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राजनाथ सिंह: राजद्रोह कानून की हो रही है समीक्षा

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:51 IST

जेएनयू मुद्दे में राजद्रोह विरोधी कानून के विवादित इस्तेमाल करने के बाद हुए हंगामे को देखते हुए भारत सरकार राजद्रोह कानून की समीक्षा कर रही है. मंगलवार को लोकसभा में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने जानकारी दी कि लॉ कमीशन इस कानून के कुछ हिस्सों की समीक्षा कर रहा है.

बीती 9 फरवरी को जेएनयू कैंपस में लगे देश-विरोधी नारों के मामले में जेएनयू अध्यक्ष कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य की धारा 124 (ए) के तहत हुई विवादित गिरफ्तारी के मामले में संसद में सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं.

धारा 124 (ए) राजद्रोह का कानून है, जिसे देश की आजादी से पहले अंग्रेजों द्वारा साल 1870 में बनाया गया था. गौरतलब है कि जेएनयू विवाद के मामले में कन्हैया कुमार के अलावा उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य जेल में हैं. 

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संसद ने पिछले हफ्ते कांग्रेसी सांसद शशि थरूर के राजद्रोह कानून के 124 (ए) में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी.  थरूर ने कहा है कि, 'इसमें कोई शक नहीं है कि जेएनयू की घटना ने लोगों का ध्यान राजद्रोह कानून की ओर खींचा है.

थरूर ने अपने प्रस्ताव में कहा था कि ब्रिटिश काल में महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, ऐनी बेसेंट और बाल गंगाधर तिलक जैसे स्वतंत्रता सेनानियों पर राजद्रोह का केस लगाया गया था.

First published: 2 March 2016, 1:35 IST
 
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