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'चुनाव परिणाम प्रभावित कर सकता है आधार डाटा'

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 April 2018, 9:46 IST

आधार कार्ड में दर्ज व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता को लेकर पूरे देश में सवाल उठ रहे हैं. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने एक गंभीर सवाल और खड़ा कर दिया है. कोर्ट का कहना है कि आधार का डाटा लीक होने से चुनाव के परिणाम प्रभावित हो सकते हैं.

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने देश में डाटा सुरक्षा कानून न होने को लेकर सवाल उठाया. पीठ ने कहा कि जब देश में डाटा सुरक्षा कानून नहीं है तो ऐसे में यह कहना कि लोगों का डाटा सुरक्षित है, कहां तक उचित है.

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि ये वास्तविक आशंका है कि आधार के आंकड़े किसी देश के चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं और यदि ऐसा होता है क्या लोकतंत्र बच पाएगा. भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के वकील ने दलील दी कि प्रौद्योगिकी का विकास हो रहा है और भारत के पास तकनीकी विकास की अपनी सीमाएं हैं.

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इस पर न्यायमूर्ति चंद्रचूड ने कहा, ज्ञान की सीमाओं के कारण हम वास्तविकता के बारे में आंख मूंदे नहीं रह सकते हैं, क्योंकि हम कानून को लागू करने जा रहे हैं जो भविष्य को प्रभावित करेगा. यूआईडीएआई की ओर से कहा गया है कि आधार के तहत डाटा का संग्रह कोई परमाणु बम नहीं है. इस तरह का डर याचिकाकर्ताओं की तरफ से फैलाया हुआ डर मात्र है.

आधार डाटा परमाणु बम नहीं है

आधार कार्ड की गोपनीयता को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट भी सरकार से डाटा लीक पर लगातार सवाल कर रही है. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने इ मामले पर सुनवाई करते हुए आधार कार्ड में दर्ज जानकारी के सुरक्षित होने को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं. शीर्ष अदालत ने कहा कि आधार का डाटा लीक होने से चुनाव के परिणाम प्रभावित हो सकते हैं. पिछले हफ्ते सर्वोच्च अदालत ने 1.3 अरब भारतीयों के डेटा के संभावित दुरुपयोग के बारे में चिंता व्यक्त की थी. इस पर यूआईडीएआई ने कहा था कि 'आधार डाटा परमाणु बम नहीं है.'

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देश में नहीं है कोई भी डाटा सुरक्षा कानून

देश में कोई डाटा सुरक्षा कानून नहीं है. आपको बता दें कि अमेरिकी चुनाव में फेसबुक डाटा के इस्तेमाल पर भारी विवाद दुनिया के सामने आया था. इसको आधार मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड के डाटा को लेकर चिंता व्यक्त की थी. पांच जजों वाली संविधान पीठ ने कहा कि देश में कोई डाटा सुरक्षा कानून नहीं है, ऐसे में लोगों का डाटा सुरक्षित है यह कैसे कहा जा सकता है. इससे पहले शीर्ष अदालत ने कहा था कि कोर्ट को एक बेहतर वजह बताई जाए जिससे आधार को सभी सेवाओं के लिए अनिवार्य बनाने के कदम को अनुमति दे दी जाए.

वास्तविकता से आंख नहीं मूंदी जा सकती

डाटा लीक पर हम कानून लाने जा रहे हैं न्यायमूर्ति चंद्रचूड ने कहा, 'वास्तविकता से हम आंखे नहीं मूंद सकते है, क्योंकि हम एक कानून लाने जा रहे हैं जो भविष्य को प्रभावित करेगा.' वहीं सुनवाई के दौरानयूआईडीएआई की तरफ से राकेश द्विवेदी ने कहा कि प्रोद्योगिकी आगे बढ़ रही है और हमारे पास तकनीकी विकास की सीमाएं हैं. वेरिफिकेशन के लिए मांगे जाने वाले डेटा को साझा होने का कोई डर नहीं है. इस तरह का डर याचिकाकर्ताओं की तरफ से फैलाया हुआ डर मात्र है. 

First published: 18 April 2018, 9:46 IST
 
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