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85 भर्तियों के मामले में दिल्ली महिला आयोग अध्यक्ष स्वाति मालीवाल के खिलाफ एसीबी ने किया मामला दर्ज

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 September 2016, 11:41 IST

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने मामला दर्ज किया है. 85 लोगों को फर्जी तरह से आयोग में भर्ती करने के आरोप में एसीबी ने उनपर प्रीवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करवाया है.

एसीबी प्रमुख मुकेश मीणा ने इस बात की पुष्टि की. मालीवाल के खिलाफ प्रीवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट 13, 409 आईपीसी 120B के तहत एफआईआर दर्ज की गई है. सोमवार को एसीबी के अधिकारियों द्वारा गैर-कानूनी भर्ती के आरोपों को लेकर मालीवाल से पूछताछ की गई थी. 

जानकारी के मुताबिक सोमवार सुबह एसीबी के पांच अधिकारी दिल्ली महिला आयोग के दफ्तर पहुंचे और उन्होंने स्वाति मालीवाल से पूछताछ के अलावा एक सूची सौंपी. मालीवाल को 27 सवालों की एक सूची सौंपते हुए इनके जवाब एक सप्ताह में देने के लिए कहा गया.

गौरतलब है कि दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष और कांग्रेसी नेता बरखा शुक्ला सिंह द्वारा दी गई शिकायत के बाद एसीबी ने यह जांच शुरू की थी. बरखा का दावा है कि आम आदमी पार्टी के कई समर्थकों को आयोग में पद दिया गया है. उन्होंने 85 लोगों के नाम सौंपते हुए आरोप लगाया कि आयोग में 85 फीसदी संविदा कर्मचारी आप पार्टी से संबंध रखते हैं.

उधर, इन फर्जी भर्तियों के संबंध में सवाल पूछे जाने पर मालीवाल ने कहा, "हमनें नियुक्तियां की हैं, सही बात है. सभी नियुक्तियां प्रक्रिया के तहत की गई हैं." मालीवाल ने मीडिया से कहा कि हमसे 27 सवाल पूछे गए हैं, जिनका जवाब हमें एक सप्ताह के भीतर देने को कहा गया है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि हमसे पूछा गया है कि हम इतना काम क्यों कर रहे हैं. सच्चाई यह है कि पिछले एक साल में हमने 11,500 मामलों पर काम किया है और 181 नंबर पर आईं दो लाख से भी अधिक फोन कॉल पर कार्रवाई की है.

मालीवाल ने कहा, जबकि शिकायतकर्ता (बरखा सिंह) ने अपने आठ साल के कार्यकाल में केवल एक मामले पर काम किया था. उन्होंने कहा कि एक ऐसे शहर में, जहां हर रोज 'निर्भया' जैसी घटना घट रही है, डीसीडब्ल्यू ऐसे सवाल उठा रहा है. उन्हें इसी से परेशानी हो रही है. सभी नियुक्तियां कानूनी तरीके से और डीसीडब्ल्यू की प्रक्रिया के अनुसार की गई हैं.

मालीवाल ने सवाल उठाया कि बरखा सिंह से पूछताछ क्यों नहीं की जा रही, जब उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान आईपीएस और आईएएस अधिकारियों की पत्नियों को नियुक्त किया था, जबकि उनके कार्यकाल में केवल एक मामले पर ही काम किया गया.

First published: 20 September 2016, 11:41 IST
 
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