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एसिड अटैक नहीं है माफी योग्य अपराध, इसकी भरपाई करना मुश्किल: सुप्रीम कोर्ट

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 March 2019, 11:11 IST

एसिड अटैक को सुप्रीम कोर्ट ने सबसे ज्यादा असभ्य और निर्मम करार दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ये एक ऐसा अपराध है, जो माफी के लायक नहीं है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला एक युवती के ऊपर तेजाब फेंकने के दोषियों को सजा सुनाते हुए कहा.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दो दोषियों को सजा सुनाते हुए पीड़ित युवती को डेढ़-डेढ़ लाख रुपये अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया है. बता दें कि इस मामले में दोनों दोषी पांच साल की सजा काट चुके हैं. दोनों दोषियों पर साल 2004 में 19 वर्षीय युवती पर तेजाब का आरोप लगा था. हिमाचल प्रदेश की पीड़ित युवती को कोर्ट ने मुआवजा देने का निर्देश दिया है.

जस्टिस एएम खानविलकर और अजय रस्तोगी की पीठ ने कहा, "वास्तव में इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि पीड़ित को दोषियों द्वारा असभ्य व निर्मम अपराध की वजह से दर्द झेलना पड़ा और उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती जो कुछ पीड़ित के साथ हुआ. इस तरह के अपराध किसी भी तरह के क्षमादान के योग्य नहीं है. पीड़ित ने जिस तरह की भावनात्मक पीड़ा को झेला है, उसकी भरपाई आरोपी को सजा सुनाकर या मुआवजा देकर नहीं की जा सकती."

सुर्पीम कोर्ट ने राज्य सरदार की याचिका पर ये आदेश दिया है, जिसमें हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी. इस मामले में हिमाचल हाईकोर्ट ने दोनों दोषियों को सुनाई गई सजा में करावास की समयसीमा घटाकर 10 वर्ष कर दिया था.

सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया गया कि दोनों दोषियों ने सजा काट ली है और हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार जुर्माना जमा किया है. दोषियों को पिछले साल 9 दिसंबर को जेल से रिहा किया गया था. इस मामले में पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है, लेकिन दोषियों को 1.5 लाख रुपये का अतिरिक्त मुआवजा देना होगा.

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First published: 20 March 2019, 11:11 IST
 
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