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जाति को साध कर यूपी को साधेंगे राहुल गांधी

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 July 2016, 7:58 IST
(कैच न्यूज)

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की आगामी 29 जुलाई को लखनऊ में होने वाली पदयात्रा और कार्यकर्ता सम्मेलन को जिला प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से अनुमति नहीं दी है. अनुमति न मिलने की वजह से कांग्रेस ने कार्यक्रम स्थगित कर दिया है.

अब राहुल गांधी अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार लखनऊ तो आएंगे पर वो कार्यकर्ताओं से सिर्फ संवाद करने के बाद दिल्‍ली वापस लौट जाएंगे.

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यूपी कांग्रेस में भारी फेरबदल के बाद राहुल गांधी का यह पहला लखनऊ दौरा था. इसके तहत प्रदेश पदाधिकारियों के साथ राहुल गांधी को राजभवन तक पदयात्रा करनी थी. जानकारों के मुताबिक पदयात्रा के बाद माल एवेन्‍यू स्थित प्रदेश मुख्‍यालय में कांग्रेस के राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष को पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के कार्यक्रम में भी शामिल होना था.

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बदले हुए कार्यक्रम के मुतबिक अब राहुल गांधी 29 जुलाई को लखनऊ आने के बाद रमाबाई आंबेडकर मैदान में कार्यकर्ताओं से संवाद स्‍थापित करेंगे और फि‍र वापस दिल्ली लौट जाएंगे.

कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यदेव त्रिपाठी के मुताबिक अब राहुल गांधी 29 जुलाई को लखनऊ स्थित रमाबाई आंबेडकर मैदान में प्रदेश भर के चुनिन्दा 50 हजार कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे. इस कार्यक्रम की तैयारियां जोरों पर हैं.

चेतना यात्रा में जातीय जोड़तोड़

एक साथ कई मोर्चे पर हाथ-पैर मार रही कांग्रेस ने इसी दौरान चेतना रैली भी उत्तर प्रदेश में निकाली. इस यात्रा में के जरिए कांग्रेस की जातीय समीकरणों को साधने की रणनीति साफ दिखाई दी.

हालांकि कांग्रेस जातिगत राजनीति के लिए सपा और बसपा को हमेशा जिम्मेदार ठहराती रही है, पर उत्तर प्रदेश की चुनौती से पार पाने के लिए अब कांग्रेस भी उसी फार्मूले पर काम कर रही है. चेतना यात्रा में उन सभी जातियों के नेताओं को आगे रखा गया है जो प्रदेश की सियासत को प्रभावित करती हैं.

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राज बब्बर ने इन नेताओं को जहां कार्यकर्ता और जनता के बीच एक हीरो की तरह पेश किया वहीं उनका परिचय भी जातिगत आधार पर कराया गया. चेतना यात्रा के दौरान राज बब्बर से लेकर गुलाम नबी आजाद समेत सभी दिग्गजों ने प्रदेश की सियासत को धर्म के आधार पर बांटने का आरोप लगाते हुए भाजपा पर निशाना साधा.

दरअसल कांग्रेस को यूपी के जातीय समीकरण ही बेचैन कर रहे हैं. इसी रणनीति के तहत उसने दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को प्रदेश का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है. राज बब्बर को पार्टी ओबीसी नेता के रूप में प्रचारित कर रही है.

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उत्तर प्रदेश में जाति के चक्रव्यूह को भेदने के लिए प्रशांत किशोर और उनकी टीम कड़ी मेहनत कर रही है. उनके साथ पुराने कांग्रेसी भी लगे हुए हैं. हालांकि सफलता मिलेगी या नहीं यह तय नहीं.

जनसभा बदली जातिपरिचय सभा में

मंगलवार को कानपुर में यात्रा के समापन के साथ ही उसके साथ चल रहे कांग्रेस के दिग्गजों का परिचय बाकायदा उनकी जातियों के आधार पर कराया गया. शहर के घंटाघर में हुई जनसभा के दौरान भीड़ का मिजाज देखकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर ने बारी-बारी से मंच पर बैठे सभी नेताओं का परिचय जाति और उनके काम के आधार पर कराया.

मसलन पीएल पूनिया दलित समाज से आते हैं, दलितों के लिए उन्होंने लंबी लड़ाई लड़ी है. अब भी उनकी लड़ाई जारी हैं. राजाराम पाल, प्रमोद तिवारी, विरेंद्र सिंह, जफर अली नकवी समेत सभी नेताओं का परिचय भी तर्ज पर करवाया गया. राज बब्बर ने सभी नेताओं की तरफ इशारा करते हुए कांग्रेस का गुलदस्ता बताया. उनके मुताबिक कांग्रेस हाईकमान ने हर वर्ग को तवज्जो दी है.

छिटके वोटरों को जोड़ने की जुगत

कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती जातीय सियासत है. यूपी की सियासत में जातीय समीकरण कांग्रेस की नींद हराम किए हुए है. कांग्रेस का परंपरागत वोट (ब्राह्मण, दलित, मुस्लिम) अब छिटक कर दूसरी पार्टियों के पास जा चुका है. ऐसे में इन वोटरों को दोबारा कांग्रेस की तरफ लाने के लिए कांग्रेस जीतोड़ कोशिश कर रही है. उनका साथ देने के लिए प्रशांत किशोर की टीम भी पीछे से लगी हुई है.

पूर्व सांसद राजाराम पाल का इस संबंध में कहना है, 'यूपी में कांग्रेस के सामने सिर्फ एक ही चुनौती है और वो है जातिगत सियासत. इससे पार कैसे पाया जाए इस पर मंथन हो रहा है. उम्मीद है कि 2017 के चुनाव से पहले हम ऐसी रणनीति तैयार कर लेंगे जिससे इस प्रदेश की जनता जाति-धर्म के बजाए विकास परक मुद्दों पर वोटिंग करे.'

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सभा में ही इस बात पर भी रणनीति बनी कि प्रदेश कांग्रेस के चार बड़े नेता राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी रैलियां करेंगे. कांग्रेस के कानपुर जिला अध्यक्ष हरिप्रकाश अग्निहोत्री ने बताया कि अगस्त महीने से यूपी के चार नेता जिनमें से प्रमोद तिवारी, संजय सिंह, गुलाम मसूद, जफरअली नकवी पांच बड़ी जनसभा को संबोधित करेंगे.

गुलाम मसूद को मुस्लिम मतदाताओं को पार्टी से जोड़ने का काम सौंपा गया है. इसी तरह वरिष्ठ कांग्रेसी नेता प्रमोद तिवारी को बांदा, फतेहपुर और हमीरपुर जिले में रैलियां करने को कहा गया है. राजाराम पाल नेताजी यानी मुलायम सिंह यादव के गढ़ में सेंधमारी करेंगे. इसके लिए राजाराम पाल एक सप्ताह में कई बार सपा के गढ़ मैनपुरी, इटावा, कन्नौज और फर्रुखाबाद का दौरा कर चुके हैं.

First published: 29 July 2016, 7:58 IST
 
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