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प्रशांत किशोर की कार्यशैली से अब यूपी के कांग्रेसी भी खफा

आकाश बिष्ट | Updated on: 8 June 2016, 23:08 IST
(कैच)

पंजाब के बाद अब उत्तर प्रदेश (यूपी) में भी चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के खिलाफ असंतोष की आवाज उठने लगी है.

पंजाब कांग्रेस के प्रमुख कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किशोर पर पार्टी के अंदरूनी कामकाज में दखल देने का आरोप लगाया था. अब यूपी के नेता भी उनपर ऐसा ही आरोप लगा रहे हैं.

किशोर पर पार्टी के पदाधिकारियों को मनमाने ढंग से तलब करने और मीडिया से हर हफ्ते अनाधिकारिक रूप से मिलने का आरोप है. 

जय गुरुदेव, समाजवादी पार्टी और शिवपाल यादव

यूपी कांग्रेस का किशोर को लेकर काफी नकारात्मक रुख है. लेकिन एक भी नेता खुलकर सामने नहीं आना चाहता क्योंकि किशोर राहुल गांधी के करीबी माने जाते हैं.

प्रशांत किशोर ने  2014 के लोक सभा चुनाव में बीजेपी के लिए काम किया था और 2015 के बिहार विधान सभा चुनाव में जदयू-राजद के लिए. दोनों चुनावों में मिली सफलता के बाद कांग्रेस ने उन्हें अगले साल यूपी विधान सभा चुनावों के लिए रणनीतिकार चुना. लेकिन अब तक इससे कोई खास जमीनी बदलाव आता नहीं दिख रहा है. 

नाम न देने की शर्त पर एक कांग्रेस नेता ने कहा, "वो पार्टी पर एकाधिकार चाहते हैं. वो क्षेत्रीय नेताओं की अनदेखी कर रहे हैं जिसके बीज असंतोष उपज रहा है. किशोर  बार-बार मीडिया में स्टोरी करा रहे हैं कि यूपी कांग्रेस अध्यक्ष पद पर निर्मल खत्री को हटाकर किसी ब्राह्मण को लाना चाहिए. राज्य के नेता इसके विरोध में हैं."

कांग्रेसी नेता कहते हैं कि छह महीने में चुनाव होने वाले हैं इसलिए ऐसे बदलाव के लिए अब देर हो चुकी है.

पार्टी से खफा

किशोर की कार्यशैली से आहत कई कांग्रेसी नेता पार्टी छोड़ने पर भी विचार कर रहे हैं. इन नेताओं को लग रहा है कि टिकट बंटवारे में भी पार्टी पदाधिकारियों की नहीं, प्रशांत किशोर की चलेगी.

प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी नाम न देने की शर्त पर कहते हैं, "अगर सबकुछ उन्हें ही करना है तो हम यहां किसलिए हैं? हम ऐसे काम नहीं कर सकते. अगर सबकुछ ऐसा ही चलता रहा है तो हम ये सब उनके लिए छोड़ देंगे."

माना जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान भी प्रशांत किशोर को कई बार टोक चुकी है, खास तौर पर  राहुल गांधी की यूपी के सीएम उम्मीदवार के रूप में पेश करने और प्रियंका गांधी के चुनावी प्रचार की कमान संभालने की खबर के मीडिया में आने पर. फिर भी राहुल गांधी पार्टी कार्यकर्ताओं से ज्यादा किशोर पर भरोसा करते दिख रहे हैं.

अपने खिलाफ आ रही खबरों से अशांत हुए प्रशांत!

खबरों के अनुसार राज्य सभा चुनाव खत्म होने के बाद प्रदेश कांग्रेस में बड़े स्तर पर सांगठनिक बदलाव होने वाले हैं. ऐसे में कई नेता आगामी बदलाव को लेकर आशंकित हैं.

प्रदेश कांग्रेस के एक अन्य पदाधिकारी ने कहा, "इससे निर्णय प्रक्रिया को और नुकसान पहुंचा है. प्रदेश में कई कार्यक्रम इस वजह से रुके हुए हैं. ये फैसला जल्द से जल्द ले लेना चाहिए ताकि हम सबको पता चले कि किसी क्या भूमिका निभानी है."

राहुल को सुझाव

कांग्रेसी नेता दावा करते रहे हैं कि किशोर की भूमिका केवल चुनाव प्रचार और घोषणापत्र से जुड़े सुझाव देने तक है. लेकिन उनके आलोचक मानते हैं कि वो इससे कहीं आगे बढ़ चुके हैं.

इन नेताओं का दावा है कि किशोर को केंद्रीय नेतृत्व से पूरी मदद भी मिल  रही है. जब प्रशांत किशोर ने प्रदेश के 75 जिलों के लिए हर जिले से 20 समर्पित कार्यकर्ताओं की सूची मांगी तो उन्हें 1500 कार्यकर्ताओं के नाम दिए गए. 

इनमें से 800 कार्यकर्ताओं को आखिरी रूप से चुना गया. माना जा रहा है कि ये 800 कार्यकर्ता घर घर जाकर कांग्रेस का प्रचार करेंगे. जिससे पार्टी की हर जिले में पहुंच दिखाई दे.

यूपी कांग्रेस प्रदेश से आने वाले पूर्व मंत्रियों और पूर्व सांसदो को विधान सभा चुनाव में उतारना चाहती है

प्रदेश कांग्रेस के नेता चाहते हैं कि चर्चित पूर्व सांसदों और विधायकों को आगामी चुनाव में उतरने की इजाजत दी जाए जिससे पार्टी को प्रचार में मद मिलेगी जिसका फायदा चुनाव में हो सकता है.

प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारी कहते हैं, "हमने राहुल गांधी को सुझाव भेजा है. वरिष्ठ नेताओं से संपर्क करने से पहले हम उनकी औपचारिक अनुमति चाहते हैं."

राज्यसभा चुनाव मेें कांग्रेस की रणनीति, दुश्मन का दुश्मन दोस्त

जिन नेताओं को प्रदेश कांग्रेस के नेता विधान सभआ चुनाव में उतारना चाहते हैं उनमें प्रदेश से आने वाले पूर्व मंत्री जितिन प्रसाद, आरपीएन सिंह, सलमान खुर्शीद, श्रीप्रकाश जायसवाल और प्रदीप जैन शामिल हैं. वहीं पूर्व सांसद राजा राम पाल, पीएल पुनिया, कमल किशोर, प्रवीण सिंह एरों, निर्मल खत्री, जफर अली नक़वी, हर्ष वर्धन, मोहम्मद अजहरूद्दीन, राजकुमारी रत्ना सिंह, विनय कुमार पाण्डेय और अन्नु टंडन से भी विधायकी का चुनाव लड़ने के लिए कहा जा सकता है.

पार्टी पदाधिकारी कहते हैं, "इन नेताओं को अपने आसपास की सीट पर प्रत्याशी चुनने का भी अधिकार दिया जाएगा. इससे हमें अभी और आगे लोक सभा चुनाव में भी मदद मिलेगी. अगर ये बड़े नेता दो-दो सीटों का जिम्मा ले लें तो परिणाम हम सबके सामने होगा."

प्रदेश कांग्रेस के लिए अच्छी बात ये है कि इस सुझाव से प्रशांत किशोर भी इत्तेफाक रखते हैं.

First published: 8 June 2016, 23:08 IST
 
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