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असम में जीत के बाद पूर्वोत्तर में भाजपा का यह नया गठबंधन क्या है?

सादिक़ नक़वी | Updated on: 30 May 2016, 8:00 IST
QUICK PILL
  • गुवाहाटी में भाजपा सरकार के शपथग्रहण के दिन अमित शाह द्वारा घोषित नए मोर्चे की योजना भाजपा की दूरगामी रणनीति का हिस्सा है.
  • पूर्वोत्तर में अपनी पैठ मजबूत करने के साथ ही कांग्रेस के विरोध में क्षेत्रीय दलों को एकजुट करने की मंशा से इस नए मोर्चे का गठन किया गया है.

असम में अपनी जीत के बाद उत्साहित भाजपा अब नॉर्थईस्ट में अपने पैर मजबूत करने के बारे में विचार कर रही है. नॉर्थईस्ट में पार्टी के एक प्रमुख रणनीतिकार कहते हैं कि हाल ही में घोषित किया गया नॉर्थईस्ट डेमोक्रेटिक एलायंस इस दिशा में एक बड़ा कदम है.

मणिपुर में हुए विधानसभा चुनाव से करीब नौ माह बाद यह नए गठबंधन का प्रमुख त्वरित राजनीतिक उद्देश्य है. इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'एक्ट ईस्ट' पॉलिसी के भी महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है. 

हिमंत बिस्व सर्मा को इस मोर्चे का संचालक बनाया गया है. सर्मा को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और पार्टी के असम प्रमुख राम माधव के दिमाग की उपज बताया जा रहा है.

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गुवाहाटी में नई सरकार के शपथग्रहण के दिन शाह द्वारा घोषित इस मोर्चे की योजना कांग्रेस के विरोध में क्षेत्रीय दलों को एकजुट करने की है. कांग्रेस यहां तीन राज्यों में सत्ता में है जबकि सेवेन सिस्टर्स स्टेट के महत्वपूर्ण हिस्से त्रिपुरा में वाम की सरकार है. 

मोर्चे का मुख्य उद्देश्य 'नॉर्थईस्ट का सर्वांगीण विकास और राज्यों एवं केंद्र सरकार के बीच बेहतर तालमेल है

शाह ने ट्वीट कर इस बारे में जानकारी दी. उन्होंने इस बात का भी इशारा किया कि असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और सिक्किम के मुख्यमंत्री उनके इस गठबंधन से जुड़ सकते हैं. मोर्चे का मुख्य उद्देश्य 'नॉर्थईस्ट का सर्वांगीण विकास और राज्यों एवं केंद्र सरकार के बीच बेहतर तालमेल है.'

कांग्रेस मुक्त नॉर्थईस्ट की पार्टी की योजना के बारे में जानकारी देते हुए प्रमुख रणनीतिकार ने कहा, "इसका उद्देश्य नॉर्थईस्ट के बेहतर भविष्य के लिए कांग्रेस-विरोधी गठबंधन तैयार करना है."

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असम चुनाव में भाजपा के अभियान की रणनीति से जुड़े गुवाहाटी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर नैनी गोपाल महंत कहते हैं कि यह एक स्मार्ट मूव (बेहतर कदम) है. उन्होंने कहा, "नॉर्थईस्ट के एकीकृत लक्ष्य को लेकर राजनीतिक रणनीति पार्टी की मदद करेगी. सभी राज्य असम से जुड़े हैं और वे इस सबसे बड़े राज्य को बड़े भाई की तरह मानते हैं."

असम में भाजपा के एक अन्य वरिष्ठ नेता कहते हैं, "समूचे नॉर्थईस्ट से दिल्ली में 25 सांसद पहुंचते हैं. अगर यहां पर कांग्रेस का खात्मा हो गया तो यह इसके लिए अंतिम वक्त ही होगा क्योंकि यह देश के अन्य हिस्सों में भी अपना जनाधार खो रही है. नागालैंड में नागा पीपुल्स फ्रंट है तो मणिपुर में मणिपुर पीपुल पार्टी, मिजोरम में मिजो नेशनल फ्रंट हैं, अगर यह सभी क्षेत्रीय दल इस मोर्चे से जुड़ गए तो कांग्रेस के लिए काफी मुश्किल खड़ी हो जाएगी."

भाजपा का कहना है कि अभी तक पूर्वोत्तर के छोटे राज्य अपनी बात प्रमुखता से नहीं रख पाते थे

इस मोर्चे के संचालक बनाए गए सर्मा को क्षेत्रीय दलों से निपटने का काफी अनुभव है. महंत कहते हैं, "पर्यवेक्षक बनकर मणिपुर में कांग्रेस को सत्ता में वापस लाने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी." 

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वे बताते हैं कि अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के काफी करीबी सर्मा ने मेघालय के मुख्यमंत्री के रूप में मुकुल संगमा की नियुक्ति कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. महंत के मुताबिक, "वो इस क्षेत्र की राजनीति से काफी अच्छी तरह वाकिफ हैं." एक सूत्र के मुताबिक असम में सर्बानंद सोनोवाल की सरकार में सर्मा उप मुख्यमंत्री पद पाने के काफी इच्छुक थे.

महंत यह भी बताते हैं कि कैसे यह मोर्चा मोदी की "एक्ट ईस्ट" पॉलिसी में मदद करेगा. अगर इस क्षेत्र का एकीकृत लक्ष्य बना लिया जाए तो कैसे विद्युत उत्पादन, कनेक्टिविटी और अन्य विकास संबंधी कामों में तेजी आ जाएगी. महंत अपनी बात के समर्थन में मोदी की हाल की पूर्वोत्तर यात्रा का उल्लेख करते हैं, "शिलॉन्ग में अपनी हाल की यात्रा के दौरान उन्होंने अपनी एक्ट ईस्ट पॉलिसी का जिक्र किया था."

एक अन्य रणनीतिकार कहते हैं केंद्र में राजग सरकार की मौजूदगी में पार्टी को नॉर्थईस्ट में एक बेहतर प्रतिनिधित्व की जरूरत है. कैसे यह प्रणाली इन राज्यों की मदद करेगी, इस बारे में बताते हुए वे कहते हैं, "अभी तक छोटे राज्य अपनी बात प्रमुखता से नहीं रख पाते थे." 

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अभी तक यह योजना पाइपलाइन में हैं, लेकिन यह मोर्चा नियमित बैठकें कर जरूरी काम शुरू कर देगा.

First published: 30 May 2016, 8:00 IST
 
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