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खुदकुशी के मामले से इरोम शर्मिला बरी

कैच ब्यूरो | Updated on: 31 March 2016, 15:36 IST

सामाजिक कार्यकर्ता इरोम शर्मिला को दिल्ली की एक अदालत ने आत्महत्या की कोशिश के आरोप से बरी कर दिया है. मामला अक्टूबर 2006 का है. जंतर-मंतर पर आमरण अनशन करने के लिए शर्मिला के खिलाफ केस दर्ज हुआ था.

इरोम ने इस मामले में किसी तरह की माफी मानने से इनकार किया था. जिसके बाद उनके खिलाफ दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में चार मार्च 2013 को आत्महत्या की कोशिश का मुकदमा शुरू हुआ था.

इरोम ने आरोपों से साफ इनकार किया था. कोर्ट में अंतिम सुनवाई के दौरान जज ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद इरोम को बरी करने का फैसला सुनाया.

कौन हैं इरोम शर्मिला?

इरोम शर्मिला पूर्वोत्तर में सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (आफ्सपा) खत्म करने के लिए  लंबे अरसे से संघर्ष कर रही हैं.मणिपुर से आफ्सपा हटाने की मांग को लेकर चार नवंबर 2000 को इरोम आमरण अनशन पर बैठी थीं.

लंबे अरसे से इरोम न्यायिक हिरासत में चल रही थीं. लेकिन इंफाल की एक अदालत ने एक मार्च 2016 को उन्हें रिहा करने का आदेश दिया था. सीजेएम ने फैसले में कहा था कि इरोम के खिलाफ आत्महत्या के प्रयास का सबूत नहीं है.

न्यायिक हिरासत से छूटने के बाद भी इरोम की भूख हड़ताल जारी है. जब वो जेल में थीं तो नाक के रास्ते ड्रिप लगाकर उन्हें जबरदस्ती खाना खिलाया जाता था. 

क्या है सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून ?

सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (आफ्सपा) 1958 में बना था. इसे लेकर सामाजिक कार्यकर्ता अक्सर सवाल उठाते रहे हैं. कानून के तहत उग्रवाद प्रभावित इलाकों में सेना को बिना वारंट के तलाशी लेने और गिरफ्तारी का अधिकार है.

इस कानून की आड़ लेकर सुरक्षाबलों पर नागरिकों के मानवाधिकार हनन के आरोप भी लगे हैं. अभी जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के कुछ इलाकों में आफ्सपा लागू है.

पिछले साल गृह मंत्रालय ने एक आधिकारिक समिति की आफ्सपा खत्म करने की सिफारिश खारिज कर दी थी.

First published: 31 March 2016, 15:36 IST
 
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