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बेजवाडा विल्सन: मैला ढोने की प्रथा के खिलाफ मुहिम के नायक

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 July 2016, 14:09 IST
(साभार: humsamvet.in)

दलित मानवाधिकार कार्यकर्ता बेजवाडा विल्सन को साल 2016 का रमन मैग्सेसे अवॉर्ड देने की घोषणा की गई है. उनके अलावा कर्नाटक के संगीतकार टीएम कृष्णा को भी यह सम्मान दिया जाएगा.

बेजवाडा विल्सन कर्नाटक के एक दलित परिवार में पैदा हुए और उन्होंने सफाई कर्मचारियों के लिए मानवाधिकार की लड़ाई लड़ी. विल्सन पिछले कई सालों से मैला ढोने की प्रथा के खिलाफ मुहिम चला रहे हैं.

सफाई कर्मचारी आंदोलन के अध्यक्ष विल्सन का दावा है कि उनके संगठन के प्रयासों की वजह से पांच राज्यों- कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, दिल्ली और हरियाणा में ये प्रथा पूरी तरह समाप्त हो गई है. इस मसले पर वह 'भीम यात्रा' भी निकाल चुके हैं.

कर्नाटक के कोलार में मडिगा समुदाय में जन्मे विल्सन के माता-पिता मैला ढोने का काम करते थे. इस समुदाय के अधिकतर लोग इस अमानवीय पेशे से जुड़े हैं. विल्सन ने महसूस किया कि पढ़ाई पूरी करने के बावजूद उन्हें भी यही काम करना होगा.

यह बात विल्सन के लिए असहनीय थी और उनके मन में खुदकुशी का ख्याल तक आ गया. लेकिन उस समय 17 साल के रहे विल्सन ने संकल्प लिया कि वह इस समस्या को जड़ से खत्म करेंगे.

2010 में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार देश में लगभग दस लाख लोग ऐसे हैं जो इंसानी मैला ढोकर गुजारा चलाते हैं. केंद्र सरकार ने 1993 में इस प्रथा को समाप्त करने के लिए कानून बनाया था लेकिन देश के कई हिस्सों में आज भी यह प्रथा जारी है. विल्सन कहते हैं कि उनके संगठन के प्रयासों की बदौलत अब मैला ढोने वाले लोगों की संख्या घटकर करीब 2 लाख रह गई है.

First published: 27 July 2016, 14:09 IST
 
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