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बुजुर्ग दिवस: युवाओं के लिए मिसाल हैं 60 प्लस की ये 7 शख्सियतें

हेमराज सिंह चौहान | Updated on: 30 September 2017, 11:01 IST

इंडिया में अगर कोई व्यक्ति साठ साल पूरा कर लेता तो समझा जाता है कि उस व्यक्ति में अब काम करने की उतनी क्षमता नहीं बची है जितनी एक सामान्य व्यक्ति में होती है. लेकिन कुछ लोगों के लिए उम्र कभी बाधा नहीं बनती. ऐसे लोग उम्र को ठेंगा दिखाकर अपना काम पूरी लगन के साथ करते हैं और सफल भी होते हैं. 

आज हम आपको 'अंतरराष्ट्रीय वरिष्‍ठ नागरिक दिवस' के मौके पर ऐसी ही शख्सियतों के बारे में बताएंगे जो उम्र को पीछे छोड़कर पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन कर रहे हैं और देश के करोड़ों लोगों के लिए उनके रोल मॉडल भी हैं.

1. नरेंद्र मोदी

नरेंद्र दामोदरदास मोदी इस समय देश के प्रधानमंत्री है. अपनी नेतृत्व क्षमता से उन्होंने हर किसी को प्रभावित किया है. ये बात उनके विरोधी भी मानते हैं. हाल ही में खुद राहुल गांधी ने विदेश में उनकी तारीफ की थी कि वो जनता से आसानी से संवाद स्थापित कर लेते हैं. उनके नेतृत्व में 2014 में भाजपा ने अपने बलबूते बहुमत पाकर पहली बार केंद्र में सरकार बनाई. आज कई युवा ये खुलकर मानते हैं कि वो मोदी की वजह से राजनीति में दिलचस्पी रखते हैं और वो उनके रोल मॉडल हैं.

2. कपिल देव

कपिल देव की गणना भारत के सर्वश्रेष्ठ कप्तान और ऑलराउंडर के तौर पर होती है. वो 60 साल की उम्र पार करने के बाद भी एक्टिव हैं. कपिल देव की कप्तानी में ही भारत ने 1983 में पहली बार क्रिकेट वर्ल्डकप जीता था. आज भी आपको उनकी आवाज़ कमेंट्री बॉक्स या टीवी स्टूडियो में सुनने को मिल जाएगी. वो भारत की तरफ से टेस्ट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों में दूसरे नंबर पर हैं. कपिल देव पर एक बायोपिक फिल्म बन रही है. इसमें उनका किरदार एक्टर रणवीर सिंह निभा रहे हैं.

3. अन्ना हजारे

अन्ना हजारे को आज देश का हर युवा जानता है. अन्‍ना हजारे का वास्‍तविक नाम किसन बाबूराव हजारे है. उनकी अगुवाई में 2011 में लोकपाल की मांग को लेकर देशव्यापी आंदोलन हुआ जिसमें देश के करोड़ों लोगों ने हिस्सा लिया. अन्ना हजारे के सामने उस समय की मनमोहन सरकार को घुटने टेक कर लोकपाल बनाने के लिए हामी भरनी पड़ी थी. वो इस समय महाराष्ट्र के अहमद नगर जिले में स्थित रालेगांव सिद्धि मंदिर में रहते हैं. उनके प्रयासों से उनके गांव में रामराज्य जैसा माहौल है.

4. कैलाश सत्यार्थी

नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी बच्चों के अधिकारों और उनके साथ होने वाले शोषण के खिलाफ लंबे समय से लड़ाई लड़ रहे हैं. 26 साल की उम्र से वो बच्चों के सुरक्षित भविष्य की लड़ाई लड़ रहे हैं. वो बचपन बचाओ नाम से एक गैर सरकारी संस्था चलाते हैं. उनका यह संगठन अब तक 80,000 से ज़्यादा बच्चों को बंधुआ मजदूरी, मानव तस्करी और बालश्रम के चंगुल से छुड़ा चुका है. उन्हें 2014 में पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई के साथ संयुक्त रूप से शांति का नोबेल पुरस्कार मिला.

5. ई श्रीधरन

भारत के एक प्रख्यात सिविल इंजीनियर हैं. उन्हें भारत का मेट्रो मैन कहा जाता है. भारत की पहली मेट्रो सेवा कोलकाता मेट्रो की योजना भी उन्हीं की देन है. दिल्ली मेट्रो को उन्होंने अपनी लगन और संकल्प के बल पर निश्चित समय के अंदर पूरा करके दिखाया. 85 साल की उम्र में श्रीधरन देश के कई मेट्रो प्रोजेक्ट के मुख्य सलाहकार की भूमिका निभा रहे हैं. उन्हें साल 2001 में पद्मश्री और साल 2008 में पद्म विभूषण पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है.

6. रतन टाटा

रतन टाटा, टाटा समूह के मानद चेयरमैन हैं. उनकी देखरेख में ही साल 2011-12 के दौरान कंपनी के रेवेन्यू ने 100 बिलियन डॉलर का आंकड़ा छुआ था. कॉर्नेल विश्वविद्यालय और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के एक पूर्व छात्र रतन टाटा को भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण से भी नवाजा जा चुका है. हाल ही में फोर्ब्स मैगजीन ने दुनिया में सबसे अच्छा कारोबारी दिमाग रखने वाले जीवित दिग्गजों (लिविंग लीजेंड्स) की शीर्ष 100 लोगों की सूची में रतन टाटा को भी रखा है.

7. अजीत डोभाल

जीत डोभाल इस समय मोदी सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद पर आसीन है. पीएम मोदी ने उनकी योग्यताओं को देखते हुए ही उन्हें ये महत्वपूर्ण पद सौंपा है. अजीत डोभाल का जन्म उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में हुआ. अजीत डोभाल ने करियर में ज्यादातर समय खुफिया विभाग में ही काम किया है. उनके बारे में कहा जाता है कि वह छह साल तक पाकिस्तान में भारत के खुफिया जासूस रहे. साल 1988 में अजीत डोभाल को सैन्य सम्मान कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया था. यह सम्मान पाने वाले वह पहले पुलिस अफसर थे.

First published: 30 September 2017, 8:15 IST
 
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