक संदेह भी उठता है कि यह कार्यक्रम प्रायोजित हो सकता है.'

सेना का मनोबल तोड़ने वाला नाटक

एबीवीपी दिल्ली की उपाध्यक्ष ममता त्रिपाठी का आरोप है कि इस नाटक में सेना को बलात्कारी, अत्याचारी और हत्यारा दिखाने की कोशिश की गई है. ऐसे समय में जब सीमा पर तनाव है तो इस प्रकार के नाटक उनका मनोबल तोड़नेे का काम करते हैं. इस नाटक को गलत समय पर आयोजित किया जा रहा है.

इस प्रोग्राम के आयोजकों में से एक अंग्रेज़ी एवं विदेशी भाषा विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर स्नेहसता कहती हैं, 'नाटक के मंचन का फ़ैसला 28 अगस्त को हुआ था. शिक्षकों और छात्रों ने एक महीने तक इसके लिए रिहर्सल किया था.

उप कुलपति आरसी कुहाड़, डीन और विभागाध्यक्ष संजीव यादव से प्रोग्राम के लिए लिखित अनुमति मिली थी. विश्वविद्यालय ने ज़रूरी ख़र्च के लिए 10 हज़ार की राशि भी स्वीकृत की थी. लिहाज़ा, कार्रवाई तो उनपर होनी चाहिए जो यूनिवर्सिटी में चल रही अकादमिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में अड़चन पैदा कर रहे हैं.'

एबीवीपी और भगवा संगठनों के अलावा महेंद्रगढ़ से कांग्रेस के पूर्व विधायक दान सिंह ने भी 30 सितंबर को विश्वविद्यालय के गेट पर पहुंचकर प्रदर्शन किया है. शिक्षक राकेश मीणा के मुताबिक उन्होंने भी इस मंचन को देशद्रोही गतिविधि करार देते हुए शिक्षकों पर कार्रवाई की मांग की है.

ऐसे नाटक अनगिनत बार रोके जा चुके हैं

महाश्वेता देवी पर काम कर चुके वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश कहते हैं, 'महाश्वेता देवी या उनके जैसा लेखन करने वालों के कार्यक्रम में बाधा पहुंचाने की अनगिनत घटनाएं हैं. ख़ुद मैं गोरखपुर से बनारस तक कई घटनाओं का गवाह हूं.

अभी केंद्रीय विश्वविद्यालय, हरियाणा में जो हो रहा है, वह दुर्भाग्यपूर्ण नहीं शर्मनाक है. मुझे याद है कि जब एक महान लेखिका, विचारक का निधन हुआ तो देश के विभिन्न राजनीतिक दलों ने शोक और श्रद्धांजलि दी थी. मगर ऐसा लगता है कि ये सब महज़ कर्मकांड था. उनके विचार और दर्शन से ऐसा लगता है कि समाज की फ़ासीवादी ताक़तों को उनसे चिढ़ है, नफरत है.'

उर्मिलेश आगे कहते हैं, 'महाश्वेता देवी एक बेहतर भारत का सपना देखने वाली लेखिका रही हैं. जहां लोगों के बीच सामाजिक और आर्थिक स्तर पर एक बराबरी हो, आदिवासियों और अन्य उत्पीड़ित को संविधान निर्माताओं के सपनों के मुताबिक जीने और काम करने की आज़ादी मिले.

लिहाज़ा, ऐसे में जो भी लोग महाश्वेता देवी की किसी रचना पर आधारित नाटक को रोकने या अड़चन पैदा करने की कोशिश कर रहे थे, मैं समझता हूं कि जो हमारा लोकतांत्रिक संविधान है, आज़ादी की लड़ाई के दौरान हमारा जो राष्ट्रीय संकल्प रहा है, उसे हर कीमत पर रौंदना चाहते हैं. इस तरह का काम सिर्फ निरंकुश तानाशाह या फासीवादी शक्तियां ही कर सकती हैं.'

विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में महाश्वेता की तीन कहानियां

महाश्वेता देवी की ज़िंदगी का बड़ा हिस्सा आदिवासियों के बीच काम करते हुए गुज़रा है. इसकी छाप उनके साहित्यिक लेखन पर साफ दिखती है. उन्हें 1986 में पद्मश्री, 1996 में ज्ञानपीठ, 1997 में रमन मैग्सेसे और 2006 में पदम विभूषण पुरस्कार के अलावा भी कई महत्वपूर्ण सम्मान मिल चुके हैं.

नक्सलबाड़ी आंदोलन की पृष्ठभूमि में लिखे गए उनके उपन्यास 'हज़ार चौरासी की मां' पर चर्चित फिल्म भी बन चुकी है. स्नेहसता कहती हैं कि महाश्वेता देवी का साहित्य बाहर के विश्वविद्यालयों में अलग-अलग भाषाओं में पढ़ाया जाता है. ख़ुद केंद्रीय विश्वविद्यालय, हरियाणा में उनकी तीन कहानियां पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं. बावजूद इसके उन्हें देश की साहित्यिक संपदा मानने की बजाय उनकी रचनाओं पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं.

आयोजकों पर अभी तक हुई कार्रवाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के विरोध प्रदर्शन और उनकी मांग के आधार पर की गई है. महेंद्रगढ़ के हिंदी अख़बारों के स्थानीय संस्करणों की रिपोर्ट भी कहीं ना कहीं एबीवीपी के सुर में सुर मिलाती दिखती हैं. यूनिवर्सिटी प्रशासन ने भी माना है कि उन्हें कार्रवाई एबीवीपी और मीडिया के दबाव में करनी पड़ रही है.

यूनिवर्सिटी पर पहला हमला नहीं

26 मई 2014 को केंद्र में बीजेपी की सरकार आने के बाद से देशभर के विश्वविद्यालयों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की अति सक्रियता देखने को मिली है. केंद्रीय विश्वविद्यालय, हरियाणा से पहले हैदराबाद और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में भी संगठन बड़े विवाद का हिस्सा रह चुका है. अन्य विश्वविद्यालयों में भी एबीवीपी ने कई कार्यक्रमों को सीधे तौर पर रोका है. इसमें इलाहाबाद यूनिवर्सिटी भी है जहां कि छात्रसंघ अध्यक्ष ने एबीवीपी के पदाधिकारियों पर खुद पर जानलेवा हमले करवाने का आरोप लगाया.

First published: 1 October 2016, 2:26 IST
 
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