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अफगानिस्तान से भारत क्यों लौटना चाहता है सिख समुदाय ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 July 2018, 11:16 IST

अफगानिस्तान में रह रहा सिख समुदाय रविवार को जलालाबाद में हुए आतंकवादी हमले में अपने कम से कम 13 सदस्यों की मौत के बाद भारत लौटने पर विचार कर रहा है. इकॉनिमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार समुदाय के कुछ सदस्यों ने जलालाबाद में भारतीय वाणिज्य दूतावास में हमले के बाद आश्रय मांगा है. इस हमले के पीड़ितों में अक्टूबर में होने वाले संसदीय चुनावों के लिए एकमात्र सिख उम्मीदवार अवतार सिंह खालसा और एक प्रमुख समुदाय कार्यकर्ता रावल सिंह शामिल थे.

अफगानिस्तान में भारत के राजदूत विनय कुमार ने रविवार को निशाना बनाये गए सिख समूह से मुलाकात की. जबकि भारत सरकार विस्फोट में मारे गए सिखों के अंतिम संस्कार में मदद कर रही है. वर्तमान में अफगानिस्तान में लगभग 300 से कम सिख परिवार रहते हैं. जबकि 1990 के दशक से पहले यहां तकरीबन 250,000 सिखों और हिंदुओं की संख्या थी.

भारत ने अफगानिस्तान के सिख और हिंदू समुदायों को दीर्घकालिक वीजा जारी किया है और वे अनिश्चित काल तक भारत में रह सकते हैं. हालांकि सिख समुदाय के कुछ सदस्य अब भी अफगानिस्तान छोड़ने की योजना नहीं बना रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार इस हमले की कड़ी निंदा की. भारत ने अफगानिस्तान में कई विकास परियोजनाओं में निवेश किया है और इसी साल मई में बागानान के उत्तरी प्रांत में सात भारतीय इंजीनियरों को बंदी बनाया गया था.

तालिबान शासन के दौरान अफगानिस्तान में अल्पसंख्यक सिखों और हिंदुओं की पहचान करने की लिए कहा गया था विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने तालिबान को सिख समुदाय को अफगानिस्तान में टारगेट करने के लिए कहा था. पाकिस्तान में भी अल्पसंख्यक सिख और हिंदू समुदाय को पाकिस्तानी तालिबान का लगातार निशाना बना रहा है.

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First published: 3 July 2018, 11:10 IST
 
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