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एक साल बाद दिल्ली में मुसलमानों को दफ़नाने के लिए नहीं मिलेगी दो गज ज़मीन

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 November 2018, 15:11 IST
(प्रतीकात्मक तस्वीर)

एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि देश की राजधानी दिल्ली में एक साल के बाद मुस्लिम कब्रगाहों में जगह ही नहीं बचेगी. इस कारण से दिल्ली में मुस्लिम परिवारों को अपने परिजनों के अंतिम संस्कार के लिए कठिनाई उठानी पड़ सकती है. दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने एक रिपोर्ट में इस बात की खुलासा किया. दिल्ली माइनॉरिटी कमिशन (डीएमसी) की एक रिपोर्ट में ये चेतावनी दी गई है कि साल भर के बाद दिल्ली के मुस्लिम कब्रिस्तानों में इतनी भी जगह नहीं बचेगी कि एक भी व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया जा सके.

हालांकि इस समस्या के निपटारे के लिए आयोग ने साथ ही में कुछ सुझाव भी दिए हैं. जैसे कि आयोग ने प्रस्ताव दिया है कि इस समस्या से निपटने के लिए भूमि आवंटन और अस्थायी कब्रों के प्रावधान को भी अपनाया जा सकता है. आयोग की इस रिपोर्ट को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जारी किया था.

इस रिपोर्ट में आयोग के एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली में प्रत्येक साल औसतन 13,000 मुस्लिमों का अंतिम संस्कार किया जाता है. लेकिन साल 2017 तक शहर में मौजूद कब्रिस्तानों में केवल 29,370 लोगों को ही दफनाने की जगह शेष थी. अगर इस आंकड़े से जोड़ आकर देखा जाए तो अगले साल तक दिल्ली में किसी भी कब्रिस्तान में एक भी कब्र बनाने की जगह नहीं बचेगी.

दिल्ली शहर के आकंड़ों को देखें तो शहर के विभिन्न इलाकों को मिलाकर कुल 704 मुस्लिम कब्रिस्तान हैं जिनमें से केवल 131 में ही मृतकों को दफनाया जा रहा है. रिपोर्ट में बताया गया है कि इन 131 कब्रिस्तानों में भी 16 पर मुक़दमे हैं जिसके चलते इन कब्रिस्तानों में भी मुस्लिम अपने परिजनों का अंतिम संस्कार नहीं कर पा रहे हैं.

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वहीं अन्य 43 कब्रिस्तानों पर किसी न किसी ने कब्जा किया हुआ है. जिस कारण मुस्लिमों द्वारा इसका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है. गौरतलब है कि आयोग ने 2017 में ह्यूमन डेवलपमेंट सोसाइटी के माध्यम से 'दिल्ली में मुस्लिम कब्रिस्तानों की समस्याएं एवं स्थिति' विषय पर एक अध्ययन कराया था. जिसकी रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है.  

First published: 24 November 2018, 15:11 IST
 
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