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बीजेपी की तर्ज पर कांग्रेस भी बनाएगा बुजुर्गों का मार्गदर्शक मंडल

आकाश बिष्ट | Updated on: 17 April 2016, 19:54 IST
QUICK PILL
  • बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल की तर्ज पर कांग्रेस ने राज्यों में सलाहकार समिति बनाने का फैसला किया है. पार्टी की योजना इस समिति में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को जगह देने की है.
  • कांग्रेस का कहना है कि उनका सलाहकार मंडल बीजेपी से अलग है क्योंकि यह नेताओं को नजरअंदाज करने के लिए नहीं बनाया जा रहा है.
  • कहा जा रहा है कि वरिष्ठ नेताओं द्वारा राहुल गांधी की बार-बार आलोचना किए जाने की वजह से पार्टी ऐसी सलाहकार समिति बनाने के लिए मजबूर हुई है.

कांग्रेस भी बीजेपी की राह पर चलती दिखाई दे रही है. पार्टी ने एक सलाहकार समिति बनाए जानेे की घोषणा की है. कांग्रेस पहले ही महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस सलाहकार समिति का निर्माण कर चुकी है और अब उसकी योजना अन्य राज्यों में भी ऐसी ही सलाहकार समिति बनाने की है जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया जाएगा.

2014 के लोकसभा चुनाव में जीतने के बाद बीजेपी ने अपने वरिष्ठ नेताओं के लिए मार्गदर्शक मंडल बनाया था और इसमें उन नेताओं को जगह दी गई थी जिन्हें मोदी कैबिनेट में कोई जगह नहीं मिल पाई थी. अब कांग्रेस की भी योजना अन्य राज्यों में ऐसी समितियां बनाकर अपने वरिष्ठ नेताओं को उसमें फिट करने की है.

राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद इस समिति को बनाए जाने की औपचारिक घोषणा हो सकती है. कांग्रेस के एक महासचिव ने अपना नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया, 'ऐसे कई राज्य हैं जहां हम अपने बड़े नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं कर पाए हैं. उनकी सलाह बेहद जरूरी है और वह अपने अनुभवों से पार्टी को सींचते रहेंगे.'

बुजुर्गों की सलाह

महाराष्ट्र सलाहकार समिति की घोषणा 12 अप्रैल को की गई. पार्टी ने कहा कि समिति में 15 सदस्य होंगे. महाराष्ट्र एग्जिक्यूटिव कमेटी के सदस्य और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता विलास मुतेवार ने कहा कि ऐसी समितियों के निर्माण से पार्टी को मदद मिलेगी.

मुतेवार ने कहा, 'कई राज्यों में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं जो मुख्यमंत्री, राज्यपाल, केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस प्रमुख रह चुके हैं. यह अच्छी बात है कि सभी नेताओं को शामिल किया जा रहा है. चुंकि ये सभी नेता दिनोंदिन के काम में पार्टी की मदद नहीं कर सकते इसलिए उनसे राजनीतिक मसलों पर सलाह ली जाएगी. कई अहम मामलों पर उनके अहम विचारों से पार्टी को मदद मिलेगी.'

बीजेपी से अलग

बीजेपी ने हालांकि मार्गदशर्क मंडल बनाकर वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को उसमें जगह दी थी. जबकि कांग्रेस अपनी समिति में प्रासंगिक वरिष्ठ नेताओं को जगह देने की योजना बना रही है.

बीजेपी ने मार्गदशक मंडल का गठन आडवाणी और जोशी को पार्टी के नीति निर्माण की प्रक्रिया से बाहर रखने के लिए किया था. हालांकि यह नीति उस वक्त विफल होती साबित दिखी जब बिहार चुनाव में हार के बाद इन नेताओं ने हार का ठीकरा मोदी और बीजेपी प्रेसिडेंट अमित शाह पर फोड़ा.

पार्टी में नेताओं का एक बड़ा तबका ऐसा है जो यह मानता है कि राहुल गांधी के कांग्रेस में कमान संभालने के बाद से बड़े नेताओं को हाशिए पर धकेला जा रहा है

कांग्रेस नेताओं का दावा है कि उनकी सलाहकार समिति इसी मुद्दे पर बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल से अलग हो जाती है. उनका कहना है कि पार्टी राहुल गांधी के पीछे खड़ी है जबकि बीजेपी में ऐसा नहीं है.

कांग्रेस के एक नेता ने कहा, 'हमारी कोशिश अपने बड़े नेताओं को खामोश कराने की नहीं है. बदले में हम उन्हें एक जगह दे रहे हैं जहां से वह हमें सलाह दे सकें.'

राहुल पर नाराजगी

हालांकि पार्टी में नेताओं का एक बड़ा तबका ऐसा है जो यह मानता है कि राहुल गांधी के कांग्रेस में कमान संभालने के बाद से बड़े नेताओं को हाशिए पर धकेला जा रहा है. इस वजह से कई नेता पार्टी से नाराज भी चल रहे हैं.

पहला मामला एचआर भारद्वाज का है जिन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को दिए गए इंटरव्यू में कांग्रेस पर बड़ा हमला करते हुए यहां तक कह डाला कि पार्टी कई बार कुछ मुद्दों पर अपने स्टैंड से भटक गई.

भारद्वाज ने कहा यूपीए एक के दौरान जब पार्टी उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाना चाहती थी तब उन्होंने इसका विरोध किया था. उस वक्त मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री हुआ करते थे.

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भारद्वाज के बयान को लेकर पूछे जाने पर कांग्रेस के एक नेता ने कहा, 'आपको अपने दोस्तों को करीब रखना होता है. नहीं तो वह आपके लिए असहज स्थिति पैदा कर सकते हैं.'

2014 में पार्टी की निर्णायक हार के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इसके लिए राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहराया था और उनके नेतृत्व पर सवाल तक उठा दिए थे. कांग्रेस में कई लोगों को लगता है कि वरिष्ठ नेताओं की तरफ से राहुल गांधी की बार बार आलोचना किए जाने की वजह से पार्टी ऐसी सलाहकार समिति बनाने के लिए मजबूर हुई है.

First published: 17 April 2016, 19:54 IST
 
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