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विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा के 'अच्छे दिन'

पाणिनि आनंद | Updated on: 10 February 2017, 1:50 IST

फरवरी 2015 के दिल्ली विधान सभा चुनाव के नतीजों के बाद अमित शाह के चेहरे से जो चैन और मुस्कान गायब हुई थी, वह अब वापस आ गयी है. चार राज्य विधानसभा चुनावों के नतीजों ने भाजपा के लिए ‘अच्छे दिन’ फिर से लौटा दिए हैं, जो पिछले एक साल से अधिक समय से खो गये थे.

भाजपा इन नतीजों से खुश है और ये पार्टी के लिए ऐतिहासिक भी हैं. पार्टी के इतिहास में पहली बार इसे असम में बहुमत मिला है और यह अपने दम पर सरकार बनाने में कामयाब हुई है. हालांकि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने यह साफ किया है कि वे एनडीए की सरकार बनाने के लिए और राज्य के विकास की खातिर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

असम में पार्टी की जीत भाजपा के लिए बड़ी राहत लेकर आई है क्योंकि दिल्ली और बिहार जैसे राज्यों में हार से इसका मनोबल काफी टूटता हुआ दिख रहा था.

क्या है गणित

भाजपा को पश्चिम बंगाल में तीन और केरल में एक सीट जीतने में सफलता मिली है. अगर पश्चिम बंगाल में हुए उपचुनावों में भाजपा को एक सीट पर मिली जीत को छोड़ दिया जाये, तो इन दोनों राज्यों में पार्टी ने पहली बार खाता खोला है. हालांकि, जो बात अहम है वह यह कि इन राज्यों में पिछले दो चुनावों में पार्टी के मत प्रतिशत में शानदार उछाल आया है.

साल 2011 के विधान सभा चुनावों में पश्चिम बंगाल में भाजपा को 4.06 फीसदी वोट मिले थे. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में एनडीए को 16.8 फीसदी वोट मिले थे, जबकि इस बार इसे 10.2 फीसदी वोट हासिल हुए हैं.

इसी तरह, केरल में साल 2011 में भाजपा एक भी सीट नहीं जीत सकी थी, लेकिन इसे 6.03 फीसदी वोट मिले थे. साल 2014 में भी इसे एक भी संसदीय सीट पर सफलता नहीं मिली, लेकिन इसका मत प्रतिशत बढ़ कर 10.33 फीसदी हो गया.

भारतीय जनता पार्टी अब एक अखिल भारतीय पार्टी है. अभेद्य किलों पर भी अब पार्टी का झंडा लहरा है

इस चुनाव में इन्हें एक सीट मिली है और मत प्रतिशत 10.6 फीसदी रहा है. असम में, भाजपा को 2011 में 11.47 फीसदी वोट और पांच सीटें मिली थीं. साल 2014 में इसे 14 में से सात संसदीय सीटों पर सफलता मिली थी और मत प्रतिशत बढ़ कर 36.5 फीसदी हो गया था. इस विधानसभा चुनाव में भाजपा को अकेले ही 30 फीसदी वोट मिले हैं.

हाल के वर्षों तक इन राज्यों में भाजपा के लिए पैठ बनाना काफी मुश्किल रहा था, लेकिन बढ़े मत प्रतिशत और जीती हुई सीटों को देखते हुए यह लगता है कि भाजपा ने इन राज्यों में मजबूत जनाधार बनाने में सफलता हासिल कर ली है.

भारतीय जनता पार्टी अब एक अखिल भारतीय पार्टी है. अभेद्य किलों पर भी अब पार्टी का झंडा लहरा है, इसीलिए पार्टी इन नतीजों से काफी खुश है.

सही रणनीति

तो सवाल यह है कि आखिर किस वजह से पार्टी के लिए अच्छे दिन आ गये हैं क्योंकि इसी नेतृत्व और इन्हीं प्रबंधकों के साथ पार्टी को बिहार और दिल्ली में काफी खराब नतीजों से दो-चार होना पड़ा था.

कैबिनेट मंत्री रवि शंकर प्रसाद बताते हैं, “इन राज्यों के लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी के विजन और उनके प्रदर्शन के लिए वोट दिया है. नतीजों से पता चलता है कि सरकार न चलने देने के विपक्ष के एजेंडे को लोगों ने खारिज कर दिया है और विकास और मोदी जी के कामों को अपना समर्थन दिया है.”

लेकिन अगर हम दिल्ली और बिहार के चुनावों को देखें, तो यह तर्क गले नहीं उतरता, क्योंकि इन राज्यों में मोदी और पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने काफी विस्तृत चुनाव अभियान चलाया.

क्षेत्रीय नेतृत्व को मौका दिया, स्थानीय मुद्दों को उठाया. इन मसलों को केंद्रीय नेतृत्व से अलग रखा

पार्टी के एक बड़े नेता बताते हैं, “हमने क्षेत्रीय नेतृत्व को मौका दिया. हमने इस बार उन्हें सामने रखा और स्थानीय मुद्दों को उठाया. इन मसलों को केंद्रीय नेतृत्व की सोच के साथ मिला कर पेश करने की कोशिश नहीं की. इस रणनीति ने काम किया. हमने बिहार और दिल्ली से यह सीखा और इसने इस बार पार्टी के पक्ष में बेहतरीन तरीके से काम किया.”

मोदी ने इन राज्यों में कम रैलियां की और पार्टी अध्यक्ष शाह ने भी. इसकी वजह से राज्य में पार्टी के कर्ताधर्ताओं पर अधिक बोझ नहीं पड़ा और वे प्रधानमंत्री और अन्य लोगों की रैलियों की तैयारियों में लगे रहने के बजाय जमीनी स्तर पर अधिक समय दे सके और मतदाता पर अपना ध्यान केंद्रित रख सके.

जमीनी रणनीति को और बेहतर करने में आरएसएस ने भाजपा की मदद की. राम माधव जैसे चेहरों को अहम भूमिका दी गयी और इन्होंने बेहतर प्रदर्शन करके दिखाया भी.

पार्टी नेता बताते हैं, “बिहार और दिल्ली चुनावों से मिले सबक हमारे लिए कारगर रहे हैं. हमें अन्य राज्यों में भी उसे लागू करना चाहिए. हमें राज्य स्तर के नेतृत्व को और स्थानीय मुद्दों को अधिक महत्व देना चाहिए.”

विपक्ष के बगैर देश

भाजपा काफी शिद्दत से इस दिन की प्रतीक्षा कर रही थी. कई ऐसी योजनाएं हैं जिनको भाजपा ने रोक कर रखा था और पार्टी इनके लिए सही मौके का इंतजार कर रही थी. अब वह मौका आ गया है. चाहे वह संगठनात्मक स्तर पर परिवर्तन हों, शाह की टीम को फिर से बनाने की बात हो या फिर कैबिनेट में बदलाव, भाजपा को इन कामों को करने के लिए अच्छा मौका मिल गया है. पार्टी इन कामों को करना चाहती तो थी, लेकिन चुनावों में हार और विपक्ष के हमलों की वजह से संकोच करती थी.

भाजपा के लिए सबसे अच्छी बात है कांग्रेस की हार. अब कांग्रेस के पास जो सबसे बड़ा राज्य बचा है, वह है कर्नाटक. अपने अधिकांश किले वे खो चुके हैं और विधानसभा चुनावों में मिली हार निश्चय ही संसद में और संसद के बाहर आक्रामक भूमिका में नजर आती रही कांग्रेस के पर कतरने का काम करेगी.

विधानसभा चुनावों में मिली हार संसद में और संसद के बाहर कांग्रेस के पर कतरने का काम करेगी

लोकसभा में कम संख्या के बावजूद कांग्रेस ने संसद और उसके बाहर मुख्य विपक्ष की भूमिका निभायी है. आक्रामक कांग्रेस की वजह से कई बार भाजपा को शर्मिंदगी भी उठानी पड़ी है और इसने बीजेपी को सदन में उन कामों को करने से रोका है, जो वह करना चाहती थी. कांग्रेस के नेतृत्व और उसकी आक्रामकता को इन नतीजों से गहरा धक्का लगेगा.

कमजोर कांग्रेस और बीमार वाम दल अब सदन में विपक्ष का एजेंडा तय नहीं करेंगे. इसका मतलब है उच्च सदन में भी अधिक विभाजित विपक्ष, जहां एनडीए अल्पमत में है. इससे भाजपा को दोनों सदनों में अधिक मित्र बनाने में मदद मिलेगी.

नतीजों के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में अमित शाह ने कहा, “पश्चिम बंगाल में ममता और तमिलनाडु में जयललिता को जीत की बधाई. हम उन सभी का स्वागत करते हैं जो देश में विकास लाने के लिए हमारे साथ आना चाहते हैं.”

भाजपा इस मौके का इस्तेमाल अन्य राज्यों में भी ‘अच्छे दिन’ वाला माहौल लाने के लिए करेगी और पंजाब, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के लिए आक्रामक रूप से तैयारी करेगी. एक भाजपा नेता ने कहा, “ये चीजें (जीत) माहौल बनाने में मदद करती हैं. जीत का संदेश कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ायेगा और यह पार्टी के पक्ष में जायेगा.”

भाजपा के लिए, इन राज्यों में सीटें जीतना ऐतिहासिक है. लेकिन जो चीज भाजपा और मोदी के लिए खुशी लाई है, वह है कांग्रेस की हार. मोदी और भाजपा चाहते हैं कांग्रेस के बगैर भारत. वे इस दिशा में कुछ कदम बढ़ा चुके हैं. जैसा कि एक भाजपा नेता कहते हैं, “कांग्रेस मुक्त भारत ही भाजपा के लिए असली अच्छे दिन है.”

First published: 20 May 2016, 4:23 IST
 
पाणिनि आनंद @paninianand

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बीबीसी हिन्दी, आउटलुक, राज्य सभा टीवी, सहारा समय इत्यादि संस्थानों में एक दशक से अधिक समय तक काम कर चुके हैं.

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