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बिहार: वैशाली में एसिड अटैक पीड़िता ने की आत्महत्या

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 July 2016, 12:32 IST
(एजेंसी)

बिहार के वैशाली जिले में एक एसिड अटैक पीड़िता ने आत्महत्या कर ली है. खुदकुशी की यह घटना जिले के सराय थाना इलाके के अनवरपुर गांव की है. जहां 18 साल की मधु ने बिजली का तार पकड़ कर जान दे दी.

मधु के चेहरे पर पर 24 सितंबर 2014 को कुछ असामाजिक तत्वों ने तेजाब फेंक दिया था. उस घटना के बाद मधु के माता-पिता उसे इलाज के लिए पटना लेकर आए. बताया जा रहा है कि वह काफी गरीब है और बड़ी मुश्किल से उसका इलाज करा रहे थे.

खबरों के मुताबिक घटना के बाद भी असामाजिक तत्वों के द्वारा उसे और उसके परिवार को लगातार धमकी दी जा रही थी. परिवार वालों का कहना है कि इलाज के बावजूद मधु का चेहरा तेजाब के कारण इतना विकृत हो चुका था कि वह घर से बाहर नहीं निकलती थी.

अभियुक्तों पर धमकी देने का आरोप

मधु के परिवारवालों ने आरोप लगाया है कि तेजाब फेंके जाने के मामले में तीन लड़कों की गिरफ्तारी हुई थी, लेकिन कुछ ही दिनों पहले वह जेल से जमानत पर छूट कर बाहर आ गए थे.

यह मामला कोर्ट में अब भी लंबित चल रहा है और अपराधियों के द्वारा उन्हें केस वापस लेने के लिए लगातार धमकी दी जा रही थी.

परिवार वालों का कहना है कि इस मामले में उन्होंने जिला प्रशासन से कई बार शिकायत की, लेकिन उनकी ओर से कोई सहयोग नहीं मिला. ऐसे हालात में मधु इसके लिए खुद को जिम्मेदार मानने लगी थी और उसने बिजली का तार पकड़कर आत्महत्या कर ली.

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का उल्लंघन

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक पीड़िता के मामले में स्पष्ट गाइड लाइन जारी की है, लेकिन प्रशासन के द्वारा मधु के केस में उन दिशा-निर्देशों का अनुपालन नहीं किया गया.

सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक कोई भी अस्पताल तेजाब हमले के पीड़ित का इलाज करने से मना नहीं कर सकता. सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारों को तेजाब हमले के शिकार को फौरन कम से कम तीन लाख रुपये की मदद मुहैया करानी होगी.

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार पीड़ित को मुफ्त इलाज मुहैया कराना भी सरकार की ही जिम्मेदारी है. मुफ्त इलाज का मतलब पीड़ित के अस्पताल के अलग कमरे, खाने और दवाइयों के साथ-साथ सर्जरी का भी खर्च सरकार ही वहन करेगी. इसके अलावा राज्य में तेजाब की खुली बिक्री पर रोक लगाना भी शामिल है.

सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में यह भी कहा था कि एसिड अटैक के पीड़ित को सर्टिफिकेट मिलेगा, जिससे भविष्य में उसे सारी सुविधाएं मिल सकें. ये सर्टिफिकेट पीड़ित की प्रथामिक चिकित्सा करने वाला अस्पताल जारी करेगा.

First published: 4 July 2016, 12:32 IST
 
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