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जैश से लिंक मिलना बाकी, लेकिन सख़ावत अली का नौकरी से लिंक टूट गया

शाहनवाज़ मलिक | Updated on: 12 May 2016, 12:01 IST
QUICK PILL
  • बाहरी दिल्ली की एक कंपनी में मैनेजर सख़ावत अली पांच मई को नौकरी के लिए \r\nसउदी अरब जाने वाले थे लेकिन 3 मई की रात उन्हें स्पेशल सेल ने उठा लिया.
  • सखावत की सउदी की एक कंपनी में उनकी \r\nनौकरी लग गई थी. वीजा और बाकी कानूनी जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्होंने\r\n काफी पैसा खर्च किया था. वह सब बर्बाद हो गया.
तीन 3 मई को दिल्ली, गाजियाबाद और सहारनपुर से उठाए गए लड़कों से पुलिस की हिरासत में पूछताछ अभी जारी है. पुलिस द्वारा गिरफ्तार तीन आरोपी मुहम्मद साजिद, शाकिर अंसारी और समीर अमहद की पुलिस रिमांड 14 मई को ख़त्म होने वाली है.

जिन 13 लड़कों को पुलिस ने हिरासत में लिया था उनमें सखावत अली भी थे. सखावत को दो दिन बाद पांच मई को सउदी अरब जाना था. एक कंपनी में उनकी नौकरी लग गई थी. लेकिन अब वो नौकरी भी गई और आगे का भी कुछ पता नहीं.

घटनाक्रम

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल (जिसने गिरफ्तारियां की थी) का दावा है कि साजिद के घर से दो आईईडी बरामद हुए हैं जिसमें से एक फट गया था. इसके बाद ही सेल हरकत में आई थी और 13 लोगों को अलग-अलग इलाक़ों से उठाया गया.

दोनों आईईडी फिलहाल एफएसएल को सुपुर्द कर दी गई हैं जिनकी जांच रिपोर्ट तैयार की जा रही है. शाकिर और समीर के घर से जेहादी लिटरेचर बरामद करने का दावा किया है लेकिन स्पेशल सेल ने इस कथित लिटरेचर के बारे में कोई विशेष जानकारी साझा नहीं की है.

चांद बाग़-देवबंद से गिरफ्तार हुए कथित जैश के लड़कों में किसी राजनीतिक दल ने ख़ास दिलचस्पी नहीं दिखाई है

चार मई को अपनी प्रेस रिलीज़ में स्पेशल ने कहा था कि उसे 18 अप्रैल को इस ग्रुप के जैश से संबंधों के बारे में पता चला. लेकिन आरोपी लड़कों के वक़ील एमएस ख़ान के मुताबिक सेल का कहना है कि वह लड़कों पर छह महीने से नज़र रखने का दावा कर रही है. साथ ही छह महीने से ही इनके फोन टेक्निकल सर्विलांस पर थे.

इन तीनों के अलावा सेल ने चार लड़कों को क्लीन चिट देते हुए शनिवार को छोड़ दिया था. इसके अगले दिन अन्य छह लड़कों को भी इस शर्त के आधार पर मुक्त किया गया है कि वे हर दिन लोधी कॉलोनी स्थित स्पेशल सेल में हाज़िरी देंगे.

यह शर्त छह लड़कों और उनके परिवारों के लिए सांसत का सबब बन गई है. सभी लड़के अपने परिजनों के साथ सुबह 11 बजे स्पेशल सेल के दफ्तर पहुंच जाते हैं और शाम सात-आठ बजे तक वहीं पड़े रहते हैं. आरोपियों के वकील एमएस ख़ान के मुताबिक स्पेशल सेल इस हफ़्ते तक इन्हें क्लीन चिट दे सकती है.

पढ़ें: जैश का पता नहीं, तब्लीगी जमात से जुड़े हैं चांद बाग़ के लड़के

उत्तर पूर्वी दिल्ली के एक एक्टिविस्ट डॉक्टर फहीम बेग़ रिहाई के बाद चांद बाग़ के पीड़ितों से मिलने उनके घर पहुंचे. उन्होंने बताया कि स्पेशल सेल ने जिन दस लड़कों को रिहा किया है उन्हें बाहर के लोगों मिलने-जुलने, बातचीत करने या पूछताछ से संबंधित कोई बात करने की सख्त मनाही है.

बेग़ के मुताबिक इनसे पूछा गया था कि जमात में ये लोग कहां-कहां जाते थे? साजिद से कितनी बार मिलते थे. क्या रात में होने वाली इशा की नमाज़ के बाद किसी आतंकी वारदात की तैयारी करते थे?

स्पेशल सेल की एक हफ़्ते तक चली तफ्तीश और पूछताछ के बाद एक बार फिर इस रिपोर्टर ने चांद बाग़ का दौरा कर रिहा आरोपितों और उनके परिजनों से मिलने की कोशिश की. आईईडी की बैटरी कहां से ख़रीदी थी, ये पता करने के लिए सोमवार को मुख्य आरोपी साजिद को चांद बाग़ लाया गया था.

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल (जिसने गिरफ्तारियां की थी) का दावा है कि साजिद के घर से दो आईईडी बरामद हुए हैं

सोमवार को सुबह 11 बजे साजिद की बहन महज़बीं लोदी कॉलोनी स्थित स्पेशल सेल के पुलिस स्टेशन पहुंचीं, लेकिन साजिद से उनकी पांच मिनट की मुलाकात शाम साढ़े सात बजे के आसपास हुई. साजिद ने उनसे इतना भर कहा कि फिक्र मत करो, मैं जल्दी रिहा हो जाऊंगा.

महज़बीं कहती हैं कि जब वो रात 10 बजे वापस चांद बाग़ पहुंची तो पता चला कि पुलिसवाले साजिद को शाम साढ़े चार बजे के आसपास इलाक़े में लेकर आए थे. उनके चेहरे पर रुमाल बंधा हुआ था और हथकड़ी पहना रखी थी. उन्हें परचून की एक दुकान पर ले जाया गया.

पुलिस का दावा है कि साजिद ने उस दुकान से एक जोड़ी रिमोट की बैटरी ख़रीदी थी. दुकान की पहचान होने पर साथ गए अफसरों ने दुकानदार से सेल के दफ्तर में अगले दिन हाज़िरी देने के लिए कहा.

बाहरी दिल्ली की एक कंपनी में मैनेजर सख़ावत अली पांच मई को नौकरी के लिए सउदी अरब जाने वाले थे लेकिन 3 मई की रात उन्हें स्पेशल सेल ने उठा लिया. फिर चार दिन तक पूछताछ के बाद उन्हें रविवार को रिहा कर दिया गया. इसके बाद से सख़ावत अली हर दिन सेल के पुलिस स्टेशन पहुंचकर तफ्तीश में शामिल हो रहे हैं.

पढ़ें: दिल्ली में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के नेटवर्क का भंडाफोड़

3 मई को स्पेशल सेल की हिरासत में आने के बाद सख़ावत के पिता शराफत अली ने उनका सऊदी अरब का टिकट कैंसिल करवा दिया था. शराफ़त कहते हैं कि हम तो उसके जाने की तैयारियों में मशगूल थे, फिर अचानक ये हादसा हो गया. वो गुस्से में कहते हैं कि पुलिस को अगर मेरे बेटे के बारे में जानना है तो वह उनकी पिछली कंपनियों में जाकर पता करें. वह अपने काम के प्रति गंभीर एक ईमानदार लड़का है. बेहतर काम की वजह से उन्हें हमेशा अलग-अलग कंपनियों से नौकरियों के ऑफर मिले. यह दाग उसके दामन पर लगने के बाद सउदी की नौकरी तो गई ही, अब आगे का मुस्तकबिल भी जाने क्या होगा?

सेल का खौफ, कोई कुछ भी बोलने को तैयार नहीं

जिन लड़कों को शुरुआती तफ्तीश के बाद पुलिस ने छोड़ दिया है वे सब बेहद डरे हुए हैं. कोई भी पुलिस की कार्रवाई या हिरासत में हुई पूछताछ के बारे में इस रिपोर्टर से बात करने को तैयार नहीं है. यहां कि कि उनके परिजन जिन्होंने इस रिपोर्टर से गिरफ्तारी के अगले दिन खुलकर बातचीत की थी वे भी बातचीत करने से मना कर रहे थे.

उन्हें पुलिस की सख्त ताकीद है कि वे किसी से बात न करें. परिजन इस बात से भी डरे हुए हैं कि रोज-रोज़ पुलिस स्टेशन बुलाए जाने की प्रक्रिया कहीं लंबी न खिंच जाए. गली नंबर 6 से उठाए गए अज़ीम अहमद के बड़े भाई कलीमुल्लाह ने बस इतना भर कहा कि ज़रूरत पड़ने पर मदद मागेंगे, फिलहाल हम बात नहीं करना चाहते. बाकियों का हाल भी कमोबेश ऐसा ही था.

'बेगुनाही साबित होने पर मुआवज़ा पुलिस की तनख्वाह से काटा जाए'

चांद बाग़, लोनी या देवबंद से गिरफ्तार हुए कथित जैश के लड़कों में किसी राजनीतिक दल या सामाजिक संगठन ने ख़ास दिलचस्पी नहीं दिखाई है. इलाक़े के लोगों को इस बात का भी ख़ौफ़ है कि उनके पीछे कोई नहीं है. वो बस चुपचाप इस मुसीबत से किसी तरह छुटकारा पाकर ज़िंदगी को पुराने ढर्रे पर लाना चाहते हैं.

आम आदमी पार्टी के ओखला विधायक अमानतुल्लाह ख़ान के अलावा यहां किसी राजनीतिक दल का कोई नेता नहीं आया. अमानत साउथ ईस्ट दिल्ली से विधायक हैं जबकि नॉर्थ ईस्ट दिल्ली से उनकी पार्टी का कोई नेता या विधायक इनसे मिलने नहीं पहुंचा.

इस बीच बुधवार की शाम जमीयत उल्मा ए हिंद की एक टीम यहां ज़रूर पहुंची. गली नंबर आठ के आगे वाली मस्जिद में एक आम सभा बुलाई गई थी. जमीयत के महासचिव मुफ़्ती अब्दुल राज़िक ने इस सभा को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि 3 तारीख़ की रात हुई पुलिस की कार्रवाई के बाद से जमीयत की कानूनी सेल सक्रिय है. वह पुलिस की कार्रवाइयों पर लगातार नजर रख रही है.

आम सभा में जमीयत ने कुछ बातें कहीं जिनमें से मुख्य हैं- कि मुकदमे की प्रक्रिया लंबी चलेगी, इसका ख़र्च जमीयत उठाएगी. इसके अलावा जमीयत ने यह मांग भी रखी कि जमीयत मोटा पैसा हर साल निर्दोष लोगों की रिहाई पर खर्च करती है. अगर चांद बाग़ के लड़के निर्दोष साबित होते हैं तो इन लड़कों को पूरा मुआवजा दिया जाय और यह मुआवज़ा सरकारी खज़ाने की बजाय पुलिसवालों की तनख्वाहों से काटकर दिया जाए.
First published: 12 May 2016, 12:01 IST
 
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